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Showing posts from 2021

6 दिसंबर माहापरीनिर्वाण दिवस समर्पण दिवस! 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨🕯🕯🕯🕯26अलीपुर रोड दिल्ली🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨 *अखिल मानव के जीवन का सबसे दु:खद दिवस;समाज व्यवस्था मे परीवर्तन और इंसानियत प्रस्तापित करने हेतु सबसे बड़ा दान,त्याग और बलिदान का दिवस.* *आजके दिन शुभ्र वस्ञ परिधान कर सामूहिक वंदना कर यह दु:ख दिवस शांततापूर्ण व गंभीरता पूर्वक, आजके दिन आदराजली अर्पन करते है.* *हम आदरांजली अर्पण करते है याने सही मायनेमे क्या करते है? दो मिनट मौन के साथ, ऑख मुदकर, सावधान रहकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते है, श्रद्धांजलि अर्पित जरूर करते है वास्तव मे दो मानीटे मे क्या करना होता है? दो मिनट मे बाबासाहब के कार्य को स्मरण कर उनके स्वप्न को पूर्ण करने का दृढ निश्चय कर प्रतीग्याबद्ध होना यही सही मायने में आदराजली होती है।* *डॉ.बाबासाहब द्वारा किये गये कार्य के प्रती कृतज्ञ होकर उनके पावन स्मृति को स्मरण, उनके स्वप्न को साकार एवं पूर्ण करने का संकल्प तथा दृढ निश्चय करना मतलब समाज मे जाकर जमीनी स्तर पर कार्यकर परिणाम को हासिल करेने के प्रति प्रतीग्याबद्ध होना मतलब प्रत्येक व्यक्ति ने स्वयं स्पूर्ती से अपने कर्तव्यों के प्रती वचनबद्ध होने की प्रतीज्ञा लेना यही हमारी सही मायनेमे आदराजली होती है.* *हम भावनाओं मे बहकर पुरजोर होकर केवल जय-जयकार करते है पेट भरने के लिये खाना परोसते है परंतु इससे भी ज्यादा उनके साहित्य का अध्ययन और अध्यापन कर समाज को जगाकर उसपर अंमल करने का संकल्प करना माने सही आदराजली है।* *हमारा_चिंतन*☸ *आंदोलन की समीक्षा! हमने क्या किया और उसका क्या परिणाम मिला?* परिणाम के लिये हमारी जिम्मेदारी?🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨*डॉ.बाबासाहब ने कहा था: "गाँव देहातों में रहने वाले मेरे लोगों के लिए कुछ खास नहीं कर पाया"!* *विगत कई वर्षे से विद्वान तथा सुशीक्षीत व्यक्ति शहरो के शिक्षीत व्यक्तियों को सामाजिक परीवर्तण हेतु जगा रहा है, अब साथ साथ हमारा संकल्प हो के, हम गाँव देहातों में रहने वाले पिछडो, वंचीत घटको, विद्यार्थियों के उत्थान हेतु तथा जित के उन्मूलन हेतू कार्य करे!* *आज का दिवस अखिल मानव जीवन का सबसे द:खद दिवस जो त्याग समर्पण और बलिदान का दिवस डाँ.बाबासाहब के कार्य को आगे ले जाने और असमानता वादी समाज व्यवस्था मे पिछडो, वंचीत घटको, विद्यार्थियों के उत्थान और समाज मे स्वतंत्र, समता और बंधुता प्रस्तापित करने हेतु सम्यक संकल्प का प्रामाणिक प्रयास करना माने सही आदराजली होगी!!!*Tribute To The Father Of Modern India..!🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨 🙏🙏🙏🙏

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6 दिसंबर माहापरीनिर्वाण दिवस समर्पण दिवस! 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨 🕯🕯🕯🕯 26अलीपुर रोड दिल्ली 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨      * अखिल मानव के जीवन का सबसे दु:खद दिवस;समाज व्यवस्था मे परीवर्तन और इंसानियत प्रस्तापित करने हेतु सबसे बड़ा दान,त्याग और बलिदान का दिवस. *         * आजके दिन शुभ्र वस्ञ परिधान कर सामूहिक वंदना कर यह दु:ख दिवस शांततापूर्ण व गंभीरता पूर्वक, आजके दिन आदराजली अर्पन करते है. *        * हम आदरांजली अर्पण करते है याने सही मायनेमे क्या करते है? दो मिनट मौन के साथ, ऑख मुदकर, सावधान रहकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते है, श्रद्धांजलि अर्पित जरूर करते है वास्तव मे दो मानीटे मे क्या करना होता है? दो मिनट मे बाबासाहब के कार्य को स्मरण कर उनके स्वप्न को पूर्ण करने का दृढ निश्चय कर प्रतीग्याबद्ध होना यही सही मायने में आदराजली होती है। *        * डॉ.बाबासाहब द्वारा किये गये कार्य के प्रती कृतज्ञ होकर उनके पावन स्मृति को स्मरण, उनके स्वप्न को साकार एवं पूर्ण क...

जुनी पेंशन संघर्ष

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न्यायालयीन NPS पेंशन फायटर यांचा संघर्ष आज कालचा नसून मागील दहा वर्षाचा आहे. 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳       *न्यायालयीन जागृत कर्मचारी मागील दहा वर्षांपासून संवैधानिक पद्धतीने जुनी पेंशनचा लढा लढण्याचा प्रयत्न करत न्यायीक कर्मचाऱ्यांत जागृतिची मशाल तेवत ठेवणे करीता जन आंदोलन व संवैधानिक मार्गाने मागील दहा वर्षां पासून जमेल त्या पद्धतीने प्रयत्नशील आहेत ज्यचा परिणाम सकारात्मक दिसत आहे.*        *जुनी पेंशन सर्वांना मिळावी या करीता आपण सर्व न्यायालयीन कर्मचा-यांनी जागृति गतिमान होत असतांना DCPS/NPS महसूल, मध्यवर्ती व शिक्षक कर्मचारी मरण पावले त्यांचे कुटूंबाला आर्थिक आधार नव्हता अशा वेळी विविध पेंशन हक्क संघटनेने आर्थिक आधार दिला.* *काही मृत कर्मचाऱ्यांच्या परिवारास मुलभूत गरजा पुर्ण न होणारी अल्पशी पेंशन मिळाली जी परिस्थिती विदारक होती याच दरम्यान औरंगाबाद खंडपीठात महसूल व इतर संघटनेच्या याचीका सुद्धा खारीज झाल्या होत्या या काळात कर्मचा-यांना आशेचा किरण निर्माण होणे गरजेचे होते आणि कर्मचारी जागृती करीता महाराष्ट्र पेंशन हक्क संघटना ज्यात...

यौन शोषण अभिभावक और सामाजिक जिम्मेदारी!🌷🌷🌼🌷🌷#आपके_लड़के_लड़कियों_और_बच्चों_कि_सुरक्षा के लिए!🔥🔥🔥🔥*संकलन:-**सुरेन्द्र मेश्राम**अमरावती*🔥🔥🔥🔥🔥 वीडियो देखें और समझें:- https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2412514719008617&id=1552199775040120&ref=dbl&_ft_=mf_story_key.🌹🌹🌹🌹 https://m.youtube.com/watch?v=AUtVoPxEHTI *जब मासूम बच्चों के नियमित प्राकृतिक व्यवहार में अचानक कोई बदलाव आजाता है तो समझ आता है कि बच्चा कुछ छुपा रहा है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, अगर इस बातका पता चल जाए, तो यह यौन दुराचार और अत्याचार हैं इस विषय और समस्या को माता-पिता ने गंभीरता से अवगत होने की आवश्यकता है। नाबालिगों के यौन शोषण पर जानकारी देकर जागृति नीर्मान करना एक नागरिक के रूप में हमारी जिम्मेदारी है। हम अधिक सतर्क रहें और समुदाय में बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ निवारक उपायों के बारे में जागरूकता पैदा करें।* *बाल शोषण क्या है?* *ढके हुआ बच्चे के शरीर का व्यक्तिगत अंग जिसे किसी अन्य व्यक्ति द्वारा गलत तरीके से और अमानवीय कृत्य से छुआ जाना मतलब बाल शोषण है।* *समाज परिवार मे कोई भी संपर्क, स्पर्श, या कोई क्रिया या व्यवहार जो बच्चे के शरीर को चोट पहुँचा सकता है या नुकसान पहुँचा सकता है; जिससे बच्चों में शर्म का एहसास,अपमान महसूस होगा और सभी प्रकार की मर्यादा को तोड़ दिया जाएगा यह शोषण होता हैं।लड़कियों और लड़कों का यौन शोषण जो मानसिक रूप मे होता हैं जिसमें बच्चे मंद बुद्धि,कम ज्यादा उम्र के,किसी भी नस्ल के, किसी भी लिंग के, ग्रामीण और शहर के,गरीब अमीर या सामाजिक-आर्थिक मानदंड किसी भी स्तर के बच्चे यौन शोषण के शिकार हो सकते हैं।समाज में 4 लड़कियों में से 1% तथा 7 में से 1 लड़का शोषण दर के 50% में शोषण के बारे में आँकड़े देता है। यह प्रतीशत माता-पिता को चिंतित करने के लिए पर्याप्त है।* *असुरक्षित क्षेत्र* *इस क्षेत्र में वह स्थान होता हैं जहाँ से कोई व्यक्ति बच्चों को धोखा दे सकता है जीसे असुरक्षित क्षेत्र कहलाता है। बच्चों के शोषण के लिए जिम्मेदार व्यक्ति 90% परिचित होते है। इसमें हमारेही रिश्तेदार, परिचित और उनके पहचान एवं भरोसे का फायदा उठाकर अश्लील हरकतें करने वाले लोगों होते हैं।* *सुरक्षित क्षेत्र: -* *सुरक्षित क्षेत्र वह स्थान होता है जहां बच्चे इस क्षेत्र में सुरक्षित महसूस करते हैं। इसमें मां, दादी, बहन, दादा, पिता शामिल हैं।* *सर्वेक्षण का भयावह सच:-* *5 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों को शोषण और दुर्व्यवहार का सबसे अधिक खतरा होता है। इनमें शारीरिक, यौन और मानसिक शोषण शामिल होता हैं। यदि यौन शोषण और यौन अपराधों की पुनरावृत्ति जारी रहती है, तो इसका पीड़ित के मानस पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है। 50% से अधिक यौन अपराध विश्वास आधारित, अंतर्मुखी घर में किए जाते हैं। और 90% अपराध परिचितों द्वारा किए जाते हैं। जबकि 21% बच्चे गंभीर यौन शोषण की रिपोर्ट करते हैं, 50% बच्चे यौन शोषण के अन्य रूपों का अनुभव करने की रिपोर्ट करते हैं, जिसका अर्थ है कि उनके बच्चे घर पर, या यहां तक ​​कि विश्वसनीय परिचितों के साथ भी सुरक्षित नहीं होते हैं, और अधिकांश बच्चे इस प्रकार के दुर्व्यवहार की रिपोर्ट किसी को नहीं करते हैं।* *सामाजिक जागरूकता: -* *जो व्यक्ति किसी बच्चे का यौन शोषण करता है, वह बहुत ही भरोसेमंद और करीबी होता है क्योंकि पारिवारिक संबंध टूटने का डर होता है या इस डर से कि कोई उस पर विश्वास नहीं करेगा इस लिये वे अपनी बात सार्वजनिक तौर पर कहते नहीं है। अगर जो बच्चा यह बात समाज में कहता है उसके साथ अलग नजरियेसे व्यवहार करने का प्रयास समाज के कुछ संकुचित लोग करते हैं जीस कारण वह पिढी सामाजिक रूप से दुखी होती हैं।* *अभिभावक शिक्षकों के लिए जागरूकता और समाधान।* *1) ऐसे में बच्चों को "NO" चिल्लाना सिखाएं।* *2) सुरक्षित स्पर्श, भ्रमित स्पर्श और असुरक्षित स्पर्श "अच्छा" और "बुरा" स्पर्श के बीच अंतर स्पष्ट करें।* *3) लड़के-लड़कियों को समझना चाहिए कि किसी को भी आपके गुप्तांगों को छूने या चोट पहुंचाने का अधिकार नहीं है।* *4) अजनबियों से खाना, पीना, खेल, उपहार आदि न लें।* *5) बच्चों को बताएं कि चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 का ​​उपयोग कैसे करें।* *6) पुलिस या बाल संरक्षण एजेंसियों को रिपोर्ट करें। पुलिस की सहायता कैसे प्राप्त करें इस बारेमे बताएं।* *बाल शोषण समस्या के समाधान के लिए माता-पिता को शुरू से ही अपने बच्चों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने चाहिए। किसी भी विषय पर आपसे बात करते समय उन्हें उदास नहीं होना चाहिए। अपने बच्चों के व्यवहार को अनजाने में देखना,के कहीं उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन तो नहीं आरहा हैं* *सार्वजनिक हित मे जारी!*

