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Showing posts from July, 2023

निस्वार्थ मदत और उसका परिणाम

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🔥🔥🔥🔥     समाज में कुछ लोग पूरी तरह से स्वयं होकर निर्पेक्ष मदद करने की पहल करते हैं क्योंकि ऐसे लोगों को मदत, सहायता करने के कुशल कर्म के महत्व का एहसास हो गया होता है। व्यक्तिगत,संगठनात्मक या संघीय, कुछ लोग बहुसंख्यक लोगों को पूर्णरुपसे निर्पेक्ष सहायता कर उनके कार्य में हाथ बँटाना और सामाजिक सहायताका कार्य कर इस शृंखला को सक्रिय कर अधीकांश लोगों तक समाज मे आगे बढ़ाने की जरूरत है। समाज के विभिन्न घटकों ने हमे विभिन्न तरह से  हमारी मदद की है, जिसका परीणाम उनके फल कि मिठास आज चख रहे है अनुभव कर रहे है। मदत के कुशल कर्म और सहायता के कर्मों से अवगत होकर हमने जरूरत और आवश्यकता के समय जरुरतमंदो को सहायता करना याने समाज द्वारा हमें प्राप्त हुआ ऋण समाज को लौटाना होता है।       मदय और सहायता का स्वरूप यह समय, बुद्धि, धन, प्रयास, आत्मविश्वास, मार्गदर्शन जैसे विभिन्न रूपों में होता है जो सम्यक और विधायकतापुर्ण कुशल कर्म है। कुशल कर्म एक गतिमान क्रिया है जो उद्देश्यपूर्ण और सचेत रूप से की जाती है। कुशल कर्म हमारी स्थिति को निर्धारित करता है।  ...

अन्याय अत्याचार गरीब,बेबस पर क्यो होता है?

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        समाज मे अन्याय अत्याचार पर उच्च स्तरीय व्यक्ति ने आवाज उठाई या लिखा तो उसे लेखक कहलाते हैं और इसके विपरीत  पिढीत पिछडे व्यक्ती ने आवाज उठाई तो उसे जातीवादी काहा जाता है अन्याय अत्याचार के विरुद्ध समाज में समस्या रखकर उसपर उपाय निकालना जरूरी है । समाज मे अन्याय अत्याचार गरीब,बेबस,मजलूम पर होता है अक्सर देखा गया है कि बलि भेड बकरियों कि दी जाती हैं शोरों कि नहीं! आज के दौर में शेर बनना मतलब खुन खराबा करना या असंवैधानिक मार्ग का अवलम्बन करना न होकर, बुद्धिजीवी और आर्थिक संपन्न बनकर समाज में सशक्त परीणाम देनेवाले संघटनात्मक तरीके से व्यक्ति और सामाजिकहितों के लिए कार्य करनेवाला कार्यकर्ता,अनुयायी का निर्माण करना और होनेवाले अन्याय अत्याचार का संविधानिक तरीके से सामुदायिक तौर पर मुकाबला करना है।        संघ को मजबूती प्रदान करना यह संघटन के बुद्धिजीवी, विद्वान और समान्य प्रचारक, प्रसारक और अभ्यासको की जिम्मेदारी होती है। किसी भी संघ या संघटन मे उसके ध्येय और उद्देश्य को पुर्ण करने के लिए समाज मे सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ परीणाम...