अमरावती सत्याग्रह

अमरावती महाराष्ट्र मे डॉ.बाबासाहब आंबेडकर द्वारा १३ नवंबर १९२७ को अस्पृश्य परीषद की अध्यक्षता..!!!

    अमरावती महाराष्ट्र के अंबादेवी मंदिर मे अस्पृश्यो द्वारा मंदिर प्रवेश के लिये १९२५ से आंदोलन चल रहा था मगर उस आंदोलन को १९२७ मे सही मायने मे डॉ.बाबासाहब आंबेडकर के अमरावती आगमन से सामाजिक जागृति को अत्यधिक प्रभावीत किया.

   अंबादेवी मंदिर कमीटी द्वारा अस्पृश्यो को मंदिर प्रवेश न देने संदर्भ मे लिखीत कहना प्राप्त होने पर अमरावती के स्थानीय अस्पृश्यो ने सत्याग्रह का ठराव परीत किया यह करने से पुर्व स्पृश्यो और अस्पृश्यो मे समझौता करने हेतु स्थानीय नेता बँ.बागवे ने सूचनाएं रखी वह इस तरह थी..
१)मंदिर से कुछ अंतर पर एक कटघरा बनाया जाय उस कटघरे के अंदरूनी भाग मे मात्र पुजारी को ही प्रवेश मिले.
२)दिन का कुछ समय छोडकर अन्य समय पर सभी हिंन्दूओ को दर्शन के लिये खुला रहे.
३)उपर दिये समय मे अस्पृश्योने दर्शन को न जाये.
यह समझौते को मंदिर कमीटीने अनुमति नही दी और यह सब अस्पृश्यो के साथ होगा यह अस्पृश्यो को पता भी था.
  अमरावती मंदिर सत्याग्रह को बढावा मिलने के लिये स्पृश्य और अस्पृश्य समाज सेवकोने अमरावती मे डॉ.बाबासाहब आंबेडकर की अध्यक्षता मे सभा आयोजित की जिसका लेखाजोका बहिष्कृत भारत के अंक मे प्रसिद्ध है.

*अमरावती के सुप्रसिद्ध और नामी लोगों का परीषद मे सहभाग...*

    १३ नवंबर १९२७ को अमरावती के इंन्द्रभवन थियेटर मे परीषद का आयोजन हुआ डॉ.पंजाबराव देशमुख ने सत्याग्रह का महत्व लोगों को बताया डॉ.बाबासाहब की अध्यक्षता का अनुमोदन नानासाहब अमृतकर मोर्शी तथा अमरावती सत्याग्रह कमीटी अध्यक्ष गवई(MLC) सचिव नाईक ने भी अनुमोदन किया. परीषद मे स्पृश्य और अस्पृश्य समाज के नामी लोग मौजूद थे जिनमे,
१)डॉ.पंजाबराव देशमुख
२)बँरीस्टर तिडके
३)आँड.चौबळ
४)के बी देशमुख
५)डॉ.भोजराजा
६)डॉ.पटवर्धन
७)उत्तमराव कदम
८)दे वी नाईक संपादक "ब्राह्मणब्राम्हतोत्तर" आदी शहरके नामी लोग उपस्थित थे.

*डॉ.बाबासाहब का विद्यार्थियों को उपदेश*

     दि.१४ नवंबर१९२७ को सुबह ७ बजे अस्पृश्य विद्यार्थीयो ने डॉ.बाबासाहब को मानपत्र दिया इस समय पर डॉ.बाबासाहब आंबेडकर ने युवको को संबंधित करते कहा... "विद्यार्थियों ने शिल कैसे बनाये और  जिवन मे शिल के बारेमे संक्षिप्त मे उपदेश भी किया आगे डॉ.बाबासाहब ने युवकों से कहा अपने वंश को लगा अस्पृश्यता का दाग धोनेके लिये कार्य करने का महत्व बताया.

*डॉ.बाबासाहब के भाई की मृत्यु*

१४ नवंबर१९२७ को सुबह ८ बजे परीषद शुरु होते ही मुंबई से तार द्वारा संदेश आया के डॉ.बाबासाहब के बंधु बाळारामजी आंबेडकर के देहावसान होने की वार्ता प्राप्त हूइ ऐसी दु:खद परीस्तीती मे परीषद का कामकाज १० मिनट तहकूब के बाद पुनः परीषद जारी रखकर डॉ.बाबासाहब ने समाजीक दृष्टिकोण के प्रती अपनी त्याग समर्पन बलीदान और जॉबाजी को सिद्ध किया.

  *परीषद मे यह ठराव पारीत हुए*

१)बाळारामजी आंबेडकर के देहावसान १० मी के लिये काम तहकूब किया गया.
२)अंबादेवी संस्थान के अध्यक्ष गणेशजी खापर्डे द्वारा सत्याग्रह कमीटी को पत्र लिखा जिसमे खापर्डेजी के समझौते की मनीषा को देखकर उन्हे और कुछ समय दिया जाए.
३)सत्याग्रह १३ नवंबर से लेकर कुल तिन माह के अधिक समय का न हो.
४)मंदिर के अंतीम छोर तक प्रवेश की अनुमति.
५)आनेवाला सत्याग्रह सामुदायिक पद्धति से हो.
     यह ठराव परीषद मे बडे बहुमत के साथ पारीत हुए सत्याग्रह परीषद के सदस्यों ने अध्यक्ष डॉ.बाबासाहब आंबेडकर और मेहमानो का आभार व्यक्त किया. परीषद का समापन डॉ.बाबासाहब आंबेडकर की जय....!
छत्रपति शाहूजी महाराज की जय..! जयजयकार से अमरावती मे परीषद
सम्पन्न हुई...!
संदर्भ:-
डॉ.बाबासाहब जिवन चरीत्र & बहिष्कृत भारत.

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