अभी खेल शुरू हुआ है!!!
18 दिसंबर 2018 को लिखी पोस्ट "अभी खेल शुरू हुआ है"!!! इस नाम से प्रदर्शित पोस्ट और मा.रवीशकुमार द्वारा रखे गये विचार जो हमारे महापुरुषों की भाषा है यह केवल पुन:स्मरण है इनके द्वारा विचारो का प्रकटीकरन कर सामाजिक विस्मरण को स्मरण कराना है. नागपुर मे दि.10 मार्च 2019 को राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका तथा स्मृतिशेष मधुकरराव तामगाडगे शिक्षा, शिष्यवृत्ती" वितरण समारोह के समय मा.रवीशकुमार द्वारा संबोधन. निचे दि गई लिंक....
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2972934719386932&id=1036873186326438&ref=dbl&__tn__=%2AW-R&_rdr
•••••••••••••••••••••••
18 दिसंबर 2018 को लिखी गई पोस्ट.....!!!
अभी खेल शुरू हुआ है!!!
••••••••••••••••••••••••
मनुवादी विचारधारा ने संविधान का अपमान कर विधायीका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मिडीया जो लोकतंत्र के आधार स्तंभ है जो संविधान मे वर्णित है संविधान जलाकर लोकतंत्र के साथ साथ समुचे भारत देश को भी जालाया है यह अपमानित कृति लोकतंत्र की हत्या है जिसे अधीकांश समाज का वर्ग खामोशी से तमाशा देख रहा है यह उनकी भी गलती नही है क्यो की यह उनकी अज्ञानता हो सकती है या फिर इनके मार्गदर्शक इनका कोई आका भी होते है जो इन्हें कठपुतली की तरह इनसे कार्य करवाते है जिसमे पढे लिखे और स्वयं को बुद्धीजीवी कहने वाले भी होते है फिर पढे लीखे Intellectual लोगोका कर्तव्य क्या होता है? पढे लीखे लोगोका कर्तव्य होता है समाज को दिशा देना विपदा के समय मे समाज का मार्गदर्शक बनना, क्या हम पढेलीखे लोग समाज का मार्गदर्शक बने? सामाजिक विपदा के समय पढा लिखा वर्ग जिम्मेदारी के निर्वहन के बारेमे विचार व्यक्त करते समय दलील देते है के, "दुसरे व्यक्ति कर रहे है", "प्रतीक्रीयासे आंदोलन चलाया नही जाता","यह हमारा कार्य नही है", विभिन्न तर्कों से जिम्मेदारी को अन्य व्यक्तियो पर डाल देते है फिर अज्ञानवश युवा और कार्यकर्ता द्वार किये गये दिशाहीन कार्य पर कानूनी कार्यवाही होती है नतीजा युवा और कार्यकर्ताओं का भविष्य संघर्षमय हो जाता है नतीजा समाज का युवा और कार्यकर्ताओं की असीमित हानि होती है तो फिर सामाजिक जिम्मेदारी को समाज के निचले तबके पर डालकर पढे लिखे अपने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ जाते है कार्यवाही जो कानून करणी होती है मगर जिम्मेदारी समाजका युवक,कार्यकर्ता,गरीब मजदूर वर्ग संभालता है तो फिर पढे लिखे लोगोंकी जिम्मेदारी कर्तव्य क्या है? अफसर और बडे वोहदेपर होना और विपदा के समय कुछ न करना यह कृत्य अनपढ गवार से भी बत्तर आचरण होता है जहाँ अपने समाज की समस्या को सुलझाकर बवंडर मे फसी समाज की नैया को पार कराना यह कर्तव्य होना होता है मगर भाषणबाजी वाले महान महानायको जमीनी कार्य के दौरान उपरोक्त दलील देकर जिम्मेदारी से भाग खडे होते है समाज को केवल यह बताना होता है, "क्या करना है और क्या नही करना है" इसी से लायकी और नालायकी समझ मे आती है. समाज का जो बुद्धीजीवी वर्ग होता है क्या यही जिम्मेदारी और दिशा निर्देश समाज के बुद्धीजीवी वर्ग को डॉ.बाबासाहब ने दिये है? यह स्वतंत्र रुप से हर व्यक्ति द्वारा चिंतन करने की जरूरत है.....क्यों के अभी खेल शुरू हुआ है!!!
Comments