अन्याय अत्याचार गरीब,बेबस पर क्यो होता है?
समाज मे अन्याय अत्याचार पर उच्च स्तरीय व्यक्ति ने आवाज उठाई या लिखा तो उसे लेखक कहलाते हैं और इसके विपरीत पिढीत पिछडे व्यक्ती ने आवाज उठाई तो उसे जातीवादी काहा जाता है अन्याय अत्याचार के विरुद्ध समाज में समस्या रखकर उसपर उपाय निकालना जरूरी है।समाज मे अन्याय अत्याचार गरीब,बेबस,मजलूम पर होता है अक्सर देखा गया है कि बलि भेड बकरियों कि दी जाती हैं शोरों कि नहीं! आज के दौर में शेर बनना मतलब खुन खराबा करना या असंवैधानिक मार्ग का अवलम्बन करना न होकर, बुद्धिजीवी और आर्थिक संपन्न बनकर समाज में सशक्त परीणाम देनेवाले संघटनात्मक तरीके से व्यक्ति और सामाजिकहितों के लिए कार्य करनेवाला कार्यकर्ता,अनुयायी का निर्माण करना और होनेवाले अन्याय अत्याचार का संविधानिक तरीके से सामुदायिक तौर पर मुकाबला करना है।
संघ को मजबूती प्रदान करना यह संघटन के बुद्धिजीवी, विद्वान और समान्य प्रचारक, प्रसारक और अभ्यासको की जिम्मेदारी होती है। किसी भी संघ या संघटन मे उसके ध्येय और उद्देश्य को पुर्ण करने के लिए समाज मे सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ परीणाम देनेवाला कार्य करना जरूरी है। जब तक हम ज्यादा से ज्यादा समाजीक दाईत्व के प्रति सकारात्मक तथा बुद्धिजीवी कार्यकर्ता अनुयायी जो समाजीकता के प्रति सक्रीय घटकों को हमारे कार्य में शामिल नहीं करते तब तक हम हमारे नियोजित ध्येय और उद्देश्यों कि प्राप्ति नहीं कर पायेंगे।
इसलिए कार्यकर्ता अनुयायियों से बिनती है के ध्येय और उद्देश्य साध्य करने के लिए One Man Army के बदले "Team Work" के माध्यम से कार्य करने को अधिक महत्व देने से नियोजित ध्येय कि प्राप्ती हम कर पायेंगे।
सामाजिक जिम्मेदारी को निभाते हुए समाज कि ताकत युवक, विद्यार्थी कैसे योग्य,नैतिकता का आचरण कर अधिक ग्यान अर्जित करने के लिए नियोजित अभ्यास कर सबसे पहले अपने पैरो पर खडे होकर पहले स्वयं अपना और अपने परिवार का आर्थिक आधार बने। उसके बाद समाज का समाजीक,आर्थिक और बौद्धिक आधार बनाने की शृंखला का निर्माण करना जरूरी है। स्वयं का विकास कर खुद पढना ग्यान का आकलन करना और दुसरों के विकास के लिए प्रोत्साहित करना दुसरो को सामाजिक उत्थान के लिए मदत करना इस प्रक्रिया पर कार्य करना जरूरी हैं। तभी समाज आर्थिक संपन्नता कि दिशा में आगे बढेगा। इस कार्यप्रणाली मे समाज के जिम्मेदार घटकों नोत़ाओं ने खुद बडप्पन से अपनी जिम्मेदारी अपने नये कार्यकर्ता युवाओं को साथ लेकर उनके कंधों पर जिम्मेदारी दि जानी जरूरी है। इस कार्यप्रणाली को पुर्ण करने के लिए बडे पैमाने पर समाज में प्रचारक, प्रसारक और अभ्यासक याने ज्यादा से ज्यादा सामाजिक कार्य करने वालों गुणात्मक कार्यकर्ताओं बुद्धिजीवीयों का निर्माण करना और उन्हें साथ लेकर समुदायीक कार्य करने का प्रयास करना बेहद जरूरी है।
इस माध्यम से समाज मे अन्य अत्याचार का खात्मा किया जा सकता है क्यों कि जब समाज में आर्थिक और बुद्धिजीवी घटकों का निर्माण होता है तभी समाज सशक्ति होता है। अक्सर अन्याय अत्याचार गरीब, बेबस पर किया जाता है अपनी बेबसी को दुर करने के लिए सामाजिक घटक संख्यात्मक और गुणात्मक घटकोंको का निर्माण होना जरूरी है।
हम पहले संख्या में कितने थे और आज कितने लोगों का संख्यात्मक और गुणात्मक निर्माण कर पाये है? गुणात्मक और संख्यात्मक माने नