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Showing posts from 2023

मातंग महारों के कष्ट

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मुक्ता सालवे कक्षा तिसरी का निबंध  ‼️‼️‼️ मातंग महारों के कष्ट 🔥🔥🔥🔥          लहूजी वस्ताद साल्वे मांतंग महारों के बच्चों को राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले के स्कूल में जाने के लिए प्रेरित करते थे। उस स्कूल में पढने वाली एक लड़की का नाम मुक्ता सालवे था। मुक्ता साल्वे नाम की मांतंग जाति की यह लड़की राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले के स्कूल में पढ़ती थी। उस स्कूल के एक कार्यक्रम में उनसे निबंध लिखने को कहा गया उस वक्त मुक्ता साल्वे तीसरी क्लास में पढ़ती थीं। उसने एक निबंध लिखा उस समय उनकी उम्र 12 साल रही होगी।   यह निबंध 15 फरवरी 1855 को लिखा गया था। उनके उत्कृष्ट निबंध के लिए उन्हें सर मेजर कैंडी द्वारा पुरस्कृत किया गया था, अर्थात उनका निबंध इतना सराहनीय था कि उन्हें पुरस्कृत किया गया। इस निबंध को पढ़ने के बाद हमें तत्कालीन समाज के बारे में बहुत सी बातें पता चलेंगी साथ ही राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले उस समय स्कूल में किस तरह की शिक्षा दे रहे थे, उस समय के बच्चों को किस तरह का इतिहास पढ़ाया जाता था यह पता चलेगा यानी राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले ...

दामोदर घाटी परीयोजना के जन्मदाता डॉ.बाबासाहब आंबेडकर

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दामोदर घाटी परीयोजना के जन्मदाता डॉ.बाबासाहब आंबेडकर         दामोदर घाटी परीयोजना के जन्म की कल्पना डॉ.बाबासाहब की देन है। उन्होंने इसे लागू करने के लिए दिन-रात मेहनत की जाहां बिहार, उड़ीसा,बंगाल इन राज्यों को नया जीवन दिया यह डाँ.बाबासाहब आंबेडकर कि देन है। जॉर्ज डब्ल्यू नॉरिस ने 1922 से पहले अमेरिका में क्षेत्रीय जल परीयोजना की नींव रखी थी इसी कारण वहां के लोगों ने उनकी याद में एक बांध को उनका नाम दिया। लेकिन भारत के लोगों ने,सरकार ने दामोदर घाटी परीयोजना कि निव रखने वाले शिल्पकार डाँ.बाबासाहब आंबेडकर को यह सम्मान नहीं दिया। इस परीयोजना के लिए डाँ.बाबासाहब ने दिन रात एक कर तकलीफ सहकर इस विषय पर कार्य किया लेकिन आज ऊनकी याद और उनके कार्य को लोगों ने ही नहीं सरकार ने भी पर्ण रुपसे भुला दिया है।           डॉ.बाबासाहब चाहते थे कि दामोदर घाटी परीयोजना गरीबों के कल्याण के लिए एक स्थायी योजना बने।अमेरिका में टेनेसी नदी कई प्रांतों से होकर बहती है। एक समय उनके बाढ से लोग हताशा होकर रह गए थे जिसतरह अमेरीकन जनता ने उसका उपयोग मानवीय सेवा ...

निस्वार्थ मदत और उसका परिणाम

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🔥🔥🔥🔥     समाज में कुछ लोग पूरी तरह से स्वयं होकर निर्पेक्ष मदद करने की पहल करते हैं क्योंकि ऐसे लोगों को मदत, सहायता करने के कुशल कर्म के महत्व का एहसास हो गया होता है। व्यक्तिगत,संगठनात्मक या संघीय, कुछ लोग बहुसंख्यक लोगों को पूर्णरुपसे निर्पेक्ष सहायता कर उनके कार्य में हाथ बँटाना और सामाजिक सहायताका कार्य कर इस शृंखला को सक्रिय कर अधीकांश लोगों तक समाज मे आगे बढ़ाने की जरूरत है। समाज के विभिन्न घटकों ने हमे विभिन्न तरह से  हमारी मदद की है, जिसका परीणाम उनके फल कि मिठास आज चख रहे है अनुभव कर रहे है। मदत के कुशल कर्म और सहायता के कर्मों से अवगत होकर हमने जरूरत और आवश्यकता के समय जरुरतमंदो को सहायता करना याने समाज द्वारा हमें प्राप्त हुआ ऋण समाज को लौटाना होता है।       मदय और सहायता का स्वरूप यह समय, बुद्धि, धन, प्रयास, आत्मविश्वास, मार्गदर्शन जैसे विभिन्न रूपों में होता है जो सम्यक और विधायकतापुर्ण कुशल कर्म है। कुशल कर्म एक गतिमान क्रिया है जो उद्देश्यपूर्ण और सचेत रूप से की जाती है। कुशल कर्म हमारी स्थिति को निर्धारित करता है।  ...

