परिवर्तन का कार्य चलता रहे


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    राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका के कोआर्डिनेट तुम लोगों विद्यार्थी से कोआर्डिनेट का जो सफर को अनुभव किया है वह वास्तव में अनुशासन नैतिकता और आचरण का सफर था। अभी तुम लोगों पर समाज की वास्तविक जिम्मेदारी आ गई है। तुम वो शक्ति हो, जो RJPA तथा समाज के सपनों को सच कर सकते है। फुले, शाहू और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर इन महापुरुषों का कारवां ने जो मशाल जलाई, उसे अब तुम्हें थामना है। ये मशाल सिर्फ रोशनी नहीं, बल्कि बदलाव की आग है।तुम्हारे कंधों पर न सिर्फ इतिहास की जिम्मेदारी है, बल्कि भविष्य को संवारने का मौका भी है।
      भौतीकता में जिवन जिना मौज-मस्ती यह मरीचिका है। क्या समाज की आने वाली पिढी, अपने बच्चे के लिए एक बेहतर दुनिया नहीं चाहेगी? ये सब अपने आप नहीं होगा इसके लिए तुम्हें आगे आना होगा।RJPA टीम के साथ टीम वर्क करना होगा संघटन हमारी ताकत है मिलकर चलो, तो कोई रुकावट बडी नहीं होगी। समाज का कारवां तुम्हारा इंतजार कर रहा है।आज हम उस मोड़ पर खड़े हैं, जहां हमारे कृतीगत कार्य की गति धीमी हो गई है। हमारे पुराने साथी आने वाले कुछ साल में उम्र का पडाव पार करने वाले हैं, जिन्होंने RJPA महापुरुषों की विचारधारा को जिया उनके हाथों में मशाल अब भी जल रही है, लेकिन उनकी उम्र और थकान उस तरह कार्य नहीं कर पायेंगी जैसे युवावस्था में होता है। अब वक्त है कि तुम,नई पीढ़ी, आगे आओ उस मशाल को अपने हाथों में लो।उनसे प्रेरणा लो। 
विपरीत परिस्थितियों में अगर वो उस दौर में थोडा कुछ कर सके, तो आज तुम भी कर सकते हो।उनके कंधों से जिम्मेदारी लेना कोई बोझ नहीं, बल्कि सम्मान है। पुरानी पीढ़ी तुम्हारा इंतजार कर रही है। हम चाहते हैं कि तुम इस विरासत को नई ऊंचाइयों तक ले जाओ।समाज का कारवां रुके नहीं, बस अब तुम्हारी बारी है उसे आगे ले जाने की! यह जातक कथा समर्पित है।

       हिमालय के जंगल में एक विशाल वृक्ष पर बंदरों का समूह रहता था, जिसका नेता महाकपी नामक एक समझदार और बलशाली बंदर था। इस वृक्ष पर स्वादिष्ट फल लगते थे, जो नदी में बहकर मानव बस्ती तक पहुंच जाते थे। एक दिन, एक राजा ने इन फलों का स्वाद चखा और लालच में आकर उस वृक्ष को हथियाने का फैसला किया। राजा के सैनिकों ने वृक्ष पर हमला कर दिया और बंदरों को मारना शुरू कर दिया।
महाकपी ने अपने समूह की रक्षा के लिए तुरंत एक योजना बनाई। उसने नदी के किनारे एक बांस को झुकाकर उसे पुल की तरह इस्तेमाल किया, ताकि उसके साथी बंदर उस पर से भागकर सुरक्षित पहाड़ी पर पहुंच सकें। बंदरों ने डर के मारे जल्दबाजी में बांस पर दौड़ लगाई, जिससे महाकपी का शरीर कुचल गया। फिर भी, उसने हिम्मत नहीं हारी और अपने सभी साथियों को सुरक्षित निकाल लिया। अंत में, उसकी बहादुरी से प्रभावित राजा ने उसे सम्मान दिया, लेकिन तब तक महाकपी अपनी चोटों के कारण मर चुका था।

प्रेरणा,नेतृत्व और जिम्मेदारी:    
   महाकपी ने अपने समूह की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली। हमारे युवाओं को यह सिखाता है कि सच्चा नेता वही है, जो मुश्किल वक्त में आगे बढ़कर जिम्मेदारी ले।

निस्वार्थ सेवा:
अपने लिए न सोचकर दूसरों के लिए त्याग करना इस कथा का मूल संदेश है। युवा इससे प्रेरणा ले सकते हैं कि समाज के लिए कुछ करना ही असली सफलता है।

साहस और संकट में धैर्य:
महाकपी ने संकट में भी हार नहीं मानी। युवाओं को यह सिखाता है कि मुश्किलों में भी हिम्मत और समझदारी से काम लेना चाहिए।

सामूहिक भलाई:
व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर समूह के हित के लिए काम करना आज के युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है।
    यह जातक कथा संदेश देती है कि,जीवन में सिर्फ अपनी महत्वाकांक्षाओं तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के लिए कुछ करें, दूसरों की मदद करें और जरूरत पड़ने पर बलिदान देने से भी न हिचकें। महाकपी का उदाहरण आज भी हमें यह सिखाता है कि सच्ची महानता त्याग और सेव में है।
        

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