राजश्री छत्रपति शाहुजी महाराज के प्रती कृतग्यता

राजश्री छत्रपति शाहुजी महाराज के प्रती कृतग्यता...! सत्य और वास्तव.
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*समता का नैसर्गिक तत्व समाज का वह वर्ग ठुकराता है जो अपने आपको सवर्ण उच्चवर्ण का समझते है, वह अज्ञानता के किचड स्वयं और समाज को और गहरे फसाये जा रहे है जो धर्म और संस्कृति के नाम पर जो विषमता, अज्ञानता का बिज समाज मे बो रहे है वे शाहु फुले अंबेडकर इन महापुरुषों की विचारधारा जो स्वतंत्र समता बंधुता का प्रतीनीधीत्व करती है यह तत्वज्ञान जो समाज मे प्रत्यक्ष रुप से कार्य कर सेवाभाव द्वारा किया जाता है जो राजश्री छत्रपति शाहुजी महाराज ने किया.*
   *छत्रपति शाहू महाराज के जीवन का एक प्रकरण है जब NT (नोमेडिक ट्राइब्स) के सैकड़ों लोगों को कर्नाटक के एक राजा ने चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था . उसी समय शाहू महाराज उस राजा से मिलने गए थे. वहां इन गिरफ्तार लोगों को देखा तो उन्होंने राजा से पूछताछ की. राजा ने उन्हें बताया और कहा कि इन्हें कठोर सजा देने वाले हैं . शाहू महाराज ने उनसे पूछा कि अगर ये आपका राज्य छोड़ दें तो क्या तब भी आप उन्हें सजा देंगे ? राजा ने कहा कि सजा तो दूर की बात है उलटा वे तो प्रसन्न होंगे. शाहू महाराज ने उनसे कहा कि आप इन्हें मुझे भेंट दे दें मैं इन्हें अपने राज्य में ले जाऊंगा. शाहू महाराज ने न केवल उन्हें ट्रेंड करवाया बल्कि उनसे प्रसिद्द राधानगरी बाँध बंधवाया. महाराजा ने उन्हें इंजिनियर बना दिया. इतना ही नहीं बल्कि महाराजा ने न केवल उन्हें अपना अंगरक्षक ही बनाया बल्कि किले की रक्षा की जिम्मेदारी भी सौंपी . तिरस्कार से ब्राह्मण उस समय उन्हें कहते थे कि महाराजा ने तो चोरों को ही तिजोरी की चाबी दे दी है. यह सब महाराज ने कोई उपकार की भावना के तहत नहीं किया बल्कि अपनत्व के कारण किया.

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