अन्याय अत्याचार गरीब,बेबस पर क्यो होता है?

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        समाज मे अन्याय अत्याचार पर उच्च स्तरीय व्यक्ति ने आवाज उठाई या लिखा तो उसे लेखक कहलाते हैं और इसके विपरीत  पिढीत पिछडे व्यक्ती ने आवाज उठाई तो उसे जातीवादी काहा जाता है अन्याय अत्याचार के विरुद्ध समाज में समस्या रखकर उसपर उपाय निकालना जरूरी है । समाज मे अन्याय अत्याचार गरीब,बेबस,मजलूम पर होता है अक्सर देखा गया है कि बलि भेड बकरियों कि दी जाती हैं शोरों कि नहीं! आज के दौर में शेर बनना मतलब खुन खराबा करना या असंवैधानिक मार्ग का अवलम्बन करना न होकर, बुद्धिजीवी और आर्थिक संपन्न बनकर समाज में सशक्त परीणाम देनेवाले संघटनात्मक तरीके से व्यक्ति और सामाजिकहितों के लिए कार्य करनेवाला कार्यकर्ता,अनुयायी का निर्माण करना और होनेवाले अन्याय अत्याचार का संविधानिक तरीके से सामुदायिक तौर पर मुकाबला करना है।        संघ को मजबूती प्रदान करना यह संघटन के बुद्धिजीवी, विद्वान और समान्य प्रचारक, प्रसारक और अभ्यासको की जिम्मेदारी होती है। किसी भी संघ या संघटन मे उसके ध्येय और उद्देश्य को पुर्ण करने के लिए समाज मे सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ परीणाम...

भारत रत्न राजर्षि शाहु महाराज

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🙏🏻💐💐🙏🏻         भारत के इतिहास में गौतम बुद्ध ने राज्य त्याग करकर विश्व के कल्याण का विचार किया। चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने मानव कल्याण के किया कार्य किया ज्योतिबा फुले, शाहू जी महाराज ने भी इन्हीं महापुरुषों के कदमों पर चलकर समाज में समता, बंधुत्व,स्वतंत्रता का आंदोलन निरंतर चलाया।छत्रपति शाहूजी महाराज का समाज के लिए किया गया अद्भुत कार्य को देखकर कानपुर के कुर्मी समाज ने उनको राजर्षी यह उपाधि प्रदान की। उनके नाम से देशमे समाजीक न्याय दिवस मनाया जाता है। छत्रपति शाहूजी महाराज कि शिक्षा राजकोट के राजकुमार कॉलेज में हुई अपने उम्र के 20 वे साल मे वे कोल्हापुर संस्थान के राजा बने 1902 में इंग्लैंड के केंब्रिज विद्यापीठ ने उन्हें LLD यह पदवी दी। छत्रपति शाहूजी महाराज का समुचे समाज के प्रति समाजीक दृष्टिकोण का कारण यह है कि उनको शैक्षणिक और उदारीकरण का दृष्टिकोण विदेशी शैक्षणिक दृष्टिकोण के कारण हुई। उन्हें फितुझ राँल्ड नामके बुद्धिमान अंग्रेज शिक्षक को शिक्षा के लिए नियुक्त किया। वे राजकोट के राजकुमार काँलेज मे पढे उनको आगे पढाने के लिए फ्रेझर नामक शिक्षक ...

