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Showing posts from 2020

आपल्या मुला मुलींची सुरक्षा! लैंगिक शोषण; पालकांची व समाजची जबाबदारी...!

आपल्या  मुला मुलींची सुरक्षा! लैंगिक शोषण; पालकांची व समाजची जबाबदारी...! *14 नोव्हेबर बाल दिना निमीत्य!* 🔥🔥🔥🔥🔥           *जनहितार्थ....* Watch & Understand video:- 👇👇👇 https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2412514719008617&id=1552199775040120&ref=dbl&_ft_=mf_story_key. 👇👇👇 https://m.youtube.com/watch?v=...

राष्ट्रीयविधी सेवा दिवस

 राष्ट्रीयविधी सेवा दिना निमीत्य, कायदे विषयक जनजागृती सप्ताह (९ नव्हेंबर ते १६ नव्हेबर) ⚖⚖⚖⚖ न्याय सर्वा करीता; जनहितार्थ...       *समाजातील प्रत्येक घटकाला आर्थिक बाबी मुळे न्याय मिळण्यास अडचन निर्माण होऊ नये या करीता भारतीय राज्यघटनेच्या अनुच्छेद 39- A मध्ये सर्वांना न्याय मिळावा आणि समाजातील गरीब व दुर्बल घटकांना मोफत कायदेवीशयक मदतीची तरतूद करण्यात आली आहे. संविधानाच्या अनुच्छेद 14 आणि 22 (1) अन्वये सर्वांना समान संधी मिळण्याची खात्री जी राज्याची जबाबदारी आहे. समतेच्या आधारावर समाजातील दुर्बल घटकांना सक्षम कायदेशीर सेवा प्रदान करणे करीता राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) National Legal Services Authority चे गठन विधिसेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 चे अंतर्गत  केली गेली आहे जेणेकरून समाजातील दुर्बल घटकांना मोफत कायदेशीर सेवा पुरवली जाईल आणि वाद विवादात  शांततेने तोडगा काढण्यासाठी लोक अदालत आयोजित करण्यात येतील.*  *(NALSA) नवी दिल्ली येथे आहे; राज्य कायदे विषयक सेवा प्राधिकरणाचे धोरण (NALSA) च्या निर्देशांना प्रभावीपणे अंमलबजावणी करण्यासाठी आणि लोक...

Fake Mahatma

Fake Mahatma (Gandhi )support for varna system and opposed to cast system which is political and social pretend to misguided to the India. Fake Mahatma support natural law in natural system is their micro  cast and varna system in India? He said that Varna system is created by occupation but Indian fact is it's created by religious texts which is based upon cases system ,Religious text book Shudrakamlakar , Jativivek and  Samurai puran  support and how  cast created. Sir Rameshchandra Dutta's Hindustan prachin Itihas stated that Brahmin mother and Shudra father create Chandal cast and Brahmin father and Shudra mother create Nishad cast which is still in India.If fake Mahatma believe in varna and opposed cast this kind of thought law of  nature? Varna and cast system discrimination in society this kind of thought is still dangerous to the social development.

राजा धार्मिक हो तो ऊसकी प्रजाभी धार्मिक होती है

राजा धार्मिक हो तो ऊसकी प्रजाभी धार्मिक होती है 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨      राज्य में राजा और ऊसकी प्रजा धार्मिक होना मतलब अनाचार, दुराचार,हत्या,पाप,व्यभिचार करकर गंगा स्नान या चारों धाम तिर्थयात्रा कर पापों से मुक्ति होना मतलब धार्मिक होना नहीं होता। इसके विपरीत धार्मिक जिवन होता है जो सदाचार और नैतिकता से परीपूर्ण होता है। "जैसा राजा वैसी प्रजा" यह आमतौर पर समान्य कहावत है लेकिन जनतंत्र मे जिस तरह प्रजा होती है, जिस स्वभाव गुणों की होती हैं वह अपने जैसाही प्रतिनिधि भी चुनती है।  राजा जिस सिद्धांत को मानने वाला होता है वैसे उसकी प्रजाभी अनुकरण करती है।      राजा जब धार्मिक होता है तब उसके प्रधान तथा कर्मचारी धार्मिक रहते है तब बुद्धिजीवी और गृहस्थ यहभी धार्मिक होते है। जब बुद्धिजीवी और गृहस्थ धार्मिक होते है तब देशकी राज्यकि जनता भी धार्मिक होती है। जबतक राजा धर्मशील नाही होता तब तक उनके प्रधान और कर्मचारी धर्मशील हो नहीं सकते प्रधान और कर्मचारी अधार्मिक हो तो बुद्धिजीवी और गृहस्थभी अधार्मिक होते हैं।बुद्धिजीवी और गृहस्थ अधार्मिक रहे तो नगरवासी और ग्रामवास...

