महाराष्ट्र के सहीत्यीक आचार्य अत्रे का लेख:- ऐसा प्रेम ऐसा शोक
महाराष्ट्र_के_सहीत्यीक_आचार्य_अत्रे का लेख:- #ऐसा_प्रेम_ऐसा_शोक महापरीणीर्वान दिन 6 डिसेंबर 1956 🌷🌹🙏🏻🌹🌷 हमने अपने जीवन में आजतक कभी नहीं देखीं। छत्तीस वर्ष पहले लोकमान्य तिलक का निधन हुआ तब सारे भारत को दुख हुआ लाखों लोग उनके महायात्रा के लिए ऐकत्रित हुए इतना जनसमूह किसीने देखा नहीं था। लोकमान्य कि भारतीय लोग पूजा करते थे। जब लोकमान्य का देहांत हुआ तब लोगोंको दुख होना इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं। परंतु उस दुख का स्वरूप सामुदायिक था वैयक्तिक नही था। लोकमान्य कि मृत्यु राष्ट्रीय आपत्ति यह सर्वसामान्य कि भावना थीं।इसलिये लोगोंको उस समय दुख हुआ वह वैचारिक स्वरूप का दुख था वह भावनात्मक नहीं था।लोकमान्य के लिए हजारों लोग रो रहे है ऐसा दृश्य हमें देखने को नहीं मिला। जब महात्मा गांधी जैसे सांसारिक व्यक्ति की अमानवीय तरीके से हत्या कर दी गई तब लोगों को सबसे ज्यादा दुख हुआ और अनेकों लोगों की आखों से अशृ कि धारा बहने लगी। यह घटना स्वाभाविक थी। लेकिन जैसे ही लोगों को महसूस हुआ कि गांधी की मृत्यु एक अपरिहार्य घटना है इसका...