भारत कि पहली अभ्यास यात्रा का उद्देश्य



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     सांस्कृतीक तथा धार्मिक स्थलोकी यात्रा किसी विशेष विषय को लेकर यात्रा की जाती है या किसी विशिष्ट विषय को लेकर अभ्यास गट यात्रा जरूर करते हमने देखा है।ऐसी कोई यात्राएं देखी गई है मगर अभ्यास करने के लिए ग्यान को पाने के लिए अभ्यास यात्रा का आयोजन भारत मे पहली बार किया जाना यह जक अद्भुत घटना है। डाँ. बाबासाहेब आंबेडकरजी का मुलमंत्र है ग्यान संपादन करना और नैतिकता का अनुसरण करना यह मात्र अभ्यास से ही प्राप्त किया जा सकता है ग्यान का महत्व समाज के रोम रोम में बसाने के लिए मा.डाँ.प्रशांत रोकडे सर IRS (Joint Commission Airport Delhi) इनकी संकल्पना से साकार होकर वह जनमानस में छानें का संकल्प "राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका" आंदोलन के माध्यम से अंमल मे लाकर वह जनमानस में आचरण करने के लिए चलने वाली निरंतर प्रक्रिया है।
    समाजीक घटकोंमे मानव मुल्यों को जमीन स्तर पर अंमल मे लाने के लिए हमारे महापुरुष ज्योतिबा फुलेजी,छत्रपति शाहूजी महाराज , डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर इन्हें ने अपने जीवन को समाज के प्रति समर्पित किया परंतु आज भी समाज मे संविधानीक नैतिक मुल्यों का अभाव दिखाई देता है।समाज मे सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय को प्राप्त करने के लिए समाज में संघर्ष चल रहा है।यह अधिकार प्राप्त करना हर नागरिक का हर संघटना का कर्तव्य है और इस ध्येय के प्रप्ति हेतु 6 मई 2012 बुद्ध पुर्णिमा के दिन मा.डाँ.प्रशांत रोकडे सर IRS के नेतृत्व में अधीकारी, कर्मचारी और समाज के जागरूक लोगो को लेकर "राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका"आंदोलन के माध्यम से शुरू किया है वह "विहार जहाँ अभ्यासिका वहाँ" इस माध्यम से विद्यार्थियों को प्रतियोगिता परीक्षा की निशुल्क तयारी, परदेश शिक्षा,उद्योग और व्यवसाय में समाज का संसाधन रहित वर्ग को निशुल्क तत्वाधान पर मुलभुत सुविधाओं की उपलब्धता करना यह ध्येय उद्देश्य को लेकर विगत बारह वर्षों से अमरावती, नागपुर, पुणे, अहमदनगर, भंडारा,गोंदिया, चंद्रपुर, काटोल, आर्वी वर्धा इत्यादि ऐसी58जगहों पर पवित्र ग्यान के प्रचार प्रसार का कार्य  निरंतरता से शुरू है।जिसका परिणाम 10,000 से ज्यादा विद्यार्थियों ने इसका लाभ लिया है और 2,000 से ज्यादा शासन कि सेवा में अधीकारी, कर्मचारी अपनी सेवा प्रदान कर रहे है। 2,000 विद्यार्थियों मे अधीकतर विद्यार्थि यह ग्रामीण क्षेत्रों तथा झुग्गियों के रहने वाले हैं यह परिवार समाज के मुख्य प्रवाह में लोगों को लाने का एक छोटा सा प्रयास "राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका"आंदोलन के माध्यम से हुआ है साथ साथ समाज का आर्थिक विकास होने के लिए मा.डाँ.प्रशांत रोकडे सर IRS और अभ्यासिका समन्वयकों के माध्यम से WE MALL उद्योग, WE MART उद्योग, JOBS कंपनी ऐसी कई उद्योगों को निर्माण करने के लिए अभ्यासिका आंदोलन निरंतर प्रयासरत है। यह सारी बातें ग्यान से, अभ्यास से समाज में निर्माण किया जा सकता है। यह प्रयोग अमरावती जिला महाराष्ट्र में अगर किया जा सकता है तो अन्य जगहों पर भी ऐसा परिणाम स्वरूप कार्य निर्माण कर समाज में आत्मविश्वास के संकल्प का संदेश गाव देहातों, झुग्गी झोपड़ीयो मे लेकर जाने का प्रयास विहार जोडो जमाज जोडो इस संदेश के माध्यम से अभ्यास यात्रा के आयोजन का मुख्य हेतु है।