सिध्दार्थ गौतम द्वारा शांती समझौता मतलब आज कि मध्यस्थता (Mediation)

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सिध्दार्थ गौतम द्वारा शांती समझौता मतलब आज कि मध्यस्थता (Mediation)      विवाद मे समझौता,मध्यस्तता के माध्यम से होता रहा है जो पंचायत,बिरादरी,परिवार के मुखिया या बुजुर्गो के माध्यम से सदीयों से समस्या पर समझौता किया जाता रहा है दो हजार पांचसौ साल पूर्व सिध्दार्थ गौतम द्वारा विवाद पर समझौता के द्वारा समस्या सुलझाना यह मध्यस्थता का मुलाधार है।वर्तमान मे संविधानिक और कानूनी तौर पर न्याय व्यवस्था मे बडे प्रभावी रूप से मध्यस्थता (Mediation)सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया जा रहा है। मध्यस्थी याने (Mediation)जो न्यायव्यवस्था, न्यायदान मे इस विकल्प के माध्यम से(CPC) Civic Procedure Code धारा 89 के तहथ विवाद को व्यक्ति की इच्छा से कार्यपद्धति की प्रक्रिया का अवलंब कर आपस मे समझौता करने के लिये तटस्थ व्यक्ति के सहभाग से विवादीय पक्षकारों को एकजगह लाकर उनमे संमति के माध्यम से समझोता करने को मध्यस्थता काहा जाता है। मध्यस्थता (Mediation)मे जो तटस्थ व्यक्ती को Mediator कहा जाता है यह व्यक्ति प्रशिक्षत एवं तज्ञ व्यक्ती होते हैं जिनमें न्यायमूर्ती, न्यायाधीश, निवृत्त न्यायाधीश, ...

त्याग समर्पण व बलिदान हेच नेतृत्व निर्माण करतात.

त्याग समर्पण व बलिदान हेच नेतृत्व निर्माण करतात.      सामाजिक कार्याचे नेतृत्व करत असतांनी कार्यकर्ता,अनुयायी व संघटनेत सुक्ष मतभेद निर्माण होत असतात ते वेळेत दुर सारल्या गेले नाही तर मतभेदाचे पर्यावसान मनभेदात होत ज्यामुळे आपसात गट तट व दरी निर्माण होऊन आंदोलनाची अपरीमीत हाणी होत असते. मतभेद,मनभेद व गैरसमज दूर सारणे करीता सामाजिक उत्थाना; चळवळ व आंदोलना करीता सकारात्मक संवाद साधने गरजेचे असते प्रसंगी दोन पवल मागे येणे गरजेचे असते दोन पावले मागे येणे म्हणजे अपमान होने,लहानपण घेणे असा होत नसुन ते वैचारीक प्रगल्भतेचे सकारात्मक लक्षण असते.ज्याचा फायदा व्यक्तीला नव्हे तर आंदोलनाला होत असतो.         "विहार तिथे अभ्यासिका" आंदोलनाचे अनुशंगाने वस्ती, गाव,शहरातील विहारात काही वैयक्तिक,राजकीय,समाजीक, नेतृत्व निर्माण करणाऱे संघर्ष या कारणांमुळे समाजात संघर्ष,मतभेद,गैरसमज निर्माण होत असतात आणि अशा समस्या सोडवण्यासाठी व समाजात समन्वय निर्माण होण्यासाठी राष्ट्रपिता ज्यातिबा फुले अभ्यासिकेचे कोआर्डीनेटर यांच्यात समन्वयकाची भूमिका पार पाडतांना बहुतांश ठिकाणी सकारात्म...

दुष्ट न्यायी सज्जनऔर सर्वोत्तम पुरुष के बारे में तथागत बुद्ध और मनोवैज्ञानिक एरीक एरीसन्स के विचार

दुष्ट न्यायी सज्जनऔर सर्वोत्तम पुरुष के बारे में तथागत बुद्ध और मनोवैज्ञानिक एरीक एरीसन्स के विचार 🌻🌻🦋🌻🌻        समाजिक तथा व्यक्तीगत जिवन में विविध प्रवृत्ती के व्यक्तीत्व दिखाई देते हैं जो व्यक्तीगत गुण वैशिष्ट्य द्वारा समाज में अक्सर दिखाई देते हैं जो योग्य अयोग्य,स्वार्थी निस्वार्थी,दुष्ट न्यायी,सज्जन और सर्वोत्तम पुरुष को पहचानने वाले लक्षन दिखाई देते हैं। तथागत बुद्ध ने पहली बार इन्सान के मन में उत्पन्न होने वाले विकार तथा मन पर कार्यरत करने के उपरान्त दोनों परिस्थिति में व्यक्ती विशेष के गुण दोष दिखाई देते हैं इसी मानसिक गुणों की बात विश्व के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक एरीक एरीसन्स बुद्ध की बुनियादी शिक्षा अपने सिद्धांत में वर्णित करते हैं।    मनोवैज्ञानिक एरीक एरीसन्स ने संघटन तथा व्यक्तिनिष्ठा पर जागतिक सर्वेक्षण से अपना मत प्रर्दशित किया है। समाज का नेतृत्व करने के लिए सदाचरण,स्वार्थत्याग और समाजनिष्ठा इनकी विद्वत्तासे अधिक जरुरत होती है क्योंकि समाज में कोई भी सत्कार्या से प्रवृत्त होणा यह शुद्ध मन का गुणधर्म होता है इस सर्वेक्षण से ऐसा दिखाई दिया...

NPS/DCPS पुरानी पेंशन कानून बने!

