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Showing posts from August, 2020

त्याग समर्पण व बलिदान हेच नेतृत्व निर्माण करतात.

त्याग समर्पण व बलिदान हेच नेतृत्व निर्माण करतात.      सामाजिक कार्याचे नेतृत्व करत असतांनी कार्यकर्ता,अनुयायी व संघटनेत सुक्ष मतभेद निर्माण होत असतात ते वेळेत दुर सारल्या गेले नाही तर मतभेदाचे पर्यावसान मनभेदात होत ज्यामुळे आपसात गट तट व दरी निर्माण होऊन आंदोलनाची अपरीमीत हाणी होत असते. मतभेद,मनभेद व गैरसमज दूर सारणे करीता सामाजिक उत्थाना; चळवळ व आंदोलना करीता सकारात्मक संवाद साधने गरजेचे असते प्रसंगी दोन पवल मागे येणे गरजेचे असते दोन पावले मागे येणे म्हणजे अपमान होने,लहानपण घेणे असा होत नसुन ते वैचारीक प्रगल्भतेचे सकारात्मक लक्षण असते.ज्याचा फायदा व्यक्तीला नव्हे तर आंदोलनाला होत असतो.         "विहार तिथे अभ्यासिका" आंदोलनाचे अनुशंगाने वस्ती, गाव,शहरातील विहारात काही वैयक्तिक,राजकीय,समाजीक, नेतृत्व निर्माण करणाऱे संघर्ष या कारणांमुळे समाजात संघर्ष,मतभेद,गैरसमज निर्माण होत असतात आणि अशा समस्या सोडवण्यासाठी व समाजात समन्वय निर्माण होण्यासाठी राष्ट्रपिता ज्यातिबा फुले अभ्यासिकेचे कोआर्डीनेटर यांच्यात समन्वयकाची भूमिका पार पाडतांना बहुतांश ठिकाणी सकारात्म...

दुष्ट न्यायी सज्जनऔर सर्वोत्तम पुरुष के बारे में तथागत बुद्ध और मनोवैज्ञानिक एरीक एरीसन्स के विचार

दुष्ट न्यायी सज्जनऔर सर्वोत्तम पुरुष के बारे में तथागत बुद्ध और मनोवैज्ञानिक एरीक एरीसन्स के विचार 🌻🌻🦋🌻🌻        समाजिक तथा व्यक्तीगत जिवन में विविध प्रवृत्ती के व्यक्तीत्व दिखाई देते हैं जो व्यक्तीगत गुण वैशिष्ट्य द्वारा समाज में अक्सर दिखाई देते हैं जो योग्य अयोग्य,स्वार्थी निस्वार्थी,दुष्ट न्यायी,सज्जन और सर्वोत्तम पुरुष को पहचानने वाले लक्षन दिखाई देते हैं। तथागत बुद्ध ने पहली बार इन्सान के मन में उत्पन्न होने वाले विकार तथा मन पर कार्यरत करने के उपरान्त दोनों परिस्थिति में व्यक्ती विशेष के गुण दोष दिखाई देते हैं इसी मानसिक गुणों की बात विश्व के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक एरीक एरीसन्स बुद्ध की बुनियादी शिक्षा अपने सिद्धांत में वर्णित करते हैं।    मनोवैज्ञानिक एरीक एरीसन्स ने संघटन तथा व्यक्तिनिष्ठा पर जागतिक सर्वेक्षण से अपना मत प्रर्दशित किया है। समाज का नेतृत्व करने के लिए सदाचरण,स्वार्थत्याग और समाजनिष्ठा इनकी विद्वत्तासे अधिक जरुरत होती है क्योंकि समाज में कोई भी सत्कार्या से प्रवृत्त होणा यह शुद्ध मन का गुणधर्म होता है इस सर्वेक्षण से ऐसा दिखाई दिया...

NPS/DCPS पुरानी पेंशन कानून बने!

