Posts

Showing posts from October, 2025

सॉची मोहोत्सव

Image
सारिपुत्र तथा महामोग्गलायन बुद्ध के शिष्यों की अस्थि अवशेष दर्शन समारोह #हर_साल_नवंबर_माह_के_चैथे_शनिवार_और_रविवार_को_आयोजीत 🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨 बौद्ध तत्वज्ञान की अमुल्य धरोहर जो समुचे जंम्बुद्विप मे मौजूद है जो अधिकतर विश्वधरोहर की श्रेणी मे है 30 नवंबर 1952 मे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु एवं श्रीलंका सरकार की संयुक्तता मे समारोह आयोजित कीया गया था जिसमे भंते संघरक्षीतजी समुचे भारत मे अस्थियो को दर्शनार्थ घुमाया गया जिसमे भंते संघरक्षीजी ने सहभाग लिया था और बौद्धधम्म मे श्रद्धाका क्या महत्व होता है यह जताया.वर्तमान समय मे हमे चर्चित स्थलो गया,नेपाल,सारनाध, महू,दिक्षाभुमी,भिमाकोरेगांव जैसे चर्चित स्थलो के बारेमे जानकारी है सांची समारोह के बारेमे अधिकांश लोग अनभिज्ञ है यह जो विश्व धरोहर है हम सभी ने हमारी संस्कृति को संभालना जरुरी है साथ साथ इस समारोह के बारेमे सभी को जानकारी देना भी जरुरी है. सम्राट अशोक ने भारत मे 84 हजार स्तुपों का निर्माण किया जिनमे तथागत बुद्ध की अस्थिया प्रस्थापीत की गई है उनमेसे एक सांची भोपाल भी है. 1818 मे मार्क टेलर ने इसे खोजा था 1989 मे युनेस्को ...

समता सैनिक दल जिंदा रहेगा तो आंबेडकर मिशन जिंदा रहेगा

Image
      इस बात को ध्यान में रखते हुए समता सैनिक दल में बच्चों से लेकर महीला पुरुष और वृद्ध भी शामिल होते हैं। समता सैनिक दल की स्थापना 24 सितंबर 1924 को सामाजिक न्याय, मानवता, और अहिंसा के मूल्यों के प्रचार-प्रसार तथा पतीत, वंचित एवं पिछड़े वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए की गई थी। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था कि, “यह संगठन हमारे आंदोलन का अभिन्न अंग है, और सच्ची समता स्थापित करने के लिए इसकी स्थापना की गई है”। समता सैनिक दल का मुख्य ध्येय और उद्देश्य भारत में वर्ग, जाति, लिंग, धर्म, एवं नस्ल के आधार पर होने वाली सभी विषमताओं को मिटाकर एक समानता और स्वतंत्रता पर आधारित समाज का निर्माण करना है।  सामाजिक आंदोलन में समता सैनिक दल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महाड़ सत्याग्रह के दौरान समता सैनिक दल ने डॉ.बाबासाहेब की रक्षा करने और आंदोलन को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नासिक कालाराम मंदिर आंदोलन को संचालित करने और प्रतिभागियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। दल का उद्देश्य अनुसूचित जाति, वंचित एवं उत्पीड़ित समाज के लो...