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राष्ट्रीय विधि सेवा दिवस

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National Legal Service Day  कानूनी जागरूकता सप्ताह  (नवंबर 9 से 16 नवंबर)   जनहीत मे जारी         भारत के संविधान का अनुच्छेद 39-ए समाज के सभी वर्गों को न्याय प्रदान करता है और समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करता है ताकि समाज के हर वर्ग को आर्थिक रूप से न्याय पाने में कोई कठिनाई न हो यह मायने रखता है।  संविधान के अनुच्छेद 14 और 22(1) के तहत सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है।  समाज के कमजोर वर्गों को समानता के आधार पर सक्षम कानूनी सेवाएं प्रदान करने के लिए कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) की स्थापना की गई है।  न्यायालयों का आयोजन किया जाएगा।    (नालसा) नई दिल्ली में है;  राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने और लोगों को मुफ्त कानूनी सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ राज्यों में लोक अदालत लोगों की अदालतों का संचालन करने के लिए प्रत्येक राज्य में कानूनी सेवा प्राधिकरण की स्थाप...

राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका व शासकीय धोरण

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राष्ट्रपिता_ज्योतिबा_फुले_अभ्यासिका_व_शासकीय धोरण 🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨        राज्य शासनाने सामाजिक न्याय व विशेष सहाय्य विभाग यांचे शासन निर्णय संकीर्ण 2021/प्र.क्र 79/ अजाक दि.6/10/2021 नुसार अनुसूचित जाती आणि नव बौद्ध वस्तीचा विकास योजनेच्या सोबतच ग्रामीण भागातील विद्यार्थ्यांना अभ्यासिका, वाचनालय सेवा उपलब्ध व्हावी या करीता "संविधान सभागृह" शासकीय नवी योजना तयार करण्यात आली आहे. तसेच समाज घटकाांपयंत डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांचे विचार पोहोचवण्या करीता अभ्यासिका सुरु करणे, राज्य व केंद्र शासनाच्या विविध योजनांची माहिती ग्रामीण भागापर्यंत पोहिचवणे यासाठी राज्यात ग्रंथालय व अभ्यासिका यासारख्या अद्ययावत सुविधांसह “संविधान सभागृह” सुरु करण्यास शासकीय मांजूरी प्रदान करण्यात आली आहे. सन 2012 पुर्वी अभ्यासिका या शब्दा ऐवजी वाचनालय,लायब्ररी असा शब्दप्रयोग केला जात असे 2012 नंतर डॉ.प्रशांत रोकडे सर यांनी अभ्यासिका असा शब्दप्रयोग केला आज ठिक ठिकाणी समाज अभ्यासिका असा शब्दप्रयोग करत आहे. पुर्व नालंदा विद्यापीठात तिन अभ्यासिका होत्या रत्नोदय,रतनोदधी आणि रत्नरंजक जेथे ...

Dr.Babasaheb Ambedkar

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परमाणु शक्ति से बाढ़ नियंत्रण डाँ.बाबासाहब आंबेडकर 🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨        हाल ही में हमने भारत में बाढ़ और बाढ़ नियंत्रण के तरीकों के बारे में बहुत कुछ सुना और पढ़ा है।  वायसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य के रूप में, मैं सिंचाई का प्रभारी हुआ करता था। इसके बाद सिंचाई और नेविगेशन आयोग नामक एक विभाग की स्थापना की, जिसका नाम बदलकर नदी नियंत्रण बोर्ड (River Control Board) केंद्रीय जल शक्ति आयोग (Central Water Power Commission) रखा गया है।      इन संगठनों ने बाढ़ नियंत्रण का प्रस्ताव रखे हैं जो समय-समय पर प्रेस में आते रहता हैं। यह उम्मीद की जा रही थी कि इन संगठनों द्वारा कुछ निश्चित उपाय खोजा जाएगा।  लेकिन अब हम पाते हैं कि जो भी प्रस्ताव उनके कार्यान्वयन में आए, वे बाढ़ को नियंत्रित करने में पूरी तरह से विफल रहे हैं। शिलांग से यह भी रिपोर्ट बतायी गयी है कि इंजीनियरों के लिए भी यह कहना मुश्किल है लगभग असंभव है कि कौनसी पहल ब्रह्मपुत्र बाढ़ को सफलतापूर्वक नियंत्रित कर सकती हैं, और यह एक प्रायोगिक (experimental) बांध का निर्माण  14,00,000 ...