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कर्मचारी चुनेंगे वहीं सरकार, जो कर्मचारियों को करेगें पुरानी पेंशन बहाल..!!!      यह बात ४ अगस्त २०१८ को सोशल मीडिया facebook के माध्यम से आप सभी के आगे रखी थी आज अगर कुछ राज्यों की सरकारे NPS पुरानी पेंशन देने का फौसला ले सकती है तो केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार को भी (NPS/DCPS) आंदोलन का परिणाम दिखाकर व्यवस्था में परिवर्तन करने का संकल्प कर, चाहे परीनाम जो भी हो "जो पुरानी पेंशन लागानेकी बात करेगा वह देशपे राज करेगा", सरकार बनाने मे देश के कर्मचारीयों की भूमीका दिखाना बहुत जरूरी है।         भारत का संविधान और कानूनी व्यवस्था नैसर्गिक न्याय इस महत्वपूर्ण तत्वाधान को मानता है जहाँ कर्मचारी उम्र के ५८ वर्षो तक सेवा देने के बाद बुडापे की लाठी मानें पेंशन होती है। राज्य सभा में कहा गया, कि सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेन्शन देना सम्भव नहीं हैं क्योंकि इससे सरकार पर वित्तीय बोझ बहुत बढ़ जायेगा. कर्मचारियों की इस समस्या को समाज का कुछ घटक गंभीरता से ले रहा है जिसमे कुछ मंत्री महोदय यह प्रश्न संसद,विधानसभा मे रख रहे है कुछ माननीय मंत्री महोदय, अग...

दृढ़संकल्प विस्तृत है।

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दृढ़संकल्प विस्तृत है।       समाज में बहुसंख्यक लोग सुनी-सुनाई बातों पर आंखें मूंदकर  विश्वास करने वाले ज्यादातर लोग मौजूद है। इसके विपरीत खुली आंखों से उस विषय की वास्तविक जानकारी तथा कारण की वजह जानने वाले थोड़े लोगों होते हैं। ऐसे बहुसंख्य लोग आपना अलग विश्र्व का निर्माण करते हैं जो एक पुश्तों से रुढ़ी परंपरा एवं संस्कारों की बैसाखी लेकर बड़े होते-होते बुढ़ापे में जाकर मर जाते हैं।   ऐसे लोगों को अपने जीवन में काल्पनिक, मरीचिका एवं आभासी  माणसीकता की आदत पड़ने से उन्हें काल्पनिक व मित्था बातों ज्यादा समर्पक और अच्छी लगती हैं। विषय और उसकी कारणों की वजह जानने की जरूरत महसूस नहीं होती। रेगिस्तान के मरीचिका को पानी समझना,पाणी भरे काचके ग्लास में डाली गई लकड़ी का तिरछा दिखाई देना परंतु सत्य मात्र कुछ और होता है ऐसे लोगों का आभासी जग इस तरह का विश्व  होता है और अन्य लोगों भी अपने इस राह पर चले ऐसा उन्हें अपेक्षित होता है।      वर्तमान में इस तरह के बहुसंख्य लोग दिखाई देते हैं जो समाज को नकारात्मक पथ से मार्ग क्रमन क...

मनोग्रह विस्तीर्ण आहे.

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मनोग्रह विस्तीर्ण आहे. ‼️🎼🎼🎼‼️ सामाजात ऐकीव गोष्टींवर आंधळे पणाने प्रेम करणारे बहुसंख्य आहेत या विपरीत डोळसपणे व विषयाची कारणमीमांसा करणारे बोटावर मोजता येईल इतके आहे असे बहुसंख्य लोक आपलं वेगळं विश्र्व निर्माण करत असतात हे पिढीजात व रुढी व संस्काराच्या कुबड्या घेऊन मोठेच नव्हे तर म्हतारे होऊन गतप्राण देखील होतं असतात. अशा लोकांना आपल्या जीवनात आभासी,काल्पनिक व मृगजळीय माणसीकतेची सवय जडल्याने त्यांना काल्पनिक व मित्था गोष्टी जास्त समर्पक व चांगल्या वाटत असतात विषय आणि त्याची कारणमीमांसा करणे गरजेचे वाटत नसते वाळवंटातील मृगजळाला पाणी समजणे, पाणी भरलेल्या काचेच्या पेल्यात टाकलेली काळी वाळकी दिसणे परंतु सत्य मात्र वेगळंच असते अशा लोकांचं आभासी जग हेच विश्व असते आणि इतरांनीही याच चाकोरीबद्ध वाटेवर जावं असं त्यांना अपेक्षित असते.      वर्तमानात अशा वर्तनाची लोक बहुसंख्य अनुभवायास येतात जी समाजाला नकारात्मक वाटेवरुन नेत असतात यांना खरं,खोटं,बर वाईट हे महत्त्वपूर्ण नसते तर विशीष्ट व्यक्ती व समुदाय महत्त्वाचा असतो जनकल्याण हे नाममात्र असते म्हणजेच व्यक्ती व समुदाया...