ईमानदारी की किमत

क्या विडंबना है ईमानदारी की किमत भी कुछ लोगो को अपनी जान गवाकर चुकानी पडती है और हमारा जमीर लगबघ खत्म होने मे है हमारे नैतिक मूल्यो का भी -हास होता नजर आ रहा है चाहे कितना भी अन्याय अत्याचार होता रहे हमे इससे क्या लेना? हमसे तो कहीं गुना नैतिक USA  अमेरिका की महीलाये है जिन्होंने अपने देश की सामान्य महीला प्रोफेसर क्रिस्टीना फोर्ड के समर्थन मे सारा देश उतरा.
   प्रोफेसर क्रिस्टीना फोर्ड द्वारा USA सुप्रीम कोर्ट मे नियुक्त होने वाले जज ब्रेट कॉवनॉघ पर बलात्कार का इल्जाम लगाती है लगाये गये इल्जाम के खिलाफ सारे अमेरिका की अधीकतर महीलाये विरोध प्रदर्शित करती है.
महीलाओ द्वारा विरोध करना मतलब देश के प्रती अनैतिक चारीत्र के इन्सान को विरोध करना था.
    जहा हमारे यहा जज का संदीग्धता मे निधन होना जिसकी पार्श्वभूमी नितीश कटारा का मारा जाना IPS वंजारा द्वारा मो.सोराबुद्दीन को सुपारी देना, मंत्री अमीत शाह का जेल जाना बाद मे सत्ता मे आना और बहुत सारे लोगो को रास्ते से हटना मानो इन्सान की किमत किडे मकोडो से भी शुन्य हो यह सब होने के बावजूद हमारी जनता अत्याचार के खिलाफ खामोशी? यहा तो बहूतोको गुलामी चापलूसी दलाली का लकवा मार चुका है क्यो की नैतिक योग्यता आने मे निडरता पैदा होने के लिये मुलत: स्वाभिमान की जरुरत होती है जो हममेसे बहूतायत मे अभी आना बाकी है!

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