BLUE PRINT Buddhist Movement In India

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BUDDHIST MOVEMENT IN INDIA           A BLUE PRINT     For Mission Activities 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨 By:- _sUREn_MeshraM_      AMRAVATI 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨 Buddha need no passport nor visa.        The International Buddhist Conference was held on 4th December 1954 at Rangoon (Burma). Dr. B. R. Ambedkar attended the Conference. He delivered the speech in the Conference. He had prepared an enlarged version of his talk in the form of Memorandum in two parts :  *Part I* 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨 of the memorandum Contains programme of propagation of Buddhism in India. Out of the points which Dr. Ambedkar has raised in the memorandum I, he himself fulfilled two important points :  (1) by publishing the Buddhist Gospel under the title "BUDDHA AND HIS DHAMMA" and (2) introducing a cermony for conversion to Buddhism. *Part II* 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨  consists of the conditions of Indian Buddhist in South-India.--Edotors. Following ...

NEED FOR SOCIAL CENTRE

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#_The_Need_for_a_Social_Centre  🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨     It is my desire that the noble work to which Mr. Kher made reference should be put on a lasting foundation and I am sure that, that must be the view of all those interested in the cause of the Untouchables. There can be no two opinions that if movement is to succeed, it must have at its command three things,  (1) a Central headquarter, (2) a well-trained body of devoted workers, (3) financial stability.  Only with these means the movement can be placed on a sound and permanent footing.     Of these three, the establishment of a Social Centre as Central Headquarter must be regarded as the most fundamental. For once a Social Centre is established it will help to co-ordinate all social activities necessary for keeping up the movement, under the scheme which I have framed. It will also provide income to meet the expenditure for running the social activities and maintain a body of devoted workers on ful...

FUNDAMENTAL PRINCIPAL OF RELIGION

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# FUNDAMENTAL_PRINCIPLE_OF_RELIGION 🇸🇨🇸🇨☸️🇸🇨🇸🇨 I mention,      1)That society must have     either the sanction of law or the sanction of morality to hold it together.Without either society is sure to go to piece. In all societies law plays a very small part. it is intended to keep the morality with the range of social discipline. The majority is left and has to be left to sustain it social life by the postulates and sanction of morality. Religion in the sense of morality, must therefore the remained the governing principle in every society. 2) That religion as defined in the first proposition must be in accord whith science. Religion is bound to lost its respect and therefore become the subject of redicule and thereby not merely lose it forces as a governing principle of life but might in course of time disintegrate and lapse if it is not in accord with science. In other words, region if it is to function, must be in accord with reason ...

युद्ध, झगडे का विकल्प मध्यस्थता

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सिध्दार्थ गौतम द्वारा शांती समझौता मतलब आज कि मध्यस्थता (Mediation) 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨        भगवान बुद्ध कहते है, "जिस प्रकार अपने जीवन का खतरा उठाते हुए मां अपने शिशु की देख भाल करती है,उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ती को सभी प्राणियों के प्रति प्रेम प्रदान करने का मन बनाना चाहिये। उसे संपूर्ण विश्व के प्रति सद्भावना रखनी चाहिए, उपर नीचे और उस पार, सभी के लिये उसके मन मे घृणाहीन और शत्रृतारहीत बंधु प्रेम होना चाहिये।एसी जीवन पद्धति विश्व मे सर्वोत्तम है।" दुनिया में जो आक्रमण कर विनाशकारी हिंसात्मक परिणाम मिलते हैं इस समस्या का समाधान "युद्ध में न होकर बुद्ध मे है" यह सिद्धांत हर कोई जानता है समझता है पर अंमल करने मे नकारात्मकता होती है। राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय व्यवहार कुशलता और स्वार्थ के कारण अन्य लोग हस्तक्षेप करने से कतराते हैं।धर्म के सिद्धांत को देखा जाय तो एक धर्म पर आक्रमण करने पर उसी धर्म अनुयायियों ने मदन करना अपेक्षाकृत होता है परंतु विनाशकारी परिस्थितियों मे उसी धर्मों के लोग मदत के लिए कतराते हैं क्योंकि उनकी अपनी समस्याये होती है जो आर्थिक, ...

दृढ़ संकल्प निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने वाले कार्यकर्ता जरूरी है!

