निस्वार्थ मदत और उसका परिणाम

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    समाज में कुछ लोग पूरी तरह से स्वयं होकर निर्पेक्ष मदद करने की पहल करते हैं क्योंकि ऐसे लोगों को मदत, सहायता करने के कुशल कर्म के महत्व का एहसास हो गया होता है। व्यक्तिगत,संगठनात्मक या संघीय, कुछ लोग बहुसंख्यक लोगों को पूर्णरुपसे निर्पेक्ष सहायता कर उनके कार्य में हाथ बँटाना और सामाजिक सहायताका कार्य कर इस शृंखला को सक्रिय कर अधीकांश लोगों तक समाज मे आगे बढ़ाने की जरूरत है। समाज के विभिन्न घटकों ने हमे विभिन्न तरह से  हमारी मदद की है, जिसका परीणाम उनके फल कि मिठास आज चख रहे है अनुभव कर रहे है। मदत के कुशल कर्म और सहायता के कर्मों से अवगत होकर हमने जरूरत और आवश्यकता के समय जरुरतमंदो को सहायता करना याने समाज द्वारा हमें प्राप्त हुआ ऋण समाज को लौटाना होता है।
      मदय और सहायता का स्वरूप यह समय, बुद्धि, धन, प्रयास, आत्मविश्वास, मार्गदर्शन जैसे विभिन्न रूपों में होता है जो सम्यक और विधायकतापुर्ण कुशल कर्म है।
कुशल कर्म एक गतिमान क्रिया है जो उद्देश्यपूर्ण और सचेत रूप से की जाती है। कुशल कर्म हमारी स्थिति को निर्धारित करता है। 
    प्रत्येक क्रिया की एक प्रतिक्रिया होती है यह सिद्धांत तथागत बुद्ध ने
रखा आगे यही बात न्यूटन ने भी प्रस्तुत कि, "Every action must have an equal opposite reaction" मतलब जैसा करोगे वैसा परीणाम पाओगे प्रसंन्न और आनंदित व्यक्ति प्रसंन्न और आनंदित ही देगा,निंदक निंदा देगा, चापलूस चापलूसी देगा, सकारात्मक व्यक्ति आत्मविश्वास देगा और नकारात्मक व्यक्ति दुराचार देगा जैसा बोओगे वैसी फसल पाओगे।
  विधायक कुशल कर्म मोह, क्रोध, लोभ, वासना से नहीं किया जाता, बल्कि यह करुणा और प्रज्ञा से किया जाता है। क्रिया और प्रतिक्रिया का ज्ञान बुरे कार्य से दूर रखता है और अच्छे कार्य की प्रेरणा देता है और यही कार्य व्यक्ति को दुःखी,पीड़ित या सुखी बना सकता है अर्थात अच्छे या बुरे मन की अवस्था अव्यवस्थित या प्रसन्न मन पर निर्भर करता है अर्थात जो अपनी आदत के अनुसार कार्य करता है वैसा ही वही परिणाम भी पाता है।
        किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे की निर्पेक्ष मदद करना एक कुशल कर्म है, जो स्वयं और दूसरों के लिए सुख और आनंद देता है; यदि किसी ने मेरी सहायता की है, और यदि मेरा लक्ष्य है कि मैं भी दूसरों की निर्पेक्षता से सहायता करूंगा, तो इससे व्यक्ति की मानसिक स्थिति प्रसन्न, सकारात्मक होती है तथा सामाजिक ऋण और सामाजिक भातृभाव का परिणाम  मिलता है जिससे सामाजिक भाईचारा वृद्धिगत होने मे मदत होता है।

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