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Showing posts from 2022

महाराष्ट्र के सहीत्यीक आचार्य अत्रे का लेख:- ऐसा प्रेम ऐसा शोक

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महाराष्ट्र_के_सहीत्यीक_आचार्य_अत्रे का लेख:- #ऐसा_प्रेम_ऐसा_शोक महापरीणीर्वान दिन 6 डिसेंबर 1956 🌷🌹🙏🏻🌹🌷       हमने अपने जीवन में आजतक  कभी नहीं देखीं। छत्तीस वर्ष पहले लोकमान्य तिलक का निधन हुआ तब सारे भारत को दुख हुआ लाखों लोग उनके महायात्रा के लिए ऐकत्रित हुए इतना जनसमूह किसीने देखा नहीं था। लोकमान्य कि भारतीय लोग पूजा करते थे। जब लोकमान्य का देहांत हुआ तब लोगोंको दुख होना इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं। परंतु उस दुख का स्वरूप सामुदायिक था वैयक्तिक नही था। लोकमान्य कि मृत्यु राष्ट्रीय आपत्ति यह सर्वसामान्य कि भावना थीं।इसलिये लोगोंको उस समय दुख हुआ वह वैचारिक स्वरूप का दुख था वह भावनात्मक नहीं था।लोकमान्य के लिए हजारों लोग रो रहे है ऐसा दृश्य हमें देखने को नहीं मिला।      जब महात्मा गांधी जैसे सांसारिक व्यक्ति की अमानवीय तरीके से हत्या कर दी गई तब लोगों को सबसे ज्यादा दुख हुआ और अनेकों लोगों की आखों से अशृ कि धारा बहने लगी। यह घटना स्वाभाविक थी। लेकिन जैसे ही लोगों को महसूस हुआ कि गांधी की मृत्यु एक अपरिहार्य घटना है इसका...

आचार्य_अत्रे_यांचे_भाषण व बौद्ध_धर्म_दीक्षा

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#6_डिसेंबर_1956_महापरिनिर्वाण_दिवशी 🔥#आचार्य_अत्रे_यांचे_भाषण व 🔥#बौद्ध_धर्म_दीक्षा  💐🌷🌷🌷💐       मुंबई शुक्रवार दि.7/12/1956 सायंकाळी सात वा. दादर चौपाटीच्या समुद्र किनारी 10 ते 12 लाख लोकांच्या साक्षीने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या पार्थिव देहाला अग्नीसंस्कार देण्यात आला. अग्नीसंस्कारा पुर्वी लंका, मलाया, ब्रम्हदेश येथून आलेल्या भिख्खूंची प्रवचने झाली.   #बौद्ध_धर्म_दीक्षा      दादासाहेब गायकवाड यांनी शोकाकुल बांधवांना उद्देशन भाषण केले ते म्हणाले की, "दि.१६ रोजी लक्षावधि अस्पृश्यांना बौद्ध धर्माची दीक्षा देण्यासाठी बाबासाहेब येणार होते. पण दुर्देवाची गोष्ट की ते अशा त-हेने आज आपल्या येथे आलेले आहेत. म्हणून ते येऊन जे कार्य करणार होते ते याच ठिकाणी त्यांच्या पवित्र देहाला साक्ष ठेऊन आपण करूं या. म्हणून मिख्खु आनंद कौशल्यायन योनी धर्मान्तरांचे काम आतां सुरु करावे अशी विनंती करतो".      "ज्यांना बौद्ध धर्माचा स्वीकार करायचा असेल त्यांनी हातवर करावे!" त्याबरोबर पाच लक्ष हात वर झाले. मग बौद्ध भिख्खुंनी सांधिक प्रार्...

वर्षावास क्यों?

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🇸🇨🇸🇨☸️🇸🇨🇸🇨 आषाढ़ पूर्णिमा का अर्थ है गुरु पूर्णिमा। बुद्ध धम्म में इस पूर्णिमा का क्या विशेष महत्व है❓ 🇸🇨🇸🇨☸️🇸🇨🇸🇨           भगवान बुध्दने उनका पहला वर्षावास इ.स. पूर्व ५२७ को ऋषीपतन सारनाथ मे व्यतीत किया था और इ.स.पूर्वी ४८३ मे अंतिम ४५ वा वर्षावास किया था।* *उन्होंने खुद श्रावस्ती, जेतवन, वैशाली, राजगृह इत्यादी विहारोमे वर्षावास किये इस तरह सद्धम्म का प्रचार प्रसार भगवान बुध्द द्वारा कर मानव कल्याण के लिए  धम्मपथ के राजमार्ग पर आरूढ किया। वर्षावास का समंध भगवान गौतम बुध्द के जीवन की अनेको संस्मरणीय घटनाओसे जुड़ी है।आषाढ पौर्णिमा को वर्षावास आरंभ होता है और अश्विन पौर्णिमा को संपन्न होता है।* *भगवान गौतम बुध्द के जीवन मे आषाढ़ पौर्णिमा कि कुछ प्रमुख संस्मरणीय घटनाएं*     *1)आषाढ़ पौर्णिमा के दिन महामाता महामाया को गर्भधारणा हुई थी।* *2)इसी दिन सिद्धार्थ गौतमने गृहत्याग किया था।* *3)इसी दिन सारनाथ मे भगवान बुध्दने पंचवर्गीय भिक्खूं को प्रथम धम्मचक्क पवत्तन सुत्त का उपदेश किया था और उन पंचवर्गीय भिक्खूं  ने भगवान गौतम बुध्द को गुरु...

