NPS/DCPS पुरानी पेंशन कानून बने!

कर्मचारी चुनेंगे वहीं सरकार, जो कर्मचारियों को करेगें पुरानी पेंशन बहाल..!!!
     यह बात ४ अगस्त २०१८ को सोशल मीडिया facebook के माध्यम से आप सभी के आगे रखी थी आज अगर कुछ राज्यों की सरकारे NPS पुरानी पेंशन देने का फौसला ले सकती है तो केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार को भी (NPS/DCPS) आंदोलन का परिणाम दिखाकर व्यवस्था में परिवर्तन करने का संकल्प कर, चाहे परीनाम जो भी हो "जो पुरानी पेंशन लागानेकी बात करेगा वह देशपे राज करेगा", सरकार बनाने मे देश के कर्मचारीयों की भूमीका दिखाना बहुत जरूरी है।
        भारत का संविधान और कानूनी व्यवस्था नैसर्गिक न्याय इस महत्वपूर्ण तत्वाधान को मानता है जहाँ कर्मचारी उम्र के ५८ वर्षो तक सेवा देने के बाद बुडापे की लाठी मानें पेंशन होती है। राज्य सभा में कहा गया, कि सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेन्शन देना सम्भव नहीं हैं क्योंकि इससे सरकार पर वित्तीय बोझ बहुत बढ़ जायेगा. कर्मचारियों की इस समस्या को समाज का कुछ घटक गंभीरता से ले रहा है जिसमे कुछ मंत्री महोदय यह प्रश्न संसद,विधानसभा मे रख रहे है कुछ माननीय मंत्री महोदय, अगर संसदीय कामकाज के दोरान कर्मचारीयोंको पूरानी पेंशन मीलने संदर्भ मे बात रख सकते है तो हम सभी कर्मचारी किसी न किसी लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र से समंद रखते है हमारे क्षेत्र के जन प्रतीनीधी को संसद तथा विधान सभा अथवा विधान परीषद मे बात रखने के लिये निवेदन करे बीनती करे अगर हमारे जन प्रतीनीधी यह करने से मना करते है, इन्कार करते है, नजरंदाज करते है तो कोई बात नही आनेवाले समय मे जो चुनाव होने वाले है हम सभी लोगों की जिम्मेदारी है की देश के सभी कर्मचारी वह सरकार चुनेंगे जो लाखो कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली की बात करेगे।
   कानून बनाना यह संसद का संविधानीक अधीकार है:- २००४-२००५ मे जो कानून बना वह कर्मचारीयो के संसार, घर परीवार की तबाही का कानून लाया गया यह समस्या हल होने योग्य है अगर मा.मंत्री महोदय तीन तीन जगह से पेन्शन ले सकते हैं मा.न्यायाधीश महोदय को भी पेंशन मिल सकती है, हा यह संविधान के दायरे की बात है मगर सारी जिंदगी कर्मचारी अपनी सेवा देने के बाद आज जहा बुढापे मे बच्चे मॉ बाप का आधार बनने के एवज मे अपना जिवन खुद बिना परवाह कियै मौज मे जिते है ऐसे मे अगर कर्मचारियों के पास पेंशन न हो तो आनेवाले समय मे सेवानिवृत्ती के बाद पेंशन न होने पर बुढे कर्मचारियों को आत्महत्या करने के अलावा और कोई पर्याप्त पर्याय न होगा इसी लिये आज समय है जहाँ बारह  सालों के बाद भी सरकार पर ज्यु तक रेग नही रहीं है बेहतर है के आनेवाले समय मे,"जो हमारी बात करेगा वह देश पर राज करेगा" हम कर्मचारी वही सरकार चुनेंगे जो कर्मचारियों को पुरानी पेंशन की बहाली करेगे याद रहे बारह बरस बित चूके है इस बार पुरानी पेंशन का कानून बनाना ही होगा।

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