गुनाहगार जमात को मुख्य प्रवाह मे लानेवाले एकमात्र राजा

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      कोल्हापुर संस्थान मे छत्रपती शाहु महाराज के कार्यकाल में अपने संस्थान में फांसे पारदी यह गुन्हेगारी जमात थी जो खुद को महाराणा प्रताप के वंशज समझते थे इस जमाती को जानबूझकर कई सुविधाओं से बेदखल,वंचित कर रखा था। फांसे पारधी यह जमाती जो पिछड़ी  जमात जिनकी रोजीरोटी पक्षोंयो को फांसे मे पकडना शिकार करना उन्हे बेचना था यह लोग उस पर अपना गुजर बसर करते थे।       एक बार शाहू महाराज कटकोळा गाव आये वहाँ उन्हें फासे पारधी लोगों की अनेकों शिकायते मिली के गांव के फांसे पारधी जाती के लोग महाराज के छावनी पर डकैती डालते थे यह बात महाराज के सुनने में आई उन्हें सैनिकों द्वारा पकडकर कारागृह में रखा। उन्हें किसी बात की तकलीफ न देकर उनके खाने की व्यवस्था की शाहु महाराज का यह मानना था कि कोई भी लोग मुलत: गुनहगार प्रवृत्ति का नहीं होता। उनका गलत मार्ग पर चलने के अनेकों कारण हो सकते हैं जरूरी होता है उस बात को समझने की यही बात छत्रपति शाहू महाराज ने उन लोगों को उस जमात को समझा और उन्होंने इस बात को समझने की कोशिश की वह लोग चोरियां क्यों करते है। कोई भी व्यक्ति...

छत्रपती शाहू महाराज और आरक्षण

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छत्रपती_शाहू_महाराज_और_आरक्षण 🇸🇨🇬🇺☸️🇬🇺🇸🇨      शाहू महाराज ने अपने संस्थान में पिछडो वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया आरक्षण का विरोध करने के लिए सांगली के अँड.अभ्यंकर इन्होंने शाहू महाराज को आरक्षण के विरोध के बारे मे बातचीत की। उन्होंने महाराज की मुलाकात लेकर विरोध के बारे में बताया उसपर शाहू महाराज ने उन्हें अपने तबेले में ले जाकर सिद्ध करवाया के ताकतवर घोडे के साथ कमजोर घोड़ों को एकसाथ चने खानेके लिए छोडा जाए तो ताकतवर घोडे कुछ कमजोर घोड़ों को लातों से मारकर खाने से वंचित कर देंगे और भगा देंगे। उसी तरह से मजबूत समाज कमजोर समाज के वर्ग को सुविधा हक अधीकार से वंचित रखेंगे वे शिक्षा और सत्ता मे आगे आने नहीं देंगे। इसी लिए कमजोर घटकोंको विशेष सुविधाएं देनी जरूरी है।

बुद्ध विहार बनाने के तीन प्रमुख उद्देश्य

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🇪🇺🇸🇨☸️🇸🇨🇪🇺         18 मार्च 1956 को आगरा मे एक बुद्धविहार के उद्घाटन के मौके पर बोलते हुए डॉ बाबासाहब आंबेडकर जी ने लोगो को समझाया कि बुद्धविहार बनाने के पीछे तीन प्रमुख उद्देश्य हैं:- 1)हमारे समाज के अधिकतर लोग गाँवों मे रहते हैं ,किन्तु रोजगार , नौकरी, हायर एजूकेशन और इन्टरव्यू इत्यादि के लिए उन्हें शहरों मे आना पड़ता है । यहाँ उन्हें ठहरने का ठौर ठिकाना नहीं मिलता और वे फुटपाथ , रेलवे स्टेशन , पार्को , खुले मैदानों मे रहने को मजबूर होते है ।  2)दूसरे समाज के लोग जब शहर आते है तो उन्हें अपनी अपनी जाति के लिए बनाई धर्मशालाएं , होटल , गैस्ट हाउस इत्यादि आसानी और निशुल्क या कम से कम खर्चे मे मिल जाते है । इन बुद्धविहारों के बनने से हमारे लोग भी जब शहरों मे आयेंगे तो सम्मान के साथ ठहरेगें, ये बुद्धविहार उनकी हर तरह से सहायता करेंगे । 3)इन बुद्धविहारों मे एक अग्रेजी माध्यम से संचालित स्कूल खुले जिससे हमारे समाज की भावी पीढी के बच्चे भी दूसरे समाज के बच्चों के समकक्ष खड़े हो सके। इन बुद्ध विहारों मे दुकानें बनाकर अपने लोगों को रोजगार और व्यापार ...