14अप्रेल_डॉ_बाबासाहब_की_जयंती_के_उपलक्ष_मे_हमारी_जिम्मेदारी_और_सम्यक_संकल्प_क्या_हो

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🇸🇨🇸🇨☸️🇸🇨🇸🇨         डॉ.बाबासाहब के जयंती अवसर पर केवल महाराष्ट्रा राज्य मे जयंती उत्सव पर 280 करोड ₹ से अधीक खर्च किया जाता हैं. महापुरुषों कि विचारधारा को फलफुलनेके लिये खाद्य और पानी देने के लिए उत्सव का आयोजन किया जाना बेहद जरूरी है उत्सव प्रियता हमारी संस्कृति और स्वाभीमाण है उत्सव तो होना ही चाहिए परंतु वह मध्यम मार्ग पर चलकर मनाना जरुरी है, तभी हम सब मिलकर सामाजिक कार्य को अधीक गतीमन कर सकते है.      डॉ.बाबासाहब समाज के प्रती गंभीर चिंता व्यक्त करते थे उनके द्वारा दी गई जिम्मेदारी; जन समूह के लिये, उनके समर्थकों के लिये, भूमिहीन मजदूर जो आज स्लम झुग्गी मे रह रहे है उनके लिये, बौद्ध भिक्षुओं (अब यह अनुयायियों की भी जिम्मेदारी है),शासकीय कर्मचारियों (सोए कर्मचारियों को जगाकर) छात्रों एवं युवाओं से (सही समय पर सम्यक ग्यान लेकर IAS,IPS,IRS बडे ओहदे के नैतिक अधिकारी बनाने के लिये कार्य) इन सब के लिये चिंतित थे. हमारे जयंती के बजट मे दि गई जिम्मेदारी, समस्याओं पर गंभीरता से कार्य के लिये नियोजन करना जरुरी है, जिससे हमारे समाज को बनान...

महापुरुषों का जन्मदिवस और हमारा अतीरेक❓

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हमारे जन्मदिवस का अतीरेक और महापुरुषो के विचार❗ 🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨          *वाँल्टेयर कहते है की, मैं आपके विचारो से सहमत न हो पांऊ फिर भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करूँगा" आज अभीव्यक्ती स्वातंत्र्य की रक्षा तो दुर कि बात है मगर वाँल्टेयर निर्माण होनाही बंद हो गये है. समाज मे सामाजिक कुप्रथा के विरुद्ध आवाज को बुलंद करने वाले वाँल्टेयर निर्माण होना जरूरी है आज सच बोलने वाले लोगों की समाज को सक्त जरूरत है.आप मेरे विचार से सहमत होंगे या नहीं होंगे लेकिन मुझे मेरे विचारोंको अभीव्यक्त करने का स्वातंत्र्य लोकतांत्र में है.*      *समाज में कुछ लोग व्यक्तिगत स्तर पर जन्मदिन,शादी की सालगिरह मनाते हैं जबकि कुछ लोग बडे पैमाने पर धुमधाम से सार्वजनिक स्तर पर जन्मदिन मनाते हैं और कुछ लोग अपने जन्मदिन को कभी यादभी नहीं करते है. जन्मदिन के अवसर पर बधाई देना एक बहुत ही सकारात्मक भाव है पर कुछ लोग अपने आकाओं को खुश करने के लिए बैनर,पोस्टर बनाना,सोशल मीडिया पर संदेश को प्रसिद्ध करना,फुलो का हार केक मिठाई देकर पैर पडना हालांकि कुछ लोग ज...

डॉ_बाबासाहेब_आंबेडकरने पानी_को_कैसे_आग_लगाई❓

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#डॉ_बाबासाहेब_आंबेडकरने #पानी_को_कैसे_आग_लगाई❓ 🔥🔥🔥🔥 # 20_मार्च_1927 दोपहर को डॉ.बाबासाहब आंबेडकर तालाब की सीढ़ियों से नीचे उतरे नीचे झुककर अपनी एक अंगुली से पानी को स्पर्श किया यही वह ऐतिहासिक पल था जिसने अस्पृश्य वर्ग में क्रान्ति का मार्ग प्रशस्त किया था यह एक प्रतीकात्मक क्रिया थी जिसके द्वारा यह सिद्ध किया गया था कि हम भी मनुष्य हैं हमें भी अन्य मनुष्यो के समान मानवीय अधिकार हैं।            अंग्रेजी शासनकाल के दौरान 1924 में महाराष्ट्र के समाज सुधारक श्री एस के बोले ने बम्बई विधानमंडल में एक विधेयक पारित करवाया जिसमें सरकार द्वारा संचालित संस्थाएं अदालत, विधालय, चिकित्सालय,पनघट,तालाब आदि सार्वजनिक स्थानों पर अछूतो को प्रवेश व उनका उपयोग करने का आदेश दिया गया था कोलाबा जिले में स्थित महाङ में स्थित चवदार तालाब में हालांकि ईसाई,मुसलमान, फारसी,पशु, कुत्ते सभी तालाब के पानी का उपयोग करते थे लेकिन अछूतो को यहाँ पानी छूने की ईजाजत नहीं थी सवर्ण हिन्दुओं ने नगरपालिका सरकार का आदेश भी मानने से इनकार  कर दिया था।*        ...