       समाज का सर्वांगीण विकास यह ग्यान और अभ्यास से किया जा सकता है इस लिए गांव देहांत झुग्गियों के समाज को जगाने के लिए दि. 26 जनेवारी 2023 प्रजासत्ताक दिन से लेकर 29 जनवरी 2023 तक चार दिनों की अभ्यास यात्रा का आयोजन किया जिसकी शुरुआत 26 जनवरी को राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले द्वारा चलाई गई पहली पाठशाला भिडे वाडा पुणे से आरंभ होते हुए वह अहमदनगर,अमरावती, चांदूर रे,सांगुलवाडा,अंजनसिंगी,धामनगाव,वरोरा,शेगांव.बु,सिंदेवाही चंद्रपुर,ब्रम्हपुरी,धारगाव,लाखनी,शाहपुर भंडारा,नागपुर, काटोल,आष्टी और अभ्यास यात्रा की समाप्ति 29जनवरी 2023 को आर्वी वर्धा मे हुई।
        "राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका" यह कार्य समाज के द्वारा संचालित होकर यह समाज के भविष्य का नियोजन है। इस आंदोलन मे होनहार, इमानदार और निष्ठावान कार्यकर्ता होकर लोभ को त्याग कर समर्पण के साथ अभ्यासिका के समन्वयकोने अपने पर तथा आनेवाली भावी पिढीपर आनेवाली आपत्ति को दुर कर आने वाली पिढी के मार्ग को सुलभ करना यह अभ्यासिका आंदोलन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अभ्यास यात्रा में बडे पैमानेपर अधिकारी, कर्मचारी महिला समाजसेवी आदि लोग शामिल थे। विहार जोडो समाज जोडो अभ्यास यात्रा यह जो ग्यान संपादन करने की प्रेरणा समाज के संसाधन रहीत लोगो मे निर्माण करना इसलिए बेहद जरूरी है क्या की, गांव देहात, झुग्गियों मे शराब की लत और कई तरह की लत दिखाई देती है। इसके कारण समाज मे नैतिकता का पतन होता दिखाई दे रहे हैं।समाज में कुछ अंशों मे शिक्षा, उच्च शिक्षा दिखाई देती है परंतु यह व्यक्ति के सर्वांगीण बदल के लिए काफी नहीं है। इसके परे उनको नौकरी, रोजगार और व्यवसाय में यह वर्ग आना चाहिए ऐसा अभ्यासिका आंदोलन का उद्देश्य है इसी उद्देश्य के लिए अभ्यास यात्रा का आयोजन किया गया है।
    समाज की प्रगति केवल समाज में मैजूद संघटना कि ताकत पर होती है ऐसी ताकत समाज ने स्वयं निर्माण करना जरूरी है और ऐसी ताकत अभ्यासिका आंदोलन के अधिकारियों,कर्मचारियों और समाज का जागरूक वर्ग अपना योगदान समाज को देकर अनुशासन और इमानदारी ऐसी आंदोलन की ताकत अभ्यासिका आंदोलन के कार्यकर्ताओं कि संख्या पर न होकर वह उनकी इमानदारी, एकनिष्ठता और अनुशासन पर मैजूद है और इसी कारण विगत बारह वर्षों से आंदोलन परिणाम के साथ कार्य कर रही हैं। इसी तरह का कार्य गांव, झुग्गियों के विहारों मे शुरुआत हो इसलिए अभ्यास यात्रा का आयोजन है। भुखे इंसान को रोटी की जरूरत होती है केवल सहानुभूति और आश्वासनों से युक्त भाषण हर महानगर, शहर, तहसील में मैजूद विहारों मे सुनाई देते हैं।वही लोग वही भाषण उसमें कुछ भी नया पन नहीं और इसका परिणाम शुन्य! केवल सहानुभूति वाले भाषण देकर परिणाम आने वाले नहीं है। जब तक गांव देहांत, झुग्गियों मे रहने वाले संसाधन रहीत समाज को मदत का हात देकर उन्हें समाज के मुख्य प्रवाह में लाने वाला कार्यक्रम बेहद जरूरी है ऐसा संकल्प अभ्यासिका आंदोलन विगत बारह वर्षों से निरंतर कर रही है समाज मे मैजूद अन्य घटकों ने भी परिणाम देने वाला कार्य करे जिनसे उन लोगों मे प्रेरणा निर्माण हो हर विहारों ने परीणाम पर कार्य करना जरूरी है इसलिए विहार जोडो समाज जोडो ऐसे अभ्यास यात्रा का उद्देश्य है।
