राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले की वसीयत
समाजिक_आंदोलन_में_परिवारवाद_से_ज्यादा_व्यक्ति_की_योग्यता_श्रेष्ठता_को_महत्व_है। राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले ने अपनी वसीयत में अपने समाज के लिए उदारता और व्यापक दृष्टिकोण को उजागर किया है। समाज में पिछड़े वर्ग को समानता के साथ साथ समान अधिकार, अवसर मिलने चाहिए इसके लिए सत्यशोधक आंदोलन को अधिक व्यापक करने के लिए उन्होंने अपने परिवार से भी अधिक महत्वपूर्ण सत्यशोधक आंदोलन में समर्पित लायक कार्यकर्ता, व्यक्ति को ज्यादा महत्व दिया है। उनकी वसीयत आंदोलन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे आंदोलन के प्रति त्याग और समर्पण कि मिसाल राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले ने अपने वसीयत में लिखी है। वे लिखते हैं..... प्रचलित मान्यता के अनुसार चिरंजीव यशवन्त का विवाह संपन्न हुआ हो या नहीं हुआ हो मैं जोतीराव गोविंदराव फुले और मेरी पत्नी सौभाग्यवती सावित्रीबाई पती जोतिराव फुले हम दोनों की मृत्यु के बाद सारी रस्में सत्यशोधक विचारधारा के अनुसार पूरी करने का अधिकार केवल चिरंजीव यशवन्त को है। बाप-दादाओं पुरखो के रिवाज अनुसार हम दोनों की लाशों को नमक में गाड़ दे...