भारत रत्न राजर्षि शाहु महाराज

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        भारत के इतिहास में गौतम बुद्ध ने राज्य त्याग करकर विश्व के कल्याण का विचार किया। चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने मानव कल्याण के किया कार्य किया ज्योतिबा फुले, शाहू जी महाराज ने भी इन्हीं महापुरुषों के कदमों पर चलकर समाज में समता, बंधुत्व,स्वतंत्रता का आंदोलन निरंतर चलाया।छत्रपति शाहूजी महाराज का समाज के लिए किया गया अद्भुत कार्य को देखकर कानपुर के कुर्मी समाज ने उनको राजर्षी यह उपाधि प्रदान की। उनके नाम से देशमे समाजीक न्याय दिवस मनाया जाता है। छत्रपति शाहूजी महाराज कि शिक्षा राजकोट के राजकुमार कॉलेज में हुई अपने उम्र के 20 वे साल मे वे कोल्हापुर संस्थान के राजा बने 1902 में इंग्लैंड के केंब्रिज विद्यापीठ ने उन्हें LLD यह पदवी दी।
छत्रपति शाहूजी महाराज का समुचे समाज के प्रति समाजीक दृष्टिकोण का कारण यह है कि उनको शैक्षणिक और उदारीकरण का दृष्टिकोण विदेशी शैक्षणिक दृष्टिकोण के कारण हुई। उन्हें फितुझ राँल्ड नामके बुद्धिमान अंग्रेज शिक्षक को शिक्षा के लिए नियुक्त किया। वे राजकोट के राजकुमार काँलेज मे पढे उनको आगे पढाने के लिए फ्रेझर नामक शिक्षक को शिक्षा के लिए नियुक्त किया। अमेरिकी समाज सेवी डॉक्टर वाँर्नलेस इनकी समाज सेवा का गहरा प्रभाव शाहू माहाराज पर पडा इन्हीं कारणो से उनका समाजीक दृष्टिकोण उच्च कोटि का था। साथ साथ सभी समाज को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए उन्होंने समतावादी महात्मा फुले के सत्यशोधक आंदोलन का बहुत उपयोग हुआ। वे जातीयता के विरुद्ध थे वे कहते थे कि,अस्पृश्यता मतलब दुनिया में कही पर भी न मिलने वाली जातीयता यह घिनौना स्वरूप जो सभी के लिए कलंक, लज्जाजनक बात है। इसी लिए उन्होंने अछूतों को अपने संस्थान में नियुक्त कर क्रांतिकारी निर्णय लिया।
        राष्ट्रपिता ज्योतीबा फुले ने 1869 को सर्वप्रथम आरक्षण की मांग की और शाहूजी महाराज ने 1902 को 50% आरक्षण लंदन से घोशित किया। समाज में मैजूद जातीयता के भेद को नष्ट करने के लिए आंदोलन चलाया और अन्य पिछड़े वर्गों को पुलिस, पटवारी, संदेश वाहक और अंगरक्षक जैसी नौकरियों मे नियुक्ति कर आरक्षण लागू किया तथा अनेकों कलाकारो, गायकों और पहलवानों को मदत कर प्रोत्साहित किया।
      अस्पृश्योंका सामाजिक आर्थिक राजनीतिक उद्धार होने का एकमात्र मार्ग शिक्षा है इस लिए महाराज ने वस्तीगृहो का निर्माण किया। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य किया।प्राथमिक शिक्षा के बाद ग्रामीण विद्यार्थि उच्च शिक्षा के लिए शहर में जाना पड़ता था उन बच्चों को रहने की व्यवस्था महाराज ने महारानी विक्टोरिया मराठा बिल्डिंग की इंदुमती होटल कृष्णा मे की कुल मिलाकर हर समाज के लिए 20 वस्तिगृह का निर्माण किया हजारों सालों से शिक्षा से वंचित समाज को ज्ञान के दरवाजे उन्होंने खोल दिए शिक्षण कार्य पर अधिक खर्च करने हेतु महाराज ने अपने संस्थान के प्रत्येक घर पर 1 ₹ कर लगाया।
उन्होंने महिलाओं के लिए कौटुम्बिक हिंसाचार कानून बनाया उन्होंने खुद के परिवार के लड़की का विवाह धनगर समाज के होलकर घराने मे कराया और अंतरजाति विवाह करवाया। 
उन्होंने दत्तोबा पवार नामक अछूत व्यक्ति को उस समय कोल्हापुर का नगराध्यक्ष नियुक्त किया। मेहतर समाज के हिरा मदार नामक व्यक्ति को नगरपालिका मे सदस्य नियुक्त किया। अछूत गंगाराम कांबले को चाय की दुकान लगाने में सहायता की। डाँ.बाबासाहब आंबेडकर को सोनतली कँम्प मे ले जाकर सहभोज किया। अस्पृश्यता के बारे मे वे कहते थे कि,भारत के सभी देवता जमीन में गाड़ने के बाद ही खेती उपजाऊ हो पायेगी। कृषी व्यवसाय और किसानों के लिए सिंचाई के लिए पानी के लिए तालाब,बांध बनवाने जिसके कारण कृषि अर्थव्यवस्था में बदलाव दिखाई दिया।
छत्रपति शाहूजी महाराज यह राजा थे राजा होते हुए जब डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद के घर का पता ढूंढते हुए महाराज कहां तक पहुंचे हैं महाराजा चाहते तो उन्हें अपने दरबार में भी बुला सकते थे पर पर होने के बावजूद भी महाराज गुणवत्ता वाले विद्यार्थी के पास गए यह इतिहास के एकमात्र राजा का उदाहरण है। 1920 मे महाराज द्वारा लिखीत पत्र में शाहू जी महाराज डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर को लोकमान्य अंबेडकर यह पदवी देते हैं। बहुजनों को शिक्षा और रोजगार मे आरक्षण जाती का निर्मूलन, स्री मुक्ति के लिए कानून ऐसे समाजीक सुधारवादी कार्य कर शाहूजी महाराज अमर हुए लेकिन उनके समाजीक बदलाव वाले कार्य को देखकर सनातनीयोने उनकी हत्या करने का कई बार प्रयास किया परंतु वे अपने विचारों से मजबूत थे। महाराज के मृत्यु पर डाँ.बाबासाहब कहते हैं कि मेरा सखा चला गया वे समाज को कहते है कि, शाहूजी महाराज की जयंती त्योहार के समान मनानी चाहिए।
शाहुजी माहाराज को विनम्र अभीवादन
संदर्भ:-
दैनिक मतदार
२६जून२३

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