"विहार जहाँ अभ्यासिका वहाँ"
"विहार जहाँ अभ्यासिका वहाँ" 🛣🛣🛣🛣🛣 "राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका" का निशुल्क सामाजिक उपक्रम... ☸☸☸☸☸ *२४ नोव्हेंबर १९५६ को सारनाथ मे डॉ.बाबासाहब आंबेडकर ने कहाँ था की, “हर बौध्दो का आद्यकर्तव्य है के वे जानकर समझकर हर रविवार को बुध्द विहार मे जाऐ तथा वहाँ उपदेश ग्रहण करे, वैसे ही प्रत्येक गावमें बुध्द विहार का निर्माण कर वहाँ सभा हेतु सभागृह बनाये.”* *डॉ. बाबासाहब के आदेश अनुसार बौध्द समाजने देहांतो बस्तियों, गांव, झुग्गी झोपडी एवं शहरो मुहल्ले मे छोटे बडे बुध्द विहार बनाने का प्रयास किया, (जिस जगह पर सामाजिक भवन/सभागृह है उसका उपयोग बुध्द विहार तथा अभ्यासिका के रूप मे इस्तेमाल किये जाने की जरुरत है) परंतू “बुध्द विहार मे हर रविवार को प्रत्येक बौध्द ने अपना अद्यकर्तव्य समझकर विहार मे जाकर वहाँ उपदेश धम्मदेसना ग्रहण करनी चाहीऐ,” ईस आदेश अनुसार डॉ. बाबासाहब को वंदनीय,पुजनीय माननेवाले बौध्द समाजाने दुर्लक्षीत कर आज्ञा की अवहेलना कर रखी है। जिस जगह बुध्द विहार है उस जगह कुछ विशिष्ट लोगों द्वारा विषेश:महीलाये और वृद्ध पुरुषो को विहारो म...