भारत_रत्न_गाडगेजी_महाराज_को_विनम्र_अभीवादन

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#समाज_के_नायक_भारत_रत्न_गाडगेजी_महाराज_को_विनम्र_अभीवादन 🙏💐🌹💐🙏      भारत में सर्वप्रथम सार्वजनिक स्वच्छता की क्रांती करनेवाले माहामानव कर्मयोगी गाडगेजी महाराज जिन्होंने समाज में सामाजिक तौर पर व्यक्ति के तन,मन और सामाजिक कुरीतियों के सफाई का अभियान सबसे पहले शुरू किया था। उनके एक हाथ में हमेशा एक झाड़ू तथा दूसरे हाथ में मिट्टी का एक छोटा सा घड़ा होता था, जिसमें पानी भरा रहता था और कान में कवडी पहनते थे वह इसका अर्थ यह बताते थे की मणुष्य जिवन भी (जिसकी कोई किमत न हो)कवडी मोल है वह गांव गांव जाकर पहले साफ सफाई करते बाद मे शामको जन जागरूकता का कार्यक्रम किर्तन करते थे।सफाई करने के बदले मे कोई कृतज्ञता व्यक्त करता या उनको धन्यवाद देता तो वो कहते कि पहले मैं सफाई कर लूं बाद में आपका धन्यवाद ग्रहण करूंगा।       संत गाडगे बाबा के सार्वजनिक स्वच्छता अभियान समर्पण के आदर में महाराष्ट्र सरकार ने 2000-2001 में संत गाडगे बाबा संपूर्ण ग्राम सफाई अभियान जैसी योजना का आरंभ किया था जिसके अंतर्गत सबसे स्वच्छ गांवों को पुरस्कृत करने की योजना भी ब...

Suggestion

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#YOUR_SUGGESTIONS? #Please_Comment ❓❓❓❓       My Dear friend Vishal and Satish give short information on how cast created? that was there misunderstanding, he never refered singl text book or reference book on cast and how cast created? he stated that half truths He said that cast system create by profession. Fact is that #religious texts describe that how casts created. Most of said that cast system is created by #occupation but fact is, it's created by religious texts which is based upon cases system. Giving reference about Religious text book Shudrakamlakar, Jativivek and Samurti puran , describe how cast created. Example... Sir Rameshchandra Dutta's Hindustan prachin Itihas stated that Brahmin mother and Shudra father create #Chandal cast. Brahmin father and Shudra mother create #Nishad. I asked him how created cast like Sonar? Navi? Kunbi? etc please elaborate? give example?  Overall fact is that cast which is still in India the system of discriminant in society...

मेंटोर सिस्टीम

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अभ्यासिकेत परिणामकारक मेंटोर सिस्टम Mentor System 🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨         राष्ट्रपिता ज्योतबा फुले अभ्यासिका RJPA आणि अभ्यासिकेत मेंटोर सिस्टम विकसित करणे म्हणजे चळवळ आंदोलनाच्या प्रचारक प्रसारक आणि अभ्यासकांची निर्मिती करणे होय. RJPA अभ्यासिका आंदोलन मागील दहा वर्षांपासून परिणामकारक व यशस्वी पणे पुढे जात आहे.         मेंटोर सिस्टीम म्हणजे काय? ज्यांना जे ध्येय,उद्देश आणि महत्त्वाकांक्षा पुर्ण करायची आहे ते पुर्ण करण्यास सकारात्मक व विधायक मार्गाने मदत व मार्गदर्शन करणे म्हणजे मेंटोर सिस्टीम होय. दोन हजार पाचवें वर्षापुर्वी तथागत बुद्ध यांनी प्रथमच पाच परीव्रज्यक यांना धम्म सांगितला मार्गदर्शन केले होते हेच गुरु व शिष्याचा समंध म्हणजे मेंटोर सिस्टीम होय. धम्मात कल्याण मित्र संकल्पना आहे जी वरीष्ठ भिक्खू द्वारा नवीन भिक्खूंना श्रोतापन्न होणे, सकृदागामी होणे, अनागामी होणे आणि अर्हत पद प्राप्त होणे करीता मार्गक्रमण करण्यास मदत करणे म्हणजेच आजच्या परीभाषेतिल मेंटोर सिस्टम होय.       अभ्यासिकेत ध्येय उद्देश्य प...