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Showing posts from June, 2023

भारत रत्न राजर्षि शाहु महाराज

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🙏🏻💐💐🙏🏻         भारत के इतिहास में गौतम बुद्ध ने राज्य त्याग करकर विश्व के कल्याण का विचार किया। चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने मानव कल्याण के किया कार्य किया ज्योतिबा फुले, शाहू जी महाराज ने भी इन्हीं महापुरुषों के कदमों पर चलकर समाज में समता, बंधुत्व,स्वतंत्रता का आंदोलन निरंतर चलाया।छत्रपति शाहूजी महाराज का समाज के लिए किया गया अद्भुत कार्य को देखकर कानपुर के कुर्मी समाज ने उनको राजर्षी यह उपाधि प्रदान की। उनके नाम से देशमे समाजीक न्याय दिवस मनाया जाता है। छत्रपति शाहूजी महाराज कि शिक्षा राजकोट के राजकुमार कॉलेज में हुई अपने उम्र के 20 वे साल मे वे कोल्हापुर संस्थान के राजा बने 1902 में इंग्लैंड के केंब्रिज विद्यापीठ ने उन्हें LLD यह पदवी दी। छत्रपति शाहूजी महाराज का समुचे समाज के प्रति समाजीक दृष्टिकोण का कारण यह है कि उनको शैक्षणिक और उदारीकरण का दृष्टिकोण विदेशी शैक्षणिक दृष्टिकोण के कारण हुई। उन्हें फितुझ राँल्ड नामके बुद्धिमान अंग्रेज शिक्षक को शिक्षा के लिए नियुक्त किया। वे राजकोट के राजकुमार काँलेज मे पढे उनको आगे पढाने के लिए फ्रेझर नामक शिक्षक ...

गुनाहगार जमात को मुख्य प्रवाह मे लानेवाले एकमात्र राजा

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      कोल्हापुर संस्थान मे छत्रपती शाहु महाराज के कार्यकाल में अपने संस्थान में फांसे पारदी यह गुन्हेगारी जमात थी जो खुद को महाराणा प्रताप के वंशज समझते थे इस जमाती को जानबूझकर कई सुविधाओं से बेदखल,वंचित कर रखा था। फांसे पारधी यह जमाती जो पिछड़ी  जमात जिनकी रोजीरोटी पक्षोंयो को फांसे मे पकडना शिकार करना उन्हे बेचना था यह लोग उस पर अपना गुजर बसर करते थे।       एक बार शाहू महाराज कटकोळा गाव आये वहाँ उन्हें फासे पारधी लोगों की अनेकों शिकायते मिली के गांव के फांसे पारधी जाती के लोग महाराज के छावनी पर डकैती डालते थे यह बात महाराज के सुनने में आई उन्हें सैनिकों द्वारा पकडकर कारागृह में रखा। उन्हें किसी बात की तकलीफ न देकर उनके खाने की व्यवस्था की शाहु महाराज का यह मानना था कि कोई भी लोग मुलत: गुनहगार प्रवृत्ति का नहीं होता। उनका गलत मार्ग पर चलने के अनेकों कारण हो सकते हैं जरूरी होता है उस बात को समझने की यही बात छत्रपति शाहू महाराज ने उन लोगों को उस जमात को समझा और उन्होंने इस बात को समझने की कोशिश की वह लोग चोरियां क्यों करते है। कोई भी व्यक्ति...

छत्रपती शाहू महाराज और आरक्षण

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छत्रपती_शाहू_महाराज_और_आरक्षण 🇸🇨🇬🇺☸️🇬🇺🇸🇨      शाहू महाराज ने अपने संस्थान में पिछडो वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया आरक्षण का विरोध करने के लिए सांगली के अँड.अभ्यंकर इन्होंने शाहू महाराज को आरक्षण के विरोध के बारे मे बातचीत की। उन्होंने महाराज की मुलाकात लेकर विरोध के बारे में बताया उसपर शाहू महाराज ने उन्हें अपने तबेले में ले जाकर सिद्ध करवाया के ताकतवर घोडे के साथ कमजोर घोड़ों को एकसाथ चने खानेके लिए छोडा जाए तो ताकतवर घोडे कुछ कमजोर घोड़ों को लातों से मारकर खाने से वंचित कर देंगे और भगा देंगे। उसी तरह से मजबूत समाज कमजोर समाज के वर्ग को सुविधा हक अधीकार से वंचित रखेंगे वे शिक्षा और सत्ता मे आगे आने नहीं देंगे। इसी लिए कमजोर घटकोंको विशेष सुविधाएं देनी जरूरी है।

