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Showing posts from March, 2022

महापुरुषों का जन्मदिवस और हमारा अतीरेक❓

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हमारे जन्मदिवस का अतीरेक और महापुरुषो के विचार❗ 🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨          *वाँल्टेयर कहते है की, मैं आपके विचारो से सहमत न हो पांऊ फिर भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करूँगा" आज अभीव्यक्ती स्वातंत्र्य की रक्षा तो दुर कि बात है मगर वाँल्टेयर निर्माण होनाही बंद हो गये है. समाज मे सामाजिक कुप्रथा के विरुद्ध आवाज को बुलंद करने वाले वाँल्टेयर निर्माण होना जरूरी है आज सच बोलने वाले लोगों की समाज को सक्त जरूरत है.आप मेरे विचार से सहमत होंगे या नहीं होंगे लेकिन मुझे मेरे विचारोंको अभीव्यक्त करने का स्वातंत्र्य लोकतांत्र में है.*      *समाज में कुछ लोग व्यक्तिगत स्तर पर जन्मदिन,शादी की सालगिरह मनाते हैं जबकि कुछ लोग बडे पैमाने पर धुमधाम से सार्वजनिक स्तर पर जन्मदिन मनाते हैं और कुछ लोग अपने जन्मदिन को कभी यादभी नहीं करते है. जन्मदिन के अवसर पर बधाई देना एक बहुत ही सकारात्मक भाव है पर कुछ लोग अपने आकाओं को खुश करने के लिए बैनर,पोस्टर बनाना,सोशल मीडिया पर संदेश को प्रसिद्ध करना,फुलो का हार केक मिठाई देकर पैर पडना हालांकि कुछ लोग ज...

डॉ_बाबासाहेब_आंबेडकरने पानी_को_कैसे_आग_लगाई❓

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#डॉ_बाबासाहेब_आंबेडकरने #पानी_को_कैसे_आग_लगाई❓ 🔥🔥🔥🔥 # 20_मार्च_1927 दोपहर को डॉ.बाबासाहब आंबेडकर तालाब की सीढ़ियों से नीचे उतरे नीचे झुककर अपनी एक अंगुली से पानी को स्पर्श किया यही वह ऐतिहासिक पल था जिसने अस्पृश्य वर्ग में क्रान्ति का मार्ग प्रशस्त किया था यह एक प्रतीकात्मक क्रिया थी जिसके द्वारा यह सिद्ध किया गया था कि हम भी मनुष्य हैं हमें भी अन्य मनुष्यो के समान मानवीय अधिकार हैं।            अंग्रेजी शासनकाल के दौरान 1924 में महाराष्ट्र के समाज सुधारक श्री एस के बोले ने बम्बई विधानमंडल में एक विधेयक पारित करवाया जिसमें सरकार द्वारा संचालित संस्थाएं अदालत, विधालय, चिकित्सालय,पनघट,तालाब आदि सार्वजनिक स्थानों पर अछूतो को प्रवेश व उनका उपयोग करने का आदेश दिया गया था कोलाबा जिले में स्थित महाङ में स्थित चवदार तालाब में हालांकि ईसाई,मुसलमान, फारसी,पशु, कुत्ते सभी तालाब के पानी का उपयोग करते थे लेकिन अछूतो को यहाँ पानी छूने की ईजाजत नहीं थी सवर्ण हिन्दुओं ने नगरपालिका सरकार का आदेश भी मानने से इनकार  कर दिया था।*        ...