वृद्धाश्रम व संस्कारीक अभाव
*समीक्षा और चिकित्सा!!!*
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अमरावती के वृद्धाश्रम मे वृद्धो की समस्या जानकर इस विषय का हमेशा का समाधान जरूरी है इस समस्या के साथ साथ भिखारी की संख्या मे वृद्धि? पढे लिखोंकी बेकारी,रोजगार? गरीबी,भुखमरी? अंधविश्वास?धार्मिक उन्माद? जातिवाद? धर्मों मे विवाद? भ्रष्टाचार ?और बहोत कुछ सारी समस्या को सुलझाने का मार्ग हमारे महापुरुषेंने बताया है समस्या को सुलझाने से पहले महत्वपूर्ण तत्थ समीक्षा और चिकित्सा के आधार पर सुलझाना जरूरी है.*
*सामाजिक समस्या पर समाज के जागरूक लोगे ने विषय की समीक्षा और चिकित्सा करना जरुरी है और निडरतापूर्वक इस आधार के साथ अपनी बात समीक्षा और चिकित्सा के साथ रखनी चाहिए.*
*समीक्षा:-*
*विषय व्यक्ति के अंदर की कमियों/खामियों का सामना करना मतलब समीक्षक करना होता है . उदा. 18 मार्च 1956 को आग्रा मे डॉ.बाबासहाब ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपने आंदोलन की समीक्षा की, आमतौर पर कोई इंसान बंद कमरे में भी अपनी और अपने कार्य की समीक्षा नहीं करता, क्योंकि समीक्षा करने से अपने अंदर की कमियों/खामियों का सामना करना पड़ता है. यह एक दुखद प्रक्रिया है. डॉ.बाबासाहब खुद जो आंदोलन वे चला रहे थे उसकी सार्वजनिक समीक्षा कर रहे थे. उन्होंने कहा कि मैं तीन बातें करने में कामयाब रहा.*
*१) जिन्हें मनुस्मृति ने शिक्षा से वंचित किया था उन्हें शिक्षा का अधिकार दिया.*
*२)जिन्हें कानून बनाकर साधन संपत्ति से वंचित रखा था, उन्हें मैंने नौकरी के माध्यम से साधन संपत्तिवान बनाया.*
*३)हजारों सालों से जिनका स्वाभिमान मर चूका था ऐसे लोगों में मैंने स्वाभिमान निर्माण किया.*
*इसके बावजूद भी मैं इस बात में असफल रहा, मैंने शहरों में रहने वाले लोगों के लिए बहुत कुछ किया, लेकिन मैं गाँव देहातों में रहने वाले मेरे लोगों के लिए कुछ नहीं कर पाया जब भी मुझे मैका मिलेगा उनकी सेवा करना प्रथम कर्तव्य समझूंगा. इस बात उन्हें बड़ा दुःख होना यह स्वयं की समीक्षा हुई हमे भी ऐसी समीक्षा करनी चाहिए.*
*चिकित्सा:-*
*व्यक्ति कह रहा है और अन्य सुन रहे है जिसके ऐतिहासिक तत्थ और गवाह पर व्यक्ति की बात कसौटी पर उतरना है व्यक्ति की बात माननेसे नहीं चलेगा उसकी गहरी खोज करनी पड़ेगी दूसरे कहते है इसपर भरोसा न करते हुए स्वयं के बुद्धि की कसौटी पर तत्थ और प्रमाण के साथ सिद्ध करना मतलब चिकित्सा करना है. उदा. बुद्ध कहते है मै कह रहा हु इसलिये विश्वास मत करो उसे अपने बुद्धि की कसौटी पर सिद्ध करो.*
*हमने सामाजिक समस्या की समीक्षा और चिकित्सा कर सच को उजागर कर अपने आवाज को बुलंद करना जरूरी है.*
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