मनुष्य का व्यक्तित्व बाहरी दिखावे से परे
मनुष्य का बाहरी दिखना केवल भौतिकता है,जो समय के साथ धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है। लेकिन असली खूबसूरती और स्थायित्व तो हमारे आंतरिक और बाहरी सकारात्मक गुणों के मेल में है। जब ये दोनों साथ मिलते हैं, तभी व्यक्ति का सच्चा व्यक्तित्व विकसित होता है। मुझे अक्सर कुछ लोगों द्वारा कहा जाता है कि कर्मचारी को लंबे बाल रखना ठिक नहीं उसका इसके प्रति उनका क्या दृष्टिकोण है? यह आजतक कोई बात नहीं पाया। लेबे बालों और रहन सहन के प्रति कुछ लोगों का अनोखा अनुभव आइए आपसे इस बारे में अनुभव साझा करता हूँ। हमारे एक मित्र पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, जो स्वयं शराबी, भ्रष्टाचारी और अनैतिक हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को लंबे बाल रखना ठीक नहीं। मुझे जवाब देना पड़ा, "जब मैं न्यायालय के विधि सेवा प्राधिकरण में कार्यरत था और कारागृह में ड्यूटी के लिए जाता था, तब मैंने हजारों बंदियों को अच्छे रहन-सहन में देखा। लेकिन उनमें शील और नैतिकता का अभाव था, इसलिए वे इस स्थिति में हैं।" यह अनुभव बताता है कि बाहरी दिखावा कभी-कभी आंतरिक गुणों को नहीं दर्शाता। असली मूल्य नैतिकता, शील और चरित...