उस्मानिया विश्वविद्याल हैदराबाद ने_ वल डाँ.बाबासाहब को सन्मानीत किया था।

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#उस्मानिया_विश्वविद्याल_हैदराबाद_ने_केवल_डाँ_बाबासाहब_को_सन्मानीत_किया_थ 🇸🇨🇸🇨☸️🇸🇨🇸🇨      डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर ने अनेकों विषयों पर ग्यान अर्जित किया और विदेश से डिग्रियां प्राप्त करने के बाद भारत मे ऐसी डिग्रियां प्राप्त करनेवाले एकमात्र व्यक्ति थे उस समय उनके कार्य और ग्यान के महत्व को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। देश के किसी भी व्यक्ति,संस्था या विश्वविद्यालयो ने उनके पढाई और ग्यान को महत्व नहीं दिया उन्हें द्वेषपूर्ण तरिके से जानबूझकर नजरअंदाज किया गया,अपवाद 12 जनवरी 1953 को उस्मानिया विश्वविद्याल हैदराबाद ने उन्हें Doctor of literature कि पद्ववी से नवाज कर उनको सन्मानीत किया। आज दुनिया मे डाँ. बाबासाहब के ग्यान और उनके आचरण से देश दुनिया में वे सन्मान के पात्र बने है।        डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्तियाँ विश्व के दस शिक्षण संस्थाओं में लगी है और 14 विश्वविद्यालयों को डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर नाम दिया गया है। विश्व के शिक्षण संस्थाओं में लगी मुर्तीयाँ 1)लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स, कोलंबिया यूनिवर्सिटी (न्यू यॉर्क), 2)यूनिवर्सिटी ऑफ़...

डाँ.बाबासाह आंबेडकर कि पढाई और pHD

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   डाँ.बाबासाह आंबेडकर कि पढाई और pHD    📘............✍️    डाँ. बाबासाहब आंबेडकर ने अपने उमर के 25 वे साल मे याने 1916 मे कोलंबिया विश्वविद्यालय मे National dividend of India and a analytical study इस विषय में pHD का संशोधन सादर किया आगे उन्हें कोलंबिया  विश्वविद्यालय ने उन्हें pHD प्रदान की। यह प्रबंध1925 मे लंदन के पी.एस. किंग अँन्ड कंपनी ने The evolution of provincial Finance in British India इस नाम से प्रसिद्ध किया।    साथ साथ 1916 मे डॉक्टर गोल्डनवेयर इनके आयोजन से मानववंश शास्त्र परिसंवाद, Cast in India,their mechanism, genesis and development. उन्होंने Administration and Finance of the East India Company इस विषय पर शोध प्रबंधलिखकर MA की डिग्री प्राप्त की।     सन 1921 मे Provincial  decentralizatio of Imperial Finance in British India इस निबंध के लिए MSC पद्ववी दी गई। 1923 मे उन्हें The problem of rupee इस प्रबंध के लिए(DSC) Doctor of science प्रदान की गई इस प्रबंध को किंग कंपनी ने प्रकाशित किया। यह ग्रंथ उन...

भारत कि पहली अभ्यास यात्रा का उद्देश्य

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🇸🇨🇸🇨☸️🇸🇨🇸🇨      सांस्कृतीक तथा धार्मिक स्थलोकी यात्रा किसी विशेष विषय को लेकर यात्रा की जाती है या किसी विशिष्ट विषय को लेकर अभ्यास गट यात्रा जरूर करते हमने देखा है।ऐसी कोई यात्राएं देखी गई है मगर अभ्यास करने के लिए ग्यान को पाने के लिए अभ्यास यात्रा का आयोजन भारत मे पहली बार किया जाना यह जक अद्भुत घटना है। डाँ. बाबासाहेब आंबेडकरजी का मुलमंत्र है ग्यान संपादन करना और नैतिकता का अनुसरण करना यह मात्र अभ्यास से ही प्राप्त किया जा सकता है ग्यान का महत्व समाज के रोम रोम में बसाने के लिए मा.डाँ.प्रशांत रोकडे सर IRS (Joint Commission Airport Delhi) इनकी संकल्पना से साकार होकर वह जनमानस में छानें का संकल्प "राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका" आंदोलन के माध्यम से अंमल मे लाकर वह जनमानस में आचरण करने के लिए चलने वाली निरंतर प्रक्रिया है।     समाजीक घटकोंमे मानव मुल्यों को जमीन स्तर पर अंमल मे लाने के लिए हमारे महापुरुष ज्योतिबा फुलेजी,छत्रपति शाहूजी महाराज , डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर इन्हें ने अपने जीवन को समाज के प्रति समर्पित किया परंतु आज भी समाज मे संव...