बुद्ध विहार बनाने के तीन प्रमुख उद्देश्य

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🇪🇺🇸🇨☸️🇸🇨🇪🇺         18 मार्च 1956 को आगरा मे एक बुद्धविहार के उद्घाटन के मौके पर बोलते हुए डॉ बाबासाहब आंबेडकर जी ने लोगो को समझाया कि बुद्धविहार बनाने के पीछे तीन प्रमुख उद्देश्य हैं:- 1)हमारे समाज के अधिकतर लोग गाँवों मे रहते हैं ,किन्तु रोजगार , नौकरी, हायर एजूकेशन और इन्टरव्यू इत्यादि के लिए उन्हें शहरों मे आना पड़ता है । यहाँ उन्हें ठहरने का ठौर ठिकाना नहीं मिलता और वे फुटपाथ , रेलवे स्टेशन , पार्को , खुले मैदानों मे रहने को मजबूर होते है ।  2)दूसरे समाज के लोग जब शहर आते है तो उन्हें अपनी अपनी जाति के लिए बनाई धर्मशालाएं , होटल , गैस्ट हाउस इत्यादि आसानी और निशुल्क या कम से कम खर्चे मे मिल जाते है । इन बुद्धविहारों के बनने से हमारे लोग भी जब शहरों मे आयेंगे तो सम्मान के साथ ठहरेगें, ये बुद्धविहार उनकी हर तरह से सहायता करेंगे । 3)इन बुद्धविहारों मे एक अग्रेजी माध्यम से संचालित स्कूल खुले जिससे हमारे समाज की भावी पीढी के बच्चे भी दूसरे समाज के बच्चों के समकक्ष खड़े हो सके। इन बुद्ध विहारों मे दुकानें बनाकर अपने लोगों को रोजगार और व्यापार ...

उस्मानिया विश्वविद्याल हैदराबाद ने_ वल डाँ.बाबासाहब को सन्मानीत किया था।

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#उस्मानिया_विश्वविद्याल_हैदराबाद_ने_केवल_डाँ_बाबासाहब_को_सन्मानीत_किया_थ 🇸🇨🇸🇨☸️🇸🇨🇸🇨      डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर ने अनेकों विषयों पर ग्यान अर्जित किया और विदेश से डिग्रियां प्राप्त करने के बाद भारत मे ऐसी डिग्रियां प्राप्त करनेवाले एकमात्र व्यक्ति थे उस समय उनके कार्य और ग्यान के महत्व को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। देश के किसी भी व्यक्ति,संस्था या विश्वविद्यालयो ने उनके पढाई और ग्यान को महत्व नहीं दिया उन्हें द्वेषपूर्ण तरिके से जानबूझकर नजरअंदाज किया गया,अपवाद 12 जनवरी 1953 को उस्मानिया विश्वविद्याल हैदराबाद ने उन्हें Doctor of literature कि पद्ववी से नवाज कर उनको सन्मानीत किया। आज दुनिया मे डाँ. बाबासाहब के ग्यान और उनके आचरण से देश दुनिया में वे सन्मान के पात्र बने है।        डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्तियाँ विश्व के दस शिक्षण संस्थाओं में लगी है और 14 विश्वविद्यालयों को डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर नाम दिया गया है। विश्व के शिक्षण संस्थाओं में लगी मुर्तीयाँ 1)लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स, कोलंबिया यूनिवर्सिटी (न्यू यॉर्क), 2)यूनिवर्सिटी ऑफ़...

डाँ.बाबासाह आंबेडकर कि पढाई और pHD

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   डाँ.बाबासाह आंबेडकर कि पढाई और pHD    📘............✍️    डाँ. बाबासाहब आंबेडकर ने अपने उमर के 25 वे साल मे याने 1916 मे कोलंबिया विश्वविद्यालय मे National dividend of India and a analytical study इस विषय में pHD का संशोधन सादर किया आगे उन्हें कोलंबिया  विश्वविद्यालय ने उन्हें pHD प्रदान की। यह प्रबंध1925 मे लंदन के पी.एस. किंग अँन्ड कंपनी ने The evolution of provincial Finance in British India इस नाम से प्रसिद्ध किया।    साथ साथ 1916 मे डॉक्टर गोल्डनवेयर इनके आयोजन से मानववंश शास्त्र परिसंवाद, Cast in India,their mechanism, genesis and development. उन्होंने Administration and Finance of the East India Company इस विषय पर शोध प्रबंधलिखकर MA की डिग्री प्राप्त की।     सन 1921 मे Provincial  decentralizatio of Imperial Finance in British India इस निबंध के लिए MSC पद्ववी दी गई। 1923 मे उन्हें The problem of rupee इस प्रबंध के लिए(DSC) Doctor of science प्रदान की गई इस प्रबंध को किंग कंपनी ने प्रकाशित किया। यह ग्रंथ उन...