श्रीश्री रवीशंकर और सरकारी स्कूलो का नक्सलीझम.
श्रीश्री रवीशंकर और सरकारी स्कूलो का नक्सलीझम.
*राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुलेजी कहते है विद्या न मिलने से कई अनर्थ होते है...*
*गाडगेजी महाराज कहते है अपने घर की खाना खाने की थाली बेचो मगर बच्चों को शिक्षित करो...*
*डॉ.बाबासाहब अंबेडकर कहते है शिक्षा शेरनी का दूध है जो पियेगा वह गुरायेगा...*
*श्रीश्री रवीशंकर कहते है सरकारी स्कूलो के बच्चे नक्षलवाद मेे हिंसा के मार्ग मे चले जाते है, तो रविशंकर ने ज्योतिबा फुलेजी की तरह लोगों को शिक्षित करने हेतु मुफ्त स्कूल का निर्माण कर या स्कूल के लिए जमीन दान कर, समाजिक जागृति कर स्कूल का स्तर सुधार प्रयास कर, या अपना आश्रम स्कूल के लिये दान में देने के उपाय छोड कर, मानसिक दीवालीया वाला वक्तव्य करते है के, "सरकारी स्कूल से पढे हुए बच्चे ही नक्षलवाद मेे हिंसा के मार्ग मे चले जाते है इसलीए सरकार को कोई स्कूल नही चलाना चाहिए और इन सभी के लिए जिम्मेदार उनके शिक्षक होते है" इसी लिये सरकारी स्कूलों को निजी तत्वों पर चलाना चाहिए मतलब सारे स्कूल और कॉलेजेस को Privatised कर किसी संस्था को हस्तांतरित करना चाहिए.*
*राष्ट्रीय शिक्षा नीति,1986 के आरंभ से शिक्षा में निजीकरण का संकेत मिलने के बाद इस नीति में उच्च शिक्षा संस्थानों को बेहतर रूप से संचालित करने के लिए चन्दा इकट्ठा करना तथा इमारतों के रख-रखाव के नामपर बडे मुनाफे का लाभ और शिक्षा का व्यापारिकन कर असमानता का निर्माण करना है, गरिब अपना बच्चों को पढाये या ना पढाये हमें तो समाज मे गुलाम और अनपढ़ पैदा कर मनुवादी असमानता का निर्माण और व्यवस्था को बनाये रखने के लिये करना है.*
*शिक्षा बच्चों को आवश्यक ज्ञान द्वारा जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सुसज्जित करती है संविधान में अनुच्छेद 21 क और 45 में 6 से 14 वर्ष के बच्चे जो शिक्षा का अधीकार दिया गया है परंतु आज शिक्षा जो ग्रहण नहीं कर सकते वे केवल निर्धन परिवारों से ही हो सकते हैं अन्यथा कौन समर्थ परिवार अपने बच्चों को शिक्षा नहीं देना चाहेगा? राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उदय 1986 से आरंभ हुआ जहाँ शिक्षा में निजीकरण के प्रवेश से उच्च शिक्षा संस्थानों को बेहतर रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी प्रदान करना है. अगर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का निचा स्तर 2017-18 में जीडीपी की मात्र 2.7 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च हुआ जबकि शिक्षा का स्तर ऊपर उठाने हेतू सबसे पहले सरकारने शिक्षा के प्रति अपना नज़रिया बदलना चाहिए जिसमें शिक्षा पर नियोजित बजट बनाना चाहिए जबकि 2017-18 में जीडीपी का मात्र 2.7 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च हुआ.*
*1986 के पहले सरकारी स्कूलो मे पढा समाज का वर्ग जो आजके समाज का प्रतीनुधीत्व कर रहा है जिसमे राष्ट्रपती, प्रधानमंत्री, वैज्ञानिक, साहीत्यीक पैदा हूऐ जो समाजका आदर्श बने यह वास्तव क्या है? श्रीश्री रवीशंकर कहते है के मावोवादी ईलाके के संदर्भित मे कहा है. जहा मावोवादका प्रभाव रहा होगा वहा के लोग आज भी वह इलाका उस समाज का संचालन प्रर्याप्त संतोषजनक तरीके से कर रहे है तो क्या रवीशंकर की, नैतिकता अपने ज्ञान के कसौटी पर इस तरह से दिवालीया और बेकार साबित होती है ऐसा गैरजींम्मेदाना वक्तव्य कर मनोवैज्ञानिक तरीके से बच्चो को नक्षलवादी बताकर हमारे बच्चों का समाजका, उन शिक्षको का शिक्षा विभागका अपमान किया है और इस बात की पुष्टि करने के लिये या निषेध के लिये कोई समाज का प्रतीनीधी राजनीतिक प्रतीनीधी या विचारव्यक्ता इन सभी मे धिक्कार करने की सच बोलने की क्षमता क्षीण हो गई है.शिक्षकों का नैतिक कर्तव्य होना चाहिए था की इस ढोंगी का धिक्कार कर गौरजींम्मेदारी के वक्तव्य पर समाज के समक्ष ऐसे पाखंडी को नंगा करे आज हमारे शिक्षा का स्तर बेहद चिंताजनक है गाव देहांतो झुग्गी झोपडीयो मे शिक्षा का स्तर और भी गंभीर है क्या गाव देहातो या झुग्गी मे रहने वाला विद्यार्थी UPSC, IIT, JNU के विद्यार्थियोंके स्तर तक उनसे प्रतीयोगीता कर पायेगा? वहाँ कैसे इन्हें लेजाये यह नियोजन न कर हम शिक्षा स्तर का और कैसे पतन होगा यह सोच विकसित कर रहै है*
*रवीशंकर कुछ निजी स्कूल चालाते है वे कहते है के सारे स्कूल और कॉलेजेस को privatised कर किसी संस्था को हस्तांतरित करना चाहिए आज शिक्षा का व्यापारीकरन हो गया है प्राइवेट स्कूलों की स्थिति सरकारी स्कूलों से भी खराब हैं और उनका मुख्य लक्ष शिक्षा न होकर ज्यादा मुनाफा कमाना है आज निजी स्कूलों ने अपनी फीस में लगभग 150 फीसदी बढ़ोतरी हुई है वास्तवीकता यह है की भारत के 66% फीसदी प्राथमिक विद्यालय के छात्र सरकारी स्कूल या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पडते हैं*
*प्रो- प्राइवेट स्कूल नीति के कारण सरकार, सरकारी स्कूलों को बंद करना चाहती है जिसमे 28,847 से अधीक सरकारी स्कूलों को बंद कर राज्य सरकार इस अंतिम निर्णय पर आयी है जिसमे:*
1)महाराष्ट्र में 1,314 मराठी स्कूल बंद करने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया है.
2)पंजाब सरकार ने 800 सरकारी प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किए हैं.
3)राजस्थान मे 15294 सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए.
4)उत्तराखंड सरकार 2724 स्कूलों को बंद करेगी.
5)मध्य प्रदेश 46000 हजार स्कूले बंद होगी.
*स्कूल बंद कर निजी संस्था को बडे मुनाफे के लिये दिया जाना तय है अगर सरकारी स्कुल बंद हो जाएँगे तो गरीब परिवार के बच्चे कहाँ पढ़ेंगे? जो पैसों का बंदोबस्त नही कर पायेंगेतो वह क्या करेंगे इस प्रश्न का उत्तर श्रीश्री रवीशंकर के साथ सरकार भी नहीं देना चाहती है क्यो के देश मे गुलामो की कमी को दुर करने के लिये इस निती के तहत हमारे बच्चों का मनोबल गिराकर बोकारी निर्माण कर नियोजित अनपढ़ समाज का निर्माण करना चाहते है ताकी कोई व्यवस्था के खिलाप बोले नही,परंतु सरकार की जिम्मेदारी है जहाँ संविधान की अनुच्छेद 21 क और 45 में शिक्षा हेतु विशेष महत्व दिया गया है बच्चों को शिक्षा प्रदान करने हेत सरकार द्वारा योग्य बजेट का प्रावधान कर शिक्षा के स्तर को उच्चतम कोटि का बनाकर राष्ट्र निर्माण का नियोजन करना जरुरी है.*
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