मनुष्य का व्यक्तित्व बाहरी दिखावे से परे
मनुष्य का बाहरी दिखना केवल भौतिकता है,जो समय के साथ धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है। लेकिन असली खूबसूरती और स्थायित्व तो हमारे आंतरिक और बाहरी सकारात्मक गुणों के मेल में है। जब ये दोनों साथ मिलते हैं, तभी व्यक्ति का सच्चा व्यक्तित्व विकसित होता है।
मुझे अक्सर कुछ लोगों द्वारा कहा जाता है कि कर्मचारी को लंबे बाल रखना ठिक नहीं उसका इसके प्रति उनका क्या दृष्टिकोण है? यह आजतक कोई बात नहीं पाया।
लेबे बालों और रहन सहन के प्रति कुछ लोगों का अनोखा अनुभव आइए आपसे इस बारे में अनुभव साझा करता हूँ।
हमारे एक मित्र पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, जो स्वयं शराबी, भ्रष्टाचारी और अनैतिक हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को लंबे बाल रखना ठीक नहीं।
मुझे जवाब देना पड़ा, "जब मैं न्यायालय के विधि सेवा प्राधिकरण में कार्यरत था और कारागृह में ड्यूटी के लिए जाता था, तब मैंने हजारों बंदियों को अच्छे रहन-सहन में देखा। लेकिन उनमें शील और नैतिकता का अभाव था, इसलिए वे इस स्थिति में हैं।"
यह अनुभव बताता है कि बाहरी दिखावा कभी-कभी आंतरिक गुणों को नहीं दर्शाता। असली मूल्य नैतिकता, शील और चरित्र में होता है, न कि केवल बालों की लंबाई या बाहरी रूप में।
एक बार मुंबई से आए जज साहब ने मेरे लंबे बालों को देखकर कहा, "आपके बाल मुझे हमेशा से इतने ही बड़े दिखते हैं।"
मुझे मुस्कुराते हुए जवाब देना पड़ा, "मेरे चेहरे और व्यक्तित्व को शोभा देता है इसलिए मैं ऐसे बाल रखता हूँ। मेरे कर्तव्य और बर्ताव ने कुछ कमी है?"
यह अनुभव बताता है कि बाहरी दिखावा और व्यक्तित्व की समझ अलग-अलग होती है। हमें अपनी पसंद और पहचान पर गर्व करना चाहिए, न कि दूसरों की सोच पर निर्भर रहना चाहिए।
हमारे एक दोस्त हर बार विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए उनके लंबे बालों, पहनावे और रहन-सहन पर टिप्पणी करते हैं।
लेकिन उन्होंने कभी विद्यार्थियों के शील सदाचार और नैतिकता के बारे में न पुछा न कोई उपदेश दिया।
व्यक्तित्व का विकास केवल बाहरी रूप से नहीं होता, बल्कि आंतरिक गुणों जैसे नैतिकता, संस्कार और शील से होता है।
सही मायने में रहन-सहन से भी अधिक महत्वपूर्ण है हमारा धम्म आचरण, जिसमें शिल, सदाचार, संयम, निरहंकार और नम्रता जैसे गुणों की वृद्धि होती है और यह गुण धम्म से आते हैं।
धम्म का अर्थ है नीति, और नीति का अर्थ है शील।
जब तक ये गुण हमारे जिवन में व्यवहार और आचरण में जीवित हैं, तब तक हम सत्य, अहिंसा, दया, करुणा, मैत्री और सहनशीलता जैसे मूल्यों को महत्व देते हैं।
व्यक्ति चाहे जैसा भी दिखे या उसका रहन-सहन उच्च कोटि का न हो, लेकिन यदि उसके अंदर धम्म, नीति और शील जैसे सद्गुण मौजूद हैं, तो वही सच्चा और सुंदर व्यक्तित्व कहलाता है।
आइए, हम अपने व्यक्तित्व को आंतरिक गुणों से संवारें और दूसरों को भी इसी नजर से देखें।
आपके अनुभव क्या हैं? अपने विचार साझा करें!
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