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कर्मचारी चुनेंगे वहीं सरकार, जो कर्मचारियों को करेगें पुरानी पेंशन बहाल..!!!      यह बात ४ अगस्त २०१८ को सोशल मीडिया facebook के माध्यम से आप सभी के आगे रखी थी आज अगर कुछ राज्यों की सरकारे NPS पुरानी पेंशन देने का फौसला ले सकती है तो केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार को भी (NPS/DCPS) आंदोलन का परिणाम दिखाकर व्यवस्था में परिवर्तन करने का संकल्प कर, चाहे परीनाम जो भी हो "जो पुरानी पेंशन लागानेकी बात करेगा वह देशपे राज करेगा", सरकार बनाने मे देश के कर्मचारीयों की भूमीका दिखाना बहुत जरूरी है।         भारत का संविधान और कानूनी व्यवस्था नैसर्गिक न्याय इस महत्वपूर्ण तत्वाधान को मानता है जहाँ कर्मचारी उम्र के ५८ वर्षो तक सेवा देने के बाद बुडापे की लाठी मानें पेंशन होती है। राज्य सभा में कहा गया, कि सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेन्शन देना सम्भव नहीं हैं क्योंकि इससे सरकार पर वित्तीय बोझ बहुत बढ़ जायेगा. कर्मचारियों की इस समस्या को समाज का कुछ घटक गंभीरता से ले रहा है जिसमे कुछ मंत्री महोदय यह प्रश्न संसद,विधानसभा मे रख रहे है कुछ माननीय मंत्री महोदय, अग...

दृढ़संकल्प विस्तृत है।

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दृढ़संकल्प विस्तृत है।       समाज में बहुसंख्यक लोग सुनी-सुनाई बातों पर आंखें मूंदकर  विश्वास करने वाले ज्यादातर लोग मौजूद है। इसके विपरीत खुली आंखों से उस विषय की वास्तविक जानकारी तथा कारण की वजह जानने वाले थोड़े लोगों होते हैं। ऐसे बहुसंख्य लोग आपना अलग विश्र्व का निर्माण करते हैं जो एक पुश्तों से रुढ़ी परंपरा एवं संस्कारों की बैसाखी लेकर बड़े होते-होते बुढ़ापे में जाकर मर जाते हैं।   ऐसे लोगों को अपने जीवन में काल्पनिक, मरीचिका एवं आभासी  माणसीकता की आदत पड़ने से उन्हें काल्पनिक व मित्था बातों ज्यादा समर्पक और अच्छी लगती हैं। विषय और उसकी कारणों की वजह जानने की जरूरत महसूस नहीं होती। रेगिस्तान के मरीचिका को पानी समझना,पाणी भरे काचके ग्लास में डाली गई लकड़ी का तिरछा दिखाई देना परंतु सत्य मात्र कुछ और होता है ऐसे लोगों का आभासी जग इस तरह का विश्व  होता है और अन्य लोगों भी अपने इस राह पर चले ऐसा उन्हें अपेक्षित होता है।      वर्तमान में इस तरह के बहुसंख्य लोग दिखाई देते हैं जो समाज को नकारात्मक पथ से मार्ग क्रमन क...

मनोग्रह विस्तीर्ण आहे.

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मनोग्रह विस्तीर्ण आहे. ‼️🎼🎼🎼‼️ सामाजात ऐकीव गोष्टींवर आंधळे पणाने प्रेम करणारे बहुसंख्य आहेत या विपरीत डोळसपणे व विषयाची कारणमीमांसा करणारे बोटावर मोजता येईल इतके आहे असे बहुसंख्य लोक आपलं वेगळं विश्र्व निर्माण करत असतात हे पिढीजात व रुढी व संस्काराच्या कुबड्या घेऊन मोठेच नव्हे तर म्हतारे होऊन गतप्राण देखील होतं असतात. अशा लोकांना आपल्या जीवनात आभासी,काल्पनिक व मृगजळीय माणसीकतेची सवय जडल्याने त्यांना काल्पनिक व मित्था गोष्टी जास्त समर्पक व चांगल्या वाटत असतात विषय आणि त्याची कारणमीमांसा करणे गरजेचे वाटत नसते वाळवंटातील मृगजळाला पाणी समजणे, पाणी भरलेल्या काचेच्या पेल्यात टाकलेली काळी वाळकी दिसणे परंतु सत्य मात्र वेगळंच असते अशा लोकांचं आभासी जग हेच विश्व असते आणि इतरांनीही याच चाकोरीबद्ध वाटेवर जावं असं त्यांना अपेक्षित असते.      वर्तमानात अशा वर्तनाची लोक बहुसंख्य अनुभवायास येतात जी समाजाला नकारात्मक वाटेवरुन नेत असतात यांना खरं,खोटं,बर वाईट हे महत्त्वपूर्ण नसते तर विशीष्ट व्यक्ती व समुदाय महत्त्वाचा असतो जनकल्याण हे नाममात्र असते म्हणजेच व्यक्ती व समुदाया...

गटबाजी हीच हिन व निच मानसिकता

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गटबाजी हीच हिन व निच मानसिकता..!!! ••••••••••••••••••••••• संगठन असाव कुटुंबा सारखे, ग्रुप,ग्रृप करुन गटबाजी नसावी,मतलबी व स्वार्थी पनाची कृती नसावी... कृती असावी प्रेमळ आणि जिवाभावाची..... बा भिमा​ तुझ्या पाखरांना​ पंख किती ते फुटले​... घरटे तुझे ते सोडुन​ दुसर्‍या फांदीवर जाऊन बसले... •••••••••••••••••••••••         वैयक्तिक कार्य करणे यासारखा मूर्खपणा नाही. तुंम्हाला एक महत्त्वाची गोष्ट सांगायची आहे. संघ फोडून तुटकपणाने दोघाचौघांनी दुसऱ्या संघात सामिल होने म्हणजे आत्मनाश करणे होय. तुम्हाला माहित आहे कि आपण कळपाने राहिले पाहिजे. आपले घर मोडून दुसऱ्याच्या हवेलीत शिरणे म्हणजे मोठा मूर्ख पणा आहे. आपली झोपडी शाबूत राखा. डॉ. बी. आर. आंबेडकर. (डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर लेखन आणि भाषणे, खंड-18 भाग-03 पान नं.138)        आपल्या वैयक्तिक जीवनाचा विकास व्हावा पन तो एकमेकांच्या गच्चीवर पाय ठेऊन नव्हे माझीच प्रगती व्हावी मी लायक अन्य नालायक समाजिक जीवनात सर्वांच्या कल्यानाची भावना ठेवनारे नव्हे त्यांच्या प्रगती करीता मदत करनारे सामाजिक दृष्ट्या लायक ह...

परीणामकारक निशुल्क सामाजिक उपक्रम...

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परीणामकारक निशुल्क सामाजिक उपक्रम... •••••••••••••••••• 🌧RJPA🌧  🐘 🐃 🐎 🐆 ☸☸☸☸☸ सामाजिक कार्य, समाज सुधार व  विचारधारा असा वारसा फुले,शाहु, आंबेडकरांनी समाजाला दिला, समाजात केवळ ठरावीकच व मोजकेच लोक समाजीक जाणीवेची, जाणीव ठेवून कार्य करीत असतात. मागील कित्येक वर्षात सामाजिक दाईत्वाची जबाबदारी समाजातील मोजकेच जाणकार कार्यकर्ते आणि अनुयायी यांनी वाहीली अशा सर्व महानुभावांचे खुप खुप आभार. समाजात मोठ मोठे प्रशासकीय अधीकारी,कर्मचारी घडले यात समाजाला दिशा देणारे ,कार्य करणारे मोजकेच! मात्र आज वर्तमान परीस्तीत समाजातील सामाजिक जबाबदारी चे निर्वाहण करणारे, सामाजिक दृष्टिकोणाची जाणीव ठेऊन राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका (RJPA) परीवाराच्या च्या माध्यमातून समाजात,ग्रामीण भाग,स्लम वस्ती गरजुवंतां पर्यंत प्रत्यक्ष जाऊन निरपेक्ष पणे काम करणारे प्रशासकीय अधीकारी कर्मचारी. समाजाला मोठे योगदान देत आहेत. प्रशासकीय अधीकारी कर्मचारी जर आपल्या अती व्यस्त कामकाजातुन समाजाला वेळ देऊ शकतात तर मग समाजातील अन्य संपन्न वर्ग समाजा करीता आपले योगदान सुद्धा निश्चितच देऊ शकतो...

संकल्प व परिणाम

🇸🇨🇸🇨🇸🇨🇸🇨🇸🇨 *घ्या संकल्प व तपासा परिणाम* 🇸🇨🇸🇨🇸🇨🇸🇨🇸🇨 *येना-या प्रत्येक कार्यक्रमाचे अनुशंघाने DP बदलवून WhatsApp & Facebook वर मोठ्या प्रमाणात मँसेजचा भडीमार करुन आपल्या चळवळीला परीणाम मिलतील?प्रत्यक्ष कार्य सुद्धा करावे लागेल.* *तर घ्या संकल्प कार्य करन्याचा व केलेल्या कार्याचा परीणाम मोजन्याचा, तपासा आपले कार्य!* *६ डिसेंबर ला घेतलेल्या संकल्पाचा परीणाम १ जानेवारी भिमाकोरेगाव शैर्य दिवसाला तपासा* *१ जानेवारी भिमाकोरेगाव शैर्य दिवसाला घेतलेल्या संकल्पाचा परीणाम ३ जानेवारी सावीत्रीआई जयंती ला तपासा* *३ जानेवारी सावीत्रीआई जयंती ला घेतलेल्या संकल्पाचा परीणाम १९ व २३ फेब्रृवारी छत्रपति शिवराय व गाडगे बाब जयंती ला तपासा* *छत्रपति शिवराय व गाडगे बाब जयंती ला घेतलेल्या संकल्पाचा परीणाम १० मार्च सावीत्रीआई स्मृति दिवसाला तपासा* *हे निरंतर वर्षभर फिरनारे धम्म चक्र , महापुरुषांचे स्मृति दिवस व जयंती निमीत्य निरंतर गतीमान करत चला व परिणाम ,निकाल तपासत चला कारण कार्यकारणभाव* *आम्ही हजारो लाखो ₹ खर्चुन केवळ कार्यक्रम करीत असु प्रत्यक्ष जमिनीवर, समाजात जाऊन कार्य करीत नसु तर ...

समाजाला मदत करावी

☸☸☸☸☸ *समाजाला मदत करावी* *PAYBACK TO SOCIETY* ☸☸☸☸☸ *समाज जेव्हा समस्येच्या, विपदेच्या बिकट परीस्थीती मधुन जात असतो तेव्हा समाजाला दिशा देना-या वर्गाकडून आदर्श व सम्यक मदत व दिशानिर्देशन होने गरजेचे आहे चळवळीचे कार्य कुनामुळे थांबत नाही परंतु समाजातील समाजाच्या सुशीक्षीत प्रतीनीधी यांनी आपली जबाबदारी ओळखली तर त्या धम्मचक्राला गतीमान करन्यास मदत होईल.* *बोधीसत्व जसे समाज जेव्हा समस्येत वा विपदेत आला असेल अशा समयी  समस्येला सोडवने मार्ग काढने करीता खवळलेल्या समुद्रात समाजाची फसलेली नाव व्यवस्थीत पैलतीरावर नेन्याच कार्य करीत असतो तसेच बोधीसत्वा प्रमाने समाजातील अधीकारी,कर्मचारी, वकील, इंजीनियर, डॉक्टर, व्यापारी या सर्वांनी होईल ती मदत समाजाच्या हिता करीता समाजात COMBINATION व नियोजन PLANNING होने करीता निरंतर कार्यरत असने, सक्षमतेने जबाबदारी स्वीकारने नितांत गरचेचे आहे म्हनुनच डॉ.बाबासाहेबांनी म्हटल आहे की समाजात 30 वकील, 20 इंजीनियर, 10 डॉक्टर ते प्रमाणीक अनुयायी असावीत आज लाखो आहेत, म्हणुन वरील सर्व सुशीक्षीत समाज प्रतीनीधी अनुयायी यांना विनंती की यांनी समाजाला सर्व प्रकारची मदत कर...

