समीक्षा और चिकित्सा!!!
🇮🇳🇪🇺☸🇪🇺🇮🇳 वृद्धाश्रम मे वृद्धो की समस्या जानकर इस विषय का हमेशा का समाधान जरूरी है इस समस्या के साथ साथ भिखारी की संख्या मे वृद्धि? पढे लिखोंकी बेकारी,रोजगार? गरीबी,भुखमरी? अंधविश्वास?धार्मिक उन्माद? जातिवाद? धर्मों मे विवाद? भ्रष्टाचार ?और बहोत कुछ सारी समस्या को सुलझाने का मार्ग हमारे महापुरुषेंने बताया है समस्या को सुलझाने से पहले महत्वपूर्ण तत्थ समीक्षा और चिकित्सा के आधार पर सुलझाना जरूरी है. सामाजिक समस्या पर समाज के जागरूक लोगे ने विषय की समीक्षा और चिकित्सा करना जरुरी है और निडरतापूर्वक इस आधार के साथ अपनी बात समीक्षा और चिकित्सा के साथ रखनी चाहिए.* *समीक्षा:-* *विषय व्यक्ति के अंदर की कमियों/खामियों का सामना करना मतलब समीक्षक करना होता है . उदा. 18 मार्च 1956 को आग्रा मे डॉ.बाबासहाब ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपने आंदोलन की समीक्षा की, आमतौर पर कोई इंसान बंद कमरे में भी अपनी और अपने कार्य की समीक्षा नहीं करता, क्योंकि समीक्षा करने से अपने अंदर की कमियों/खामियों का सामना करना पड़ता है. यह एक दुखद प्रक्रिया है. डॉ.बाबासाहब खुद जो आंदोलन वे चला रहे...