मानवाधिकार
हमारे कर्तव्यों के साथ साथ अधीकार और मानवाधिकार का जागरण चलाना जरुरी है!!! ••••••••••••••••• आज १० दिसंबर मानवाधिकार दिवस व्यक्ति के आधिकार भारतीय संविधान मे मोजूद है व्यक्ति अपने अधिकारों की बाते पुरजोर कोशिश करता है परंतु अपने कर्तव्य के प्रति भी उतना ही जागृत होन जरुरी है. मानवाधिकार जो व्यक्ति के मुलभुत अधीकार से समंदीत है उसे जानकारी के साथ अप्रत्यक्ष रुपसे खत्म कर दिये जाते है ता की गुलामो दलालो की तादाद बनी रहे! देश स्वतंत्र हुआ लेकीन,यहा का माहौल लडकियों महिलाओ, अनुसूचित जाती जनजाती, पीछडे, महीलाए आज तक स्वतंत्रता को महसूस कर पा रहा है? स्वतंत्र समता बंधूता का सही हस्तांतरण सत्ताधारी और पुजीपती द्वारा संचालित होनेसे बहुंख्य अपने अधिकारोको कुंठित हुआ महसूस करते है. संविधान स्वतंत्र,समता मानवाधिकारकी बात करता है तो आज वर्तमान परीस्थीती मे सरकारी सेवाओं का सार्थ उपयोग होना अपेक्षित है पर सरकार नियंत्रित जो छुपा अत्यचार है और यह अत्याचार करने वाले वे कौन है? क्या अत्याचार कर कोई चैनसे कैसे सो सकता है? यह समस्या से निजात दिलानेका एकमात्र ऊपाय केवल मात्र डॉ.बाबासह...