ईमानदारी की किमत

क्या विडंबना है ईमानदारी की किमत भी कुछ लोगो को अपनी जान गवाकर चुकानी पडती है और हमारा जमीर लगबघ खत्म होने मे है हमारे नैतिक मूल्यो का भी -हास होता नजर आ रहा है चाहे कितना भी अन्याय अत्याचार होता रहे हमे इससे क्या लेना? हमसे तो कहीं गुना नैतिक USA  अमेरिका की महीलाये है जिन्होंने अपने देश की सामान्य महीला प्रोफेसर क्रिस्टीना फोर्ड के समर्थन मे सारा देश उतरा.    प्रोफेसर क्रिस्टीना फोर्ड द्वारा USA सुप्रीम कोर्ट मे नियुक्त होने वाले जज ब्रेट कॉवनॉघ पर बलात्कार का इल्जाम लगाती है लगाये गये इल्जाम के खिलाफ सारे अमेरिका की अधीकतर महीलाये विरोध प्रदर्शित करती है. महीलाओ द्वारा विरोध करना मतलब देश के प्रती अनैतिक चारीत्र के इन्सान को विरोध करना था.     जहा हमारे यहा जज का संदीग्धता मे निधन होना जिसकी पार्श्वभूमी नितीश कटारा का मारा जाना IPS वंजारा द्वारा मो.सोराबुद्दीन को सुपारी देना, मंत्री अमीत शाह का जेल जाना बाद मे सत्ता मे आना और बहुत सारे लोगो को रास्ते से हटना मानो इन्सान की किमत किडे मकोडो से भी शुन्य हो यह सब होने के बावजूद हमारी जनता अत्याचार के खिलाफ खामोशी...

संघटन व असहकार

विभक्त होऊण काय साध्य करतो? संघटनेत करीता खरे कार्य? व संघटनेत नाराजी म्हणजे अहंकार दुखणणे...!         संघटन चिंतण व परीक्षण.... ••••••••••••••••••••••••••••• कोणत्याही संघटनेत सदस्य, खालील गोष्टीमुळे नाराज असतात. १)संवैधानिक व कायदेशीर पद्धतीने कामकाजाची मागणी करणा-याचा विरोध करणे २)कामकाजाचा लेखाजोका मागीतला असता विरोधक समजणे. ३)हिशेब वा जमा खर्च विचारणा केली असता विरोधक समजणे ४) असामाजिक गोष्ठी ज्या संघठनेला बाधक गोष्ठी निदर्शणास आणले असता त्या व्यक्ति चा व्यक्तिगत विरोध करणे ५) कार्यक्रम पत्रिकेमध्ये नाव नसणे ६) आयोजन व नियोजन समितीमध्ये सहभागी न करणे व निमंत्रण न देणे ७) स्टेजवर बसायला न देणे ९) भाषण/बोलायला संधी न देणे १०)आभार न माणने व महत्व न देणे ११)हारतुरे व सत्कारात सहभागी न करणे १२)पत्रीका, लेटरहेड, पॉप्लेट वर नाव नसणे इच्छित मान न देणे १४)मीटिंग करिता न बोलविणे *वरील सर्व गोष्टीमुळे संघटन मधील सदस्य व पदाधिकारी यांचा अहंकार दुखावतो, आणि नाराज होऊण स्वतःच्या स्वर्था पोटी संघटन चे वाटोळे केल्या जाते ज्या मुळे सामाजिक हिताचे कार्य बाजुला राहुण समाजाच नुकसान...

कष्टकरी कार्यकर्त्यावरही चर्चा व्हावी!

मेहनती व कष्टकरी कार्यकर्त्यावरही चर्चा व्हावी! ••••••••••••••••••••••••••• कार्यक्रमा च्या पूर्वतयारी करीता व कार्यक्रमा नंतर विलेवाट करीता सतत ढोरकष्ट लेबर वर्क करणा-यांचे हार्दिक अभीनंदन तुमची चर्चा करण्या ऐवजी आम्ही पद प्रतीष्ठेत अहंकार यात अडकलो आहोत, लेबर वर्क करणारे घरचे लखपती असुनही आंदोलनाची जबाबदारी म्हणुन नियोजित कार्य पार पाडनारे लोक होत ही मंडळ अधीकारी व कार्यकर्ते मागील विस वर्षा पासुन चळवळीला मोठ करण्या करीता अहोरात्र पद, पैसा, प्रतिष्ठा, अहंकार, मान सन्मान, पद, वर्दी घरच्या गोदरेज कपाटात कुलुप बंद करुन चाबी घरी ठेवुन, ऐक सामान्य कार्यकर्ता म्हणुन सामाजिक कार्य करण्या करीता बाहेर पडत असतात; कदाचीत हा त्यांचा मूर्खपणा असावा! आणि हा मूर्खपणा मागील दहा वर्षापासून काही लोक जाणीवपूर्वक करत आहेत म्हणुन चळवळ व आंदोलन मोठ होत आहे. सर्व जर असा दृष्टिकोण ठेवल्यावरच चळवळ यशस्वी होईल अन्यथा, विवेक पूर्ण व अवीवेकी लोक यात काहीच फरक असणार नाही. राबलेल्या व्यक्तिचे त्याग व समर्पन त्या व्यक्ति च्या जागेवरुण अनुभवने महत्वाचे असते व्यक्ति व कार्यकर्ते समाज कार्य व सेवा देत असतील तर ते फक्...

