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Showing posts from September, 2020

Fake Mahatma

Fake Mahatma (Gandhi )support for varna system and opposed to cast system which is political and social pretend to misguided to the India. Fake Mahatma support natural law in natural system is their micro  cast and varna system in India? He said that Varna system is created by occupation but Indian fact is it's created by religious texts which is based upon cases system ,Religious text book Shudrakamlakar , Jativivek and  Samurai puran  support and how  cast created. Sir Rameshchandra Dutta's Hindustan prachin Itihas stated that Brahmin mother and Shudra father create Chandal cast and Brahmin father and Shudra mother create Nishad cast which is still in India.If fake Mahatma believe in varna and opposed cast this kind of thought law of  nature? Varna and cast system discrimination in society this kind of thought is still dangerous to the social development.

राजा धार्मिक हो तो ऊसकी प्रजाभी धार्मिक होती है

राजा धार्मिक हो तो ऊसकी प्रजाभी धार्मिक होती है 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨      राज्य में राजा और ऊसकी प्रजा धार्मिक होना मतलब अनाचार, दुराचार,हत्या,पाप,व्यभिचार करकर गंगा स्नान या चारों धाम तिर्थयात्रा कर पापों से मुक्ति होना मतलब धार्मिक होना नहीं होता। इसके विपरीत धार्मिक जिवन होता है जो सदाचार और नैतिकता से परीपूर्ण होता है। "जैसा राजा वैसी प्रजा" यह आमतौर पर समान्य कहावत है लेकिन जनतंत्र मे जिस तरह प्रजा होती है, जिस स्वभाव गुणों की होती हैं वह अपने जैसाही प्रतिनिधि भी चुनती है।  राजा जिस सिद्धांत को मानने वाला होता है वैसे उसकी प्रजाभी अनुकरण करती है।      राजा जब धार्मिक होता है तब उसके प्रधान तथा कर्मचारी धार्मिक रहते है तब बुद्धिजीवी और गृहस्थ यहभी धार्मिक होते है। जब बुद्धिजीवी और गृहस्थ धार्मिक होते है तब देशकी राज्यकि जनता भी धार्मिक होती है। जबतक राजा धर्मशील नाही होता तब तक उनके प्रधान और कर्मचारी धर्मशील हो नहीं सकते प्रधान और कर्मचारी अधार्मिक हो तो बुद्धिजीवी और गृहस्थभी अधार्मिक होते हैं।बुद्धिजीवी और गृहस्थ अधार्मिक रहे तो नगरवासी और ग्रामवास...

सिध्दार्थ गौतम द्वारा शांती समझौता मतलब आज कि मध्यस्थता (Mediation)

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सिध्दार्थ गौतम द्वारा शांती समझौता मतलब आज कि मध्यस्थता (Mediation)      विवाद मे समझौता,मध्यस्तता के माध्यम से होता रहा है जो पंचायत,बिरादरी,परिवार के मुखिया या बुजुर्गो के माध्यम से सदीयों से समस्या पर समझौता किया जाता रहा है दो हजार पांचसौ साल पूर्व सिध्दार्थ गौतम द्वारा विवाद पर समझौता के द्वारा समस्या सुलझाना यह मध्यस्थता का मुलाधार है।वर्तमान मे संविधानिक और कानूनी तौर पर न्याय व्यवस्था मे बडे प्रभावी रूप से मध्यस्थता (Mediation)सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया जा रहा है। मध्यस्थी याने (Mediation)जो न्यायव्यवस्था, न्यायदान मे इस विकल्प के माध्यम से(CPC) Civic Procedure Code धारा 89 के तहथ विवाद को व्यक्ति की इच्छा से कार्यपद्धति की प्रक्रिया का अवलंब कर आपस मे समझौता करने के लिये तटस्थ व्यक्ति के सहभाग से विवादीय पक्षकारों को एकजगह लाकर उनमे संमति के माध्यम से समझोता करने को मध्यस्थता काहा जाता है। मध्यस्थता (Mediation)मे जो तटस्थ व्यक्ती को Mediator कहा जाता है यह व्यक्ति प्रशिक्षत एवं तज्ञ व्यक्ती होते हैं जिनमें न्यायमूर्ती, न्यायाधीश, निवृत्त न्यायाधीश, ...