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दृढ़ संकल्प निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने वाले कार्यकर्ता जरूरी है! 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨     हमारे समाज में,बीस साल में एकाग्रता के साथ काम करने वाला एक भी व्यक्ति दिखाई नहीं देता है. कौन्सिल या म्युनिसीपालीटीकी एका जगह के लिए 100 अर्जी तयार होते है परन्तु एकही कार्य एक मार्गसे, एक ध्येय एक लक्ष के साथ करनेवाला एकभी मनुष्य अबतक मेरे सामने दिखाई नही देता है.    शिक्षा,सामाजिक और आर्थिक कठिनाइया यह महत्वपूर्ण प्रश्न हैं इसके लिए काम करने वाले लोगों की बेहद आवश्यकता है.       कार्य करने के लिए प्रसिद्धीकी अपेक्षा किए बगैर काम करनेवाले लोगों चाहिए हर एक व्यक्ति प्रसिद्ध के पिछे है इसी कारण जो कार्य होना चाहते वह हो नही पाता है. कामचलाऊ कार्य करने से महत्वपूर्ण प्रश्न जगहपर रह जाते है इसलिए दिनरात कार्यरत,संघर्षरत रहना चाहिए.         ब्राह्मण समुदाय ने हमारे समुदाय के साथ अन्याय किया यह सच है कि उन्होंने हमें सताया है लेकिन उनकी कार्य पद्धति इतनी अच्छी है कि वे अपने द्वारा अर्जित शक्ति को बरकरार रख सकते हैं किसीभी तरह का हो...

#सम्राट_असोक_ने_पशु_पक्षियों_के_लिये_अस्पताल_बनवाये_थे

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🦅🙈🙉🙊🦅 https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2841279446132140&id=1552199775040120* चक्रवर्ती सम्राट असोक ने पशु पक्षियों के लिये अस्पताल बनवाये थे अगर पशु पक्षियों के चिकित्सा और उनके प्रति दया और करुणा का भाव रखता हो इतनी दरदृष्टीता की बात जो सोच सकता हो ऐसे महान असोक राजा के राज्य मे अपनी प्रजाजनो के प्रति किस तरह का भाव रहा होगा?* *जावा,सुमात्रा, अफगानिस्तान,काबुल और कंधार तक सामराज्य तथा अवाम को संभालना, क्या दुरदृष्टीता का नियोजन रहा होगा! सम्राट असोक से कलींग युद्ध के दरमियान राजपाट के लिये युद्ध किया और उसका प्रायश्चित ऐसा किया के इंसान तो क्या पशु पक्षियों का भी खयाल रखा गया.*   *राजपाट,सत्ता कुर्सी के चक्कर मे लाशों पे महल बनानेवाले राजा संसार ने देखे है कामना,लोभ,मोह कितनी कितनी माया कितना सत्ता का गुरूर इससे जब राजा अहंकारी होता है तब राज्य राजपाट के साथ साथ भोली जनता को उसका कष्ट सहना पडता है परिणामस्वरूप राज्य में हालबेहाल और अराजकता होने लगती है. राजा अपनी पहली गलती का ऐहसास कर प्रायश्चित करना मतलब धार्मिकता और करुणा का भाव विकसित करना होता है अगर र...