Work with out bringing ego and personal differences

Work with out bringing ego and personal differences.. वरील वाक्य आंदोलन पुर्णत्वास नेणारे आहे. या आधी काही मुमेंट मध्ये काम केले ती का बंद पडली? एकात 5 वर्ष जी प्रशासकीय अधिका-याने चालवली. दुसरी आर्थिक, कार्यकर्तानी उभारली व 1 वर्षात बंद पडली. तीसरी 6 वर्ष चालली फंड गोळा करुन खाऊण बंद पाडली चैथी काही लोकांनी समाजहितास दुय्यम स्थान देवून काही लोकां करीत कार्य केले या सर्व बंद का पडल्या??? मुमेंट, आंदोलन वर श्रद्धा व निष्ठा असणे गरजेचे आहे श्रद्धा सोडून अपेक्षा ठेऊण कार्य करणा-यांची अपेक्षा पुर्ण न झाल्यास अपेक्षाभ्रम होतो अशी व्यक्तिकेन्द्रित लोक हेतु पुरस्सर जुडलेली असतात 1) IAS, IPS, IRS व इतर अधिका-यां पासुन काहीतरी मिळेल ही अपेक्षा 2) पद, प्रतीष्ठा,डायस,माईक मिळेल अशी अपेक्षा 3) Second Bench Strength म्हणजे दुस-या फळीतील अणुयायी, कार्यकर्ते जाणीवपूर्वक निर्माण न होऊ देणे. 4)मुमेंट माझे भोवती फिरली पाहीजे. 5)टिम वर्क टाळणे व ऐकटे कार्य करण्यात व त्याचे श्रेय घेऊण मी, माझ्या मुळ मुमेंट ऊभी आहे असे भासवणे. 6)मुमेंट चे प्रचारक प्रसारक जाणीव पुर्वक निर्माण न करता स्वतः कार्य करत असल्याचे...

कार्य और नियोजन;(Results) का परीणाम है!

कार्य और नियोजन;परीणाम (Results)का आधार है! सत्ता के उद्देश्यों पूर्ती के लिये सभी को कष्ट लेने होंगे! 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨   *वर्षावास अवसर पर आयोजित कार्यक्रम दि.26/10/2019 को राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले, शेगांव रहाटगाव अमरावती अभ्यासिका मे धम्मक्रांती विषय पर यह विचार व्यक्त किये.*    *समाजिक समानता मतलब सर्वसामान्य जिवन मुल्य जो जिवन के हर क्षेत्र मे सभी को समानता से लागु हो जिसे सामाजिक लोकतंत्र कहा जाता है यह एक ऐसी जीवन शैली जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को जीवन का मूल सिद्धांत मानती हो जो सहजीवन है; लेकिन समाजिक वास्तव विपरीत है सामाजिक और आर्थिक जीवन में हम असमानता से ग्रस्त है. हर बडे क्षेत्रों मे व्यक्ति को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विवेक से निर्णय लेनेकी अनुमति नही है अनके क्षेत्र का आका हुक्म देता है वही करना होता है मतलब व्यक्तिगत और माणसिक गुलामगी मे रहना स्वतंत्रता है? समानता वह भेदभाव रहीत केवल निसर्ग प्रदान करता है वह सभीको पंच तत्व समानता से प्रदान करता है ऐसी समानता समाज मे प्रस्तापित है? बंधुत्व भ्रातृत्व भाईचारा सभी भारतीयों के बीच भाईचारे की भावना; हम ए...

आमचा हा प्रपंच

आमचा हा प्रपंच 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨 विद्यार्थी दिवस ७ नोव्हेंबर... ••••••••••••••••••• *राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका शेगाव रहाटगाव अमरावती येथे दि. 7 नव्हेबर 2019 ला सायं 6:30 वा विद्यार्थी दिवस (डॉ.बाबासाहेब यांना शाळेत प्रवेश दिवस) साजरा करण्याचे निमित्ताने. कार्यक्रमाचे ध्येय विद्यार्थीनी ज्ञान संपादन व  अभ्यासा करीता अपार कष्ट घेऊन व महत्वाकांक्षेस प्राप्त करुन आपल्या बुद्धीमत्तेच्या जोरावर समाज परीवर्तण करणारा विद्यार्थी निर्माण व्हावा; ज्याचा तर्क व विवेक हा जागृत असेल जो सत्याला सत्य व खोट्याला खोट म्हणनारा, अन्याया विरुद्ध आवाज उठवनारा, कधीही कुणाची चापलूसी,लाचारी, मर्जी वा दयेवर न जगणारा, विद्यार्थी जो स्वाभिमान जपणारा व आपले स्वातंत्र्य कितीही मोठी आदर्श व्यक्ति असली तरी तिच्या चरणात कदापीही अर्पण न करणारा म्हणजेच व्यक्तिपुजक नसनारा; तो समाजाचे ऋण फेडणारा, सामाजाचे नेतृत्व करणारा, महापुरुषांच्या विचारधारेचा प्रचार प्रसार करणारा नैतिक व शिलवान असा विद्यार्थी घडावा या करीता RJPA चा समाजा करीता हा प्रपंच....