        समाज की प्रगति उस समाज मे मैजूद शिक्षा के प्रगति के स्तर पर मैजूद होता है।अभ्यासिका आंदोलन विहार जोडो समाज जोडो अभ्यास यात्रा का ध्येय के प्राष्ती हेतु समाज में बडे पैमाने पर अधिकारियों कि जगहों को प्राप्त करना माने मौके की जगहों को प्राप्त करने का संकल्प समाज के विद्यार्थियों कार्यकर्ताओं ने संकल्प लेकर वह समाज में अंमल मे लाने का संकल्प याने अभ्यास यात्रा है। ग्रामीण क्षेत्रों में झुग्गियों मे रहने वाला वर्ग जो कई सालों से तकलीफ का जीवन यापन कर रहे हैं यह निचला तपका उपर आना के लिए क्रांति का चक्र गतिमान करने का प्रयास याने अभ्यास यात्रा है।
         "राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका"आंदोलन मे मैजूद 58अभ्यासिका के विद्यार्थी तथा समाज में मैजूद अन्य विद्यार्थियों पर बहोत बडी जिम्मेदारी है।हमारा संघर्ष अभी शुरुआत हुआ है इसलिए अभ्यासिका आंदोलन को बढाना बेहद जरूरी है।आंदोलन में आचरण शुद्ध रखकर अपने नियोजित ध्येय कि प्राष्ती हेतु जागरूक रहकर कार्य करने के लिये विद्यार्थियोंने समन्वयकोंने रचनात्मक कार्य कर दिखाने के लिए और ध्येय प्राप्ती के लिए अभ्यास यात्रा की आवश्यकता है।
        ग्रामीण क्षेत्रों में झुग्गियों मे रहने वाला समाज आर्थिकता से,मनोधैर्य से पिछड रहा है राजनीतिक एवं सामाजिक न्याय तथा दर्जा और मौके कि समानता के लिए संघर्ष करना पड रहा है। इनमें से अधिकतर लोग गहरी अग्यानता से ग्रसित है। पंचशील तथा बाईस प्रतीग्या कि अवहेलना हो रही हैं। इस समुदाय को विपत्ति से होनेवाली यातनाओं को सहना पड रहा है।उसका उपाय करना जरूरी है।इस समाज मे चलनेवाले जीवन कार्य को योग्य दिशा देना जरूरी है। इसलिए हममे से जिस किसी को इस परिस्थिति को समझने की योग्यता है और जिन्हें इन्सानियत और कर्तव्यबुद्धि पुर्णतः जागरूक है ऐसे सभी अपने समाज के संघर्षरत को जारी रखने के लिए दिनरात निर्पेक्ष बुद्धि के साथ संघर्ष करना जरुरी है। इस समस्या का जिनको आकलन हुआ हो अगर वे लोग खामोश रहकर तमाशाई बनकर रहे तो हमारे समाज के विनाश की सारी जिम्मेदारी उनकी होगी। इसलिए आज जो परिस्थिति है उसे दुर कर अपने बच्चों का भविष्य तथा अपने परिवार का भविष्य और ज्यादा खराब न हो ऐसी इच्छा होगी उन सभी महानुभावों गंभीरता से कार्य करना जरुरी है। समाज मे नकारात्मक तथा प्रतीक्रांती वादी शक्ति ने,दुराचारीयों ने समाज की दुर्दशा चलाईं है उनपर अंकुश लगाना यह "राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका"आंदोलन का तथा समाज के हर तबको का कर्तव्य है।
        समाज में विविध संघटना अलग अलग विषयों पर कार्य कर रही है सभी संघटना यह अलग न होकर एक ही वृक्ष की डालीयां है इन डालीयों का एक ही तना है उसिसे सभी को जिवन रस मिलता है। हमारे अलग अलग संघटना, अलग उद्देश्यो के लिये कार्यरत हैं लेकिन सभी का आधार फुले,शाहु,आंबेडकर इनकी विचारधारा है। विहार जोडो समाज जोड़ अभ्यास यात्रा के माध्यम से सभी संघटनाओं का समायोजन करना यह अभ्यास यात्रा का उद्देश्य है। केवल मात्र तत्वग्यान से कुछ नहीं होगा क्या की उसका परिणाम समाज जीवन पर अपने आप नहीं होता वह परिणाम का अंमल करना पडता है इसलिए परीणाम कि दृष्टि से तत्वग्यान बताने से बेहत है के वह अंमल मे कैसे आये इसलिए यथा योग्य संघटना और आंदोलन का निर्माण जरूरी है।इस कसौटी पर "राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका"आंदोलन कार्य कर उसका परिणाम समाज जीवन पर दिखाई दे रहा है इसलिए परिणाम कारक अभ्यासिका आंदोलन आज समाज कि जरुरत है।

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