सांची मोहोत्सव

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दि. 24 नवंबर शनिवार और 25 नवंबर रविवार को सांची भोपाल मे....सांची मोहोत्सव...!
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*सॉची मोहोत्सव सारिपुत्र तथा महामोग्गलायन बुद्ध के शिष्यों की अस्थि अवशेष दर्शन समारोह.*
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*बौद्ध तत्वज्ञान की अमुल्य धरोहर जो समुचे जंम्बुद्विप मे मौजूद है जो अधिकतर विश्वधरोहर की श्रेणी मे है 30 नवंबर 1952 मे भारत के प्रधानमंत्री एवं श्रीलंका सरकार की संयुक्तता मे समारोह आयोजित कीया गया था जिसमे भंतेसंघरक्षीतजी ने समुचे भारत मे अस्थियो को दर्शनार्थ घुमाया गया जिससे बौद्धधम्म मे श्रद्धाका क्या महत्व होता है यह जताया. वर्तमान समय मे हमे चर्चित स्थलो गया, नेपाल, सारनाथ, महू, दिक्षाभुमी, भिमाकोरेगांव जैसे चर्चित स्थलो के बारेमे जानकारी है सांची समारोह के बारेमे अधिकांश लोग अनभिज्ञ है यह जो विश्व धरोहर है हम सभी ने हमारी संस्कृति को संभालना जरुरी है साथ साथ इस समारोह के बारेमे सभी को जानकारी देना भी जरुरी है.*
*सम्राट अशोक ने भारत मे 84 हजार स्तुपों का निर्माण किया जिनमे तथागत बुद्ध की अस्थिया प्रस्थापीत की गई है उनमेसे एक सांची भोपाल भी है.1818 मे मार्क टेलर ने इसे खोजा था 1989 मे युनेस्को ने विश्व धरोहर घोशीत किया. स्तूप नं 3 गिर गया था जो 2200 साल पुराना है जॉन मार्शल Director of Archeological depertment के प्रमुख थे इन्होंने इसे पुनः संजोया.*
*आगे लँर्ड कनिंघम ने खूदाई करवाई तो इसमे क्या मिला? चंदन की लकड़ी का बक्सा जिसमे तथागत बुद्ध के दो प्रिय शिष्य सारीपुत्त और महामोग्गलायन की अस्थीयां थी. ब्रम्ही लिपीमे बक्से पर इनका नाम लिखा गया है जो ब्रिटिशो ने अस्थीयां ब्रिटेन ले गये मगर पुनः प्रयास से भारत मे अस्थीया लाई गई, 30 नवंबर 1952 को अस्थीया पुनः सांची चेत्यगीरी विहार मे दर्शनार्थ रखी गयी हर वर्ष नवंबर माह के अंतिम शनिवार,रविवार को रखा जाता है. समारोह मे जरुर जाये*
*हर वर्ष नवंबर माह के चौथे शनीवार रविवार को समारोह का आयोजन होता है इस समारोह मे जापन,थायलंड,श्रीलंका,जर्मनी,सिंगापुर संपूर्ण विश्व से समारोह को मनाने आते है. समारोह मे समता सैनिक दल का पथ संचलन होता है.श्रीलंका से वादक बुलाये जाते है समूचे विश्व से लोग यहा आते है यह समारोह विलोभनीय होता है यह जानकारी  का व्हिडीयो "JAY BHIM INDIA" facebook Page पर कुल १२ छोटे वीडीयो के साथ दिये गये है link...*
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