Forgotten Warrior's

इतीहास की प्रेरणा से ही, नये इतीहास का निर्माण होता है.
Forgotten Warrior's..!
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     *डॉ.बाबासाहब आंबेडकर 1 जनवरी, भिमा कोरेगाव में महावीरों को नमन करने क्यो जाया करते थे? क्यो की, जो इतीहास जानता है वे ही इतीहास का निर्माण करते है. इतीहास की जानकारी से समाज को उनके अस्तित्व एव स्वाभिमान का एहसास होता है, संघर्ष करने की शक्ति मिलती है जिससे नए इतीहास का निर्माण होने के लिए प्रेरणा भी मिलती है मतलब जो समाज अपना इतीहास जानता है वह समाज ही इतीहास का निर्माण कर सकता है.*
      *इतीहास को जानकर समझकर और आकलन कर नव ईतीहास निर्माण करने का संकल्प 1 जनवरी 2019 को करना जरुरी है. आज हमे महान सिदनाक के जैसे कर्तुत्वकी जरुरत है वह धैर्य जो आज वैचारिकता मे परावर्तीत हो चुका है जिसतरह बोधीसत्व अपने समाज की विपदा के दौरान अपने समाज की समस्या को सुलझाकर बवंडर मे फसी समाज की नैया को पार कराये ऐसे महानायक के निर्माण हेतु हर व्यक्ति ने सक्षमता से समाज की जिम्मेदारी लेनी जरुरी है, चलो याद करे ईतीहास की महानतम, अद्भुत और अनोखी दासता जो "महार" महावीरो का इतीहास जो भारत के हर व्यक्ति को अपने देशको सशक्त बनाने के लिये प्रेरित करेगा.*
*भिमा कोरेगांव का ईतीहास केवल मात्र संयोग न होकर यह बहादुरी, मनोधर्य, शैर्य और विरता का सिलसिला दैराने वाली जिद और स्वाभीमान की अद्भुत मिसाल है. यह लढाई अन्य लढाईयो से अलग है युद्ध मे किये पराक्रम से सिद्ध होता है की महार बटालियन ने यह विजय केवल संयोग मात्र न होकर आगे भी पराक्रम दैराकर स्वयं को सिद्ध किया.*
*बहुतायत लोगों को यह विजयी पराक्रम जानने की जरुरत है विजय केवल संयोग मात्र से नही होता बल्की जिद्द और साहस की विजयी दासता होती है यह कहानी इन लडाइयो मे महान पराक्रम से भी बया कर रही है.*
*बटालियन का पराक्रम सन 1826 मे काठीयावाड,1849 मे, मुल्तान और गुजरात, 1880 मे कंधार मे भी अपना पराक्रम दिखाया.पहले और दूसरे अफगान युद्ध, 1843 मियानी युद्ध,1856-57 पर्शीयन युद्ध, 8160 चायना युद्ध, 1865 अदन युद्ध,1867 अबीसीनीया युद्ध, सिंध युद्ध दूसरे अफगान युद्ध 1878-1895 के दैरान महार सैनिकों ने पुनः कोरेगाव मे किये शैर्य को साहस के साथ दोहराया. विजय यह संयोग न होकर वास्तविक महारो के विजय की गैरवशली दास्तां बयान करती है. सैनिक "सोनाक ताननाक" के वैयक्तिक पराक्रम की दासता मुबई के जिमखाना रास्ते को "जेम्स वॉडवी" रोड पर सोनाक ताननाका नाम आज भी मोजुद है. महावीरोने 16 अप्रैल 1880 मे अफगानिस्तान के डबरइ पोस्ट मे पराक्रम किया लढाई के दौरान अग्रेजोने ईन्हे वापसी के लिये काहा, पर लगातार 3 घंटे सैनिक लढकर 300 शत्रु सैनिक को मारा गिराया, उनकी स्मृती मे मुबई के युरोपियन जिमखाना रास्ते को "वॉडवी" नाम दिया गया और अलेक्साडरा गर्ल हायस्कूल की दीवार पर उन 3 बहादुर सैनिको का नाम अंकीत है.*
   *भारत का गौरवशाली इतिहास 1 जनवरी 1818 महार-राष्ट्र, पुणा मे भिमा नदी किनारे महार जाती के शैर्य की गाथा भिमाकोरेगाव का 75 फिट ऊंचा किर्तिस्तभ बताता है. महार जमात लड़ाऊ, झुजारु, सत्य, निष्ठा एव ईमानदार जमात जानी जाता है. शिवाजी माहाराज के प्राण जिस"जिवा"ने बचाये थे वे भी ईसी जमात से थे. संभाजी महाराज जो शिवाजी महाराज के पुत्र को विपरीत परीस्थीती मे समाधी देनेवाले गनु महार भी ईसी जमात से थे.*
*दूसरा बाजीराव पेशवा से युद्ध के दौरान Cap.F.F.Stauton,"शिरुर" से दि. 31 दिसंबर 1817 को 27 मिल पैदल चलकर, रात 8 बजे से सुबह 9 बजे कुल 12 घंटे बिना कुछ खाये पिये महार सेना; पेशवा के 28,000 विशाल सैन्य जिनमे 20,000 घुडसवार सैनिक और 8,000 आठ हजार पैदल सेना, को माञ 500 सैनिक जिनमे अधीकांश महार सैनीकोने भिमा कोरेगाव मे, 1 जनवरी 1818 को रात 9 बजे पेशवाई का अस्त कर दिया. ईसी शैर्य की गाथा को गौरवावीत करने हेतु किर्तीस्तभ ब्रिटीशोने बनकर सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्ति कर स्तंभ पर महावीरो के नाम अंकीत है वे नाम है,*
1)गननाग लखनाक
2)जेटनाग धैनाक
3)हरनाक
4)गोपाल नाक बालनाक
5)रामनाक
6)देवनाग आननाक
7)गवानाक धरमनाक
8)रेनाक वाननाक
9)वपनाक हरनाक
10)गणनाक
11)विटनाक धमनाक
12)वावनाक रामनाक
13)रुपनाक लखनाक
14)कालनाक कोडनाक
15)गणनाक बालनाक
16)अंबरनाक काननाक
17)रामनाक थेरनाक
18)गोदनाक कोठेनाक
19)रामनाक थेसनाक
20)गोदनाक कोठेनाक
21)सोमनाक कमलनाक नाईक
22)रगनाक गननाक
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*हम सब इतीहास से प्रेरित होकर नव वर्ष के अवसर पर सम्यक कार्य का संकल्प लेते है महावीरोको विनम्र अभीवादन*
*नव वर्ष की शुभकामनाये!*
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संदर्भ:-Dr.B.R.Ambedkar
Writing & Speeches val.17

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