बौद्ध धम्म के प्रचारक,प्रसारक तथा अभ्यासक अनागरिक धम्मपाल*🇸🇨🇸🇨☸🇸🇨🇸🇨 *भारत में बौद्ध धर्म को पुनर्जीवन करने वाले अनागरिक धम्मपाल ने अपने जीवन के 40 वर्षों में भारत, श्रीलंका और विश्व के कई देशों में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ साथ बौद्ध विहारों का निर्माण कराया. सारनाथ का प्रसिद्ध महाविहार आपने ही बनवाया था इसके साथ साथ कई स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण कराया उनका प्रयास था कि कुशीनगर, जहाँ तथागत का महापरिनिर्वाण हुआ था फिर से बौद्ध जगत में दर्शनीय स्थल बन जाये.* *सन 1891 में अनागरिक धम्मपाल ने भारत स्थित बौद्ध गया के महाबोधि महाविहार की यात्रा की. यह वही जगह है जहाँ सिद्धार्थ गोतम को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी वे देखकर हैरान रह गए की किस प्रकार से पुरोहित वर्ग ने बुद्ध के मुर्तीयों को हिन्दू देवी-देवता में बदल दिया है. इन विषमतावादियों ने तब बुद्ध महाविहार में बौद्धो को प्रवेश करने से भी निषेध कर रखा था इसी दौरान 31 मे 1891 में महाबोधि सोसायटी की स्थापना की गई जिसका हेड आफिस कोलंबो था शीध्र ही इसे कोलकाता स्थानांतरित किया गया.* *महाबोधि सोसायटी की ओर से अनागरिक धम्मपाल ने सन 1895 मे सिविल सुट दायर किया एच धर्मापाल X जयपाल गिर जिसमें मांग की गई थी कि महाबोधि विहार और दूसरे तीन प्रसिद्ध बौद्ध स्थलों को बौद्धो को हस्तांतरित किये जाये. इसी रिट का ही परिणाम था कि आज महाबोधि विहार में बौद्ध जा सकते हैं परंतु तब भी वहां तथाकथित हिन्दुओं का कब्जा आज भी बरकरार है.* *शिकागो में संपन्न विश्व धर्म संसद जो 18 सितंबर1893 मे इस परिषद मे "विश्व पर बुद्ध का कर्जा" इस विषय पर अनागरिक धम्मपाल द्वारा बौद्ध दर्शन पर दिये भाषण से वहां पर उपस्थित दुनीया के विभिन्न धर्मों के विद्वान भौचक्के रह गए.* *बालक डेविड का जन्म एक धनी व्यापरी परिवार में हुआ था उनपर बौद्धदर्शन का गहरा प्रभाव पडा जिससे 13 जुलाई 1931 अनागरिक धम्मपाल बकायदा बौद्ध भिक्षु बन गये इन्होने प्रव्रज्या ली.16 जनवरी 1933 को प्रव्रज्या पूर्ण हुई और इन्होने उपसंपदा ग्रहण की और फिर नाम पड़ा भिक्षु देवमित धर्मपाल. बौद्ध धर्म के इतने बड़े पुनर्उद्धारक 29 अप्रैल 1933 को 69 वर्ष की अवस्था में इस दुनिया से विदा हो गये अनागरिक धर्मपाल इनके स्मृतिदिवस पर विनम्र अभिवादन और आदरांजली.💐💐💐🙏🙏🙏

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अभ्यासिका अहमदनगर येथील कार्यकर्ते टिमचा कृतीशील संकल्प

अभ्यासिका अहमदनगर येथील कार्यकर्ते टिमचा कृतीशील संकल्प 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨     *चळवळीचा कार्यकर्ता हा भिख्खू समान असावा व्यक्ति, कार्यकर्ता एकदा प्रशिक्षीत झाले की तो व्यक्ति ज्या ठिकाणी वास्तव्याला असतो त्या भागत आपल्या आचरणयुक्त व शिलवान कृती मुळे त्याच्या चळवळीचा व त्यांच्या ज्ञानाचा प्रभाव इतर समाज घटकांला प्रभावित करत असतो, असा आचरणाशील व्यक्ती समाजाचा श्रेष्ठतम कार्यकर्ता असतो,व्यक्ती ज्या गावात असो, ज्या ठिकाणी नोकरीत असो, कार्यात असो,व्यवसायात असो वा इतर समुदायाच्या संपर्कात असो,अशा सर्व ठिकाणी व्यक्तीचा वरील प्रमाणे प्रभाव निर्माण होने गरजेचे आहे; असे कार्य तेव्हाच शक्य होते जेव्हा त्या व्यक्तच्या शब्दांना कृती ची जोड असते म्हणजेच व्यक्ती हा तेव्हा यथायोग्य प्रभाव निर्माण करेल जेव्हा तो धम्माचरण करेल शिलाचरण युक्त कृती करेल.*        *सुरेन मेश्राम*         *अमरावती* 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨 https://youtu.be/pLFPffTSHuw 🌷🙏🙏🙏🌷

प्रजासत्ताक दिवस

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🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 सर्व भारतीयांना २६ जानेवारी प्रजासत्ताक दिना निमीत्य हार्दिक शुभेच्छा... 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳    *मी प्रथम भारतीय आहो व अन्तत: ही भारतीयच आहो.*  *(डॉ.बाबासाहेब)*   *२६ जानेवारी प्रजासत्ताक दिन" आपला राष्ट्रीय सन २६ जानेवारी १९५० रोजी भारत देश प्रजासत्ताक झाला प्रजासत्ताक किंवा गणतंत्र या शब्दाचा अर्थ होतो प्रजेची सत्ता, भारतात राहणाऱ्यांची सत्ता आजच्या दिवसापासून डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांनी लिहिलेल संविधान व भारत देशाला अर्पण केलेली माणवीय मुल्ये स्वातंत्र्य ,समता व बंधुता या त्रयींवर आधारलेले लोकशाही राज्य म्हणून भारत हे राष्ट्र जगाच्या पाठीवर उभे राहिले, प्रजेच्या सत्तेत म्हणजेच प्रजासत्ताकात डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर यांनी भारतातील प्रत्येक नागरिकाला एका मताचा अधिकार दिला आणि मताच्या आधारेच " प्रजेची सत्ता निर्माण करुण "  गणराज्य हे मताच्या पेटीतून निर्माण केले.* *या सोबतच लोकशाही प्रजातंत्र आबादीत राखणे हे प्रत्येक भारतीय नागरिकाचे नैतिक कर्तव्या आहे या बाबत "संविधान सभेत" डॉ. बाबासाहेब म्हणतात..* *"On 26th January 1950, India will be a...

ग्रामीण भागात समाजिक कार्य म्हणजे मुलभुत कार्य होय. 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨

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ग्रामीण भागात समाजिक कार्य म्हणजे मुलभुत कार्य होय. 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨          समाजातील महत्त्वपूर्ण घटक म्हणजे ग्रामीण भागातील व झोपडपट्टीतील समाज होय, प्रामुख्याने या भागातील युवावर्ग समाजातील मुख्य प्रवाहा पासून खुपच दुर आहे;मुलभूत सुविधां पासून दुर्लक्ष आहे त्यांना कार्यक्रम नसल्यामुळे ते भरकटत आहे.मोबाईल,मोबाईल गेम,टेलिव्हिजन, क्रिकेट,पानटपरी,चौकातील टाईमपास या विविध कारणांमुळे अनेक युवकांची वाया जात असतात,युवकांना योग्य वेळी योग्य मार्गदर्शन व सुविधांच्या अभावी युवक आपले आयुष्य घडवणारी महत्वपूर्ण वर्षे वाया घालवत असतो.समाजातील,कुटुंबातील पालक वर्ग यांना नेहमी नकारात्मक सांगत असतात की, व्हिडिओ गेम खेडू नको,टीव्ही बघू नको, क्रिकेट खेळू नको,पान टपरीवर चौकात जाऊ नको यापेक्षा समाजाने आणि पालकवर्गने युवकांना सकारात्मक काय केले पाहिजे व कुठे जायला पाहिजे हे सांगणे अत्यंत गरजेचे आहे.*          *समाजाला व युवकांना मुख्य प्रवाहात आणनारा व मदतीची हात देणारा कार्यक्रम म्हणजे "बिहार तिथे अभ्यासिका"आपल्या गावातील विहारात ...

ज्ञान कि ज्योती आईं सावित्रीमाई फुले जयंती की हार्दिक शुभकामना..!!!

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ज्ञान की ज्योती आईं सावित्रीबाई फुले जयंती, शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामना!* 🙏🪷🪷🪷🙏     आईं सावित्रीबाई फुले द्वारा अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में किया गया कार्य समाज मे मोजूद आजतक सारी समाजीक व्यवस्था से भी बढकर उच्च कोटि का कार्य जिन्हें महान एव अद्वितीय बनाता है हम बहुजन समाज के लिए वह भारत रत्न पुरस्कार से भी बढकर है। जहाँ खेलकूद, राजनीति,नाच,गाना, बजाना ऐसे कार्य करने वाले लोगों को भारत रत्नसे नवाजा जाता है, कितनी शर्म की बात है! जिन्हेंने समाज का बुनीयादी कार्य किया उन महान कार्यको व्यवस्था जानबूझकर नजर अंदाज कर देतीे है परंतु समाज मे जन्मे इन माहापुषों का कार्य दूनीया के अस्तित्व तक अमर रहने वाला है इन माहापुषोंके विचारों को दूनीया हर समय पूजती रहेगी, उनके कार्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती रहेगी. वर्तमान मे जहाँ "भारत रत्न" पुरस्कार मिले लोगोके कार्य को जनता जानती तक नही जिन्हें जानती है उनके कार्यों को समाज मानती तक नही ऐसी परीस्तीती मे कुछ जिनकी पात्रता नहीं है ऐसे लोग भारत रत्न से नवाजे गये जो उस सन्मान के लायकतक नही थे उन्हें सम्मानित किया गया प...