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Showing posts from March, 2024

राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले की वसीयत

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समाजिक_आंदोलन_में_परिवारवाद_से_ज्यादा_व्यक्ति_की_योग्यता_श्रेष्ठता_को_महत्व_है।        राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले ने अपनी वसीयत में अपने समाज के लिए उदारता और व्यापक दृष्टिकोण को उजागर किया है। समाज में पिछड़े वर्ग को समानता के साथ साथ समान अधिकार, अवसर मिलने चाहिए इसके लिए सत्यशोधक आंदोलन को अधिक व्यापक करने के लिए उन्होंने अपने परिवार से भी अधिक महत्वपूर्ण सत्यशोधक आंदोलन में समर्पित लायक कार्यकर्ता, व्यक्ति को ज्यादा महत्व दिया है। उनकी वसीयत आंदोलन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे आंदोलन के प्रति त्याग और समर्पण कि मिसाल राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले ने अपने वसीयत में लिखी है। वे लिखते हैं.....     प्रचलित मान्यता के अनुसार चिरंजीव यशवन्त का विवाह संपन्न हुआ हो या नहीं हुआ हो मैं जोतीराव गोविंदराव फुले और मेरी पत्नी सौभाग्यवती सावित्रीबाई पती जोतिराव फुले हम दोनों की मृत्यु के बाद सारी रस्में सत्यशोधक विचारधारा के अनुसार पूरी करने का अधिकार केवल चिरंजीव यशवन्त को है। बाप-दादाओं पुरखो के रिवाज अनुसार हम दोनों की लाशों को नमक में गाड़ दे...

कार्यकर्ताओं अनुयायियों हमारे मरने से पहले!

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कार्यकर्ताओं अनुयायियों हमारे मरने से पहले! 🇪🇺🇸🇨☸🇸🇨🇪🇺         सांसारिक अनिश्चितता और जीवन में निरंतर परिवर्तन के कारण, यह निश्चित रूप से कहना असंभव है कि जीवन में कब क्या होगा! आज हम उत्साहीत हैं लेकिन कल हम दुखी होंगे। इसलिए, जब हम उत्साहीत होते है तब यथासंभव सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। जो व्यक्ती मिशन कार्य के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं और रचनात्मक कार्यों में पहल करते हैं उनमें ऐसी ऊर्जा होती है कि दस लोग के कार्य  की तुलना में उस व्यक्ति का कार्य उल्लेखनीय होता है। वे उर्जावान व्यक्ति जिनमें संवाद कौशल्य, बौद्धीक कौशल्य कृतीगत कार्य का अंमल इन वैशिष्ट्य पुर्ण गुणो के कारण वे समाज के स्मरण में रहते हैं। इस तरह के गुणों वाले कार्यकर्ता अनुयाई जब अचानक उनकी मृत्यु हो जाती है जब इस संसार को अलविदा कहते हैं मृत्यू के पश्चात भी वे लोगों के स्मरण में रहते हैं। परंतु स्मरण में रहना और अस्तित्व का रहना दोनों अलग अलग बाते है।इससे ज्यादा भयावह चित्र याने मिशन में कार्यकर्ता के जाने से निर्माण हुए रिक्त स्थान, उस खाली जगह को भर ...

क्या यह कृतघ्नता नहीं है?

क्या_यह_कृतघ्नता_नहीं_है? आप यह संदेश नहीं समझें तो जीवन व्यर्थ है! क्या पढ़े-लिखे युवा समाज की भलाई के लिए कुछ करेंगे?         संगमनेर महाराष्ट्र छात्रावास के निर्माण निधि के लिए स्थानीय लोगों को बधाई देते हुए डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर कहते है कि, मुझे खुशी है कि आप यह सामाजिक कार्य कर रहे हैं।  लेकिन एक सवाल मै आप लोगों से पूछना चाहता हूं, वह यह है कि, आप लोग खुद तकलीफ सहकर अपना हाल बेहाल करकर समाज के इस समुदाय के युवाओं को शिक्षित करते हो! उन्हें मदत करते हो!      क्या वे बच्चे शिक्षा प्राप्त करने के बाद आपके समाज के उत्थान के लिए कुछ करने जा रहे हैं?  क्या आप उनसे कुछ प्रतिज्ञा लेख लिखवाते हो क्या? (जबाब आता है नहीं) पिछडे समाज की सेवा करने हेतु तथा हमारे में से शिक्षा लेकर युवाओं को तैयार करने के लिए मैंने सिद्धार्थ महाविद्यालय का निर्माण किया है, लेकिन अनुभव बड़े कड़वे आ रहे है। युवाओं द्वारा शिक्षा प्राप्त करने के बाद तथा बड़ी नौकरी पाने के पश्चात वे सोचते है मेरा काम बन गया।       मैं कौन हूं?       मुझे ...