बुद्ध विहार बनाने के तीन प्रमुख उद्देश्य

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        18 मार्च 1956 को आगरा मे एक बुद्धविहार के उद्घाटन के मौके पर बोलते हुए डॉ बाबासाहब आंबेडकर जी ने लोगो को समझाया कि बुद्धविहार बनाने के पीछे तीन प्रमुख उद्देश्य हैं:-
1)हमारे समाज के अधिकतर लोग गाँवों मे रहते हैं ,किन्तु रोजगार , नौकरी, हायर एजूकेशन और इन्टरव्यू इत्यादि के लिए उन्हें शहरों मे आना पड़ता है । यहाँ उन्हें ठहरने का ठौर ठिकाना नहीं मिलता और वे फुटपाथ , रेलवे स्टेशन , पार्को , खुले मैदानों मे रहने को मजबूर होते है । 
2)दूसरे समाज के लोग जब शहर आते है तो उन्हें अपनी अपनी जाति के लिए बनाई धर्मशालाएं , होटल , गैस्ट हाउस इत्यादि आसानी और निशुल्क या कम से कम खर्चे मे मिल जाते है । इन बुद्धविहारों के बनने से हमारे लोग भी जब शहरों मे आयेंगे तो सम्मान के साथ ठहरेगें, ये बुद्धविहार उनकी हर तरह से सहायता करेंगे ।

3)इन बुद्धविहारों मे एक अग्रेजी माध्यम से संचालित स्कूल खुले जिससे हमारे समाज की भावी पीढी के बच्चे भी दूसरे समाज के बच्चों के समकक्ष खड़े हो सके। इन बुद्ध विहारों मे दुकानें बनाकर अपने लोगों को रोजगार और व्यापार के अवसर प्रदान कर आर्थिक रूप से सक्षम बनाना । अन्त मे उन्होंने लोगों को समझाया कि रोजगार और सम्मान देना ही सबसे बड़ा धर्म है इन बुद्धविहारों मे हमारे अपने बच्चे पढेगें, अपने लोग पढायेगे और दुकानें चलयेंगे तो उन्हें रोजगार मिलेगा और वे सम्मान के साथ जीवन बिताएगें

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