बहिष्कृत भारत का लेख डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर ने मनुस्मृती क्यो जलाईं
★★★★★ 🔥🔥🔥🔥 महाड सत्याग्रह परिषद पर जो लोग बड़ा आरोप लगाते है कि मनुस्मृति जलाईं है उपरोक्त आपत्तियां करने वालों ने या तो मनुस्मृति नहीं पढ़ी होगी या फिर उन्होंने मनुस्मृति में बताए गए नियमों को स्वीकार कर लिया होगा। इस देश में यह परंपरा रही है कि जो लोग राजनीति में उग्र होते हैं, वह सामाजिक मुद्दों पर नरम रुख अपनाते आये है इस परंपरा में अपवाद मात्र स्वराज्य के संपादक है हमें यकीन है कि वह राजनीति के साथ-साथ सामाजकारन स्तरपर उग्र रहेंगे। हम यह नहीं कहते कि ऐसी परिस्थिति में मनुस्मृति में निहित सिद्धांत उन्हें स्वीकार्य होंगे। यह कहना स्वीकार्य है कि उनके द्वारा उठाई गई आपत्ति केवल इसलिए थी क्योंकि उन्होंने मनुस्मृति पढ़ी नहीं।हम अपने मित्रों को विनम्र सलाह देते हैं कि उन्हें एक बार मनुस्मृति अवश्य पढ़नी चाहिए। हमने मनुस्मृति के बारे में जो कुछ पढ़ा है, उससे हमें यह विश्वास हो गया है कि यह ग्रंथ शूद्र जाति की निंदा करने वाले, उन्हें अपने अधीन करने वाले, दुष्ट उत्पत्ति का कलंक लगाने वाले और समाज में उनके प्रति अनादर बढ़ाने वाले श्लोकों से भर...