माहापरीनिर्वाण दिवस संकल्प दिवस!!!

6 दिसंबर माहापरीनिर्वाण दिवस संकल्प दिवस!!! *विनम्र अभिवादन* 🕯🕯🕯🕯🕯 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨 🙏🙏🙏🙏🙏 *Tribute To The Father Of Modern India..!* 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨 *हम आदरांजली अर्पण करते है याने सही मायनेमे क्या करते है? दो मिनट मौन के साथ, ऑख मुदकर, सावधान रहकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते है, श्रद्धांजलि अर्पित जरूर करते है वास्तव मे दो मानीटे मे क्या करना होता है???*  *डॉ.बाबासाहब द्वारा किये गये कार्य के प्रती कृतज्ञ होकर उनके पावन स्मृति को स्मरण, उनके स्वप्न को साकार एवं पूर्ण करने का संकल्प तथा दृढ निश्चय करना मतलब समाज मे जाकर जमीनी स्तर पर कार्यकर परिणाम को हासिल करेने के प्रति प्रतीग्याबद्ध होना मतलब प्रत्येक व्यक्ति ने स्वयं स्पूर्ती से अपने कर्तव्यों के प्रती वचनबद्ध होने की प्रतीज्ञा लेना यही हमारी सही मायनेमे आदराजली होती है.*    *हम भावनाओं मे बहकर पुरजोर होकर केवल जय-जयकार करते है पेट भरने के लिये खाना परोसते है परंतु इससे भी ज्यादा उनके साहित्य का अध्ययन और अध्यापन कर समाज को जगाकर उसपर अंमल करने का संकल्प करना माने सही आदराजली होगी.* ☸ *आंदोलन की समीक...

मानवाधिकार

हमारे कर्तव्यों के साथ साथ अधीकार और मानवाधिकार का जागरण चलाना जरुरी है!!! ••••••••••••••••• आज १० दिसंबर मानवाधिकार दिवस व्यक्ति के आधिकार भारतीय संविधान मे मोजूद है व्यक्ति अपने अधिकारों की बाते पुरजोर कोशिश करता है परंतु अपने कर्तव्य के प्रति भी उतना ही जागृत होन जरुरी है. मानवाधिकार जो व्यक्ति के मुलभुत अधीकार से समंदीत है उसे जानकारी के साथ अप्रत्यक्ष रुपसे खत्म कर दिये जाते है ता की गुलामो दलालो की तादाद बनी रहे!       देश स्वतंत्र हुआ लेकीन,यहा का माहौल लडकियों महिलाओ, अनुसूचित जाती जनजाती, पीछडे, महीलाए आज तक स्वतंत्रता को महसूस कर पा रहा है? स्वतंत्र समता बंधूता का सही हस्तांतरण सत्ताधारी और पुजीपती द्वारा संचालित होनेसे बहुंख्य अपने अधिकारोको कुंठित हुआ महसूस करते है. संविधान स्वतंत्र,समता मानवाधिकारकी बात करता है तो आज वर्तमान परीस्थीती मे सरकारी सेवाओं का सार्थ उपयोग होना अपेक्षित है पर सरकार नियंत्रित जो छुपा अत्यचार है और यह अत्याचार करने वाले वे कौन है? क्या अत्याचार कर कोई चैनसे कैसे सो सकता है? यह समस्या से निजात दिलानेका एकमात्र ऊपाय केवल मात्र डॉ.बाबासह...

समीक्षा और चिकित्सा!!!

🇮🇳🇪🇺☸🇪🇺🇮🇳 वृद्धाश्रम मे वृद्धो की समस्या जानकर इस विषय का हमेशा का समाधान जरूरी है इस समस्या के साथ साथ भिखारी की संख्या मे वृद्धि? पढे लिखोंकी बेकारी,रोजगार? गरीबी,भुखमरी? अंधविश्वास?धार्मिक उन्माद? जातिवाद? धर्मों मे विवाद? भ्रष्टाचार ?और बहोत कुछ सारी समस्या को सुलझाने का मार्ग हमारे महापुरुषेंने बताया है समस्या को सुलझाने से पहले महत्वपूर्ण तत्थ समीक्षा और चिकित्सा के आधार पर सुलझाना जरूरी है. सामाजिक समस्या पर समाज के जागरूक लोगे ने विषय की समीक्षा और चिकित्सा करना जरुरी है और निडरतापूर्वक इस आधार के साथ अपनी बात समीक्षा और चिकित्सा के साथ रखनी चाहिए.* *समीक्षा:-*    *विषय व्यक्ति के अंदर की कमियों/खामियों का सामना करना मतलब समीक्षक करना होता है . उदा. 18 मार्च 1956 को आग्रा मे डॉ.बाबासहाब ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपने आंदोलन की समीक्षा की, आमतौर पर कोई इंसान बंद कमरे में भी अपनी और अपने कार्य की समीक्षा नहीं करता, क्योंकि समीक्षा करने से अपने अंदर की कमियों/खामियों का सामना करना पड़ता है. यह एक दुखद प्रक्रिया है. डॉ.बाबासाहब खुद जो आंदोलन वे चला रहे...

सामुदायिक कार्य

सामाजिक बदला करीता आपल्याला टिम वर्क ने कार्य करीत राहावे लागेल...संवैधानिक नैतिकते प्रमाणे! ●●●●●●●●● गरीबांना अन्नदान, कपडे वाटप वा दान वा वाटपयुक्त मदतीचे कार्य जरी महत्वपूर्ण असले तरी त्या व्यक्तिवर, समाजावर तशी वेळच येऊ नये, अशी सामाजिक व आर्थिक परीस्थिती निर्माण करणे म्हणजे खरे परीवर्तण होय म्हणून सर्वांना संघटन व टिम वर्क या तत्वावर कार्य करने गरजेचे आहे. प्रसंगी संघटनात्मक कार्य  झाले नाही तरी चालेल संघटन ऐकतेला तडा जानारा विचार हा विघातक आहे कमजोर दुर्बलांना सोबत घेऊन चालन्यारा विचार हा मुलभुत व महापुरुषांची विचारधारा अंमलात आणनारा आहे व तोच महत्वाचा आहे.  समाजात काही नकारात्मक प्रभावाचे व संकुचित विचारधारेचे लोक असतातच काही लवकर सहकार्य करतात, काही करत नाही काही गद्दार व धोकेबाज असतात असे सामाजिक चित्र असणारच!. आईला तिन मुल असतील तर त्यापैकी एकाने प्रगती केली नाही वा व्यसनी आहे म्हणून आई त्याला टाकून देत नाही. आम्ही समाजातील अशा प्रत्येक व्यक्तीला टाकत गेलो तर आपल्याकडे वैचारिक व सहकार्य करणारे लोकच उरनार नाही.आपल संघटन कमजोर असन्याचे कारन म्हणजे या पद्धतीची नकारात्म...

दान ही समर्थक भावना

"विहार तिथे अभ्यासिका" आंदोलनास, अधिका-यांनी धम्म दान देऊन नाशिक येथे अभ्यासिका निर्मितीचा संकल्प 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨  जर्मनी येथूनही धम्म दान 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨      नाशिक येथे अभ्यासिका सुरु करणे करीता भारतातीय अधिका-यां सोबत प्रामुख्याने जर्मनी येथूनही आयु.राजेश गावंडे सर (IFS)अधिकारी यांनी ही धम्म दान करून अभ्यासिका निर्मितीचा संकल्प अधिका-यांकडून करण्यात आला. बौद्ध संस्कृतीत दानाला फार महत्व आहे जे दुसर-यांच्या हिताकरीता आपले स्वत्व सोडण्याचे नाव दान होय, दानपारमिता जे पुन्य कर्म आहे आपल्या उत्पन्नाचा काही भाग गरीब व गरजुवंतांच्या हितार्थ लावणे म्हणजे सम्यक कृती होय. मिशन,आंदोलन, संघटन मध्ये कार्य करतांना अनुयायी कार्यकर्ते यांचा सहभाग नेहमीच असतो बहुतांश लोकं आंदोलनाला बुद्धी, वेळ व आर्थिक मदतही करत असतात, अभ्यासिकेचे वर्तमानात जे परिणामकारक कार्य दिसत आहे त्याचा पाया म्हणजे आपल्या सारखे दानदाते लोक होत.     धान्याचा एक दाना जमिनीत पुरतो. तेव्हा त्याचे झाड बनते. त्याला कणिस लागते. त्या कणसाला हजारो दाने लागतात. परंतु हे हजारो दाने निर्माण करण्यासाठी त्या...

गरजुवंतांच्या मदतीला प्राधान्य...!

महापुरुषांची विचारधारा व संस्कारराने; स्वतःची समस्या मागे ठेवत अन्य गरजुवंतांच्या मदतीला प्राधान्य...! 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨    कोरोना वैश्विक आपदा लक्षात घेता वस्ती,स्लम,झोपडपट्टी आणि गावात समाजला मदत व्हावी या करीता राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका(RJPA) व विहीर तिथे अभ्यासिकेच्या माध्यमातून महाराष्ट्रात टिम कार्यरत आहे. मदती दरम्यान आलेल्या जिवंत अनुभव आपल्या सोबत शेअर करणे गरजेचे वाटते.     आपल्या प्रत्येक जिल्ह्यात, तालुक्यात, गावांत झोपडपट्टी,वस्तीला प्रबुद्ध नगर,आंबेडकर नगर, रमाई नगर,सिद्धार्थ नगर,राहुल नगर,कबीर नगर, मा.फुले वार्ड, यशोधरा नगर असे महापचरुषांच्या नावावर नामकरण जे प्रत्येक गावात शहरात वस्त्या वसलेल्या आहेत जसे महापुरुषांच्या नावावर वसत्या आहेत तसेच संस्कार व विचारधारा सुद्धा अनुभवास मिळाली.या ठिकाणी पूर्वी राहणारे लोक आज शिकले सुशिक्षित झाले व नोकरीला लागले व आर्थिक सुबत्तता येताच वसाहती,काँलनीत वास्तव्याला गेलेत. गाडी,घर,बंगला आणंदीत संसार आरामदायक चैनीचे जिवन आहे; परंतु त्याच आपल्या वस्तीत,नगरात बहुतांश लोक आज कोरोना समस्ये मुळे प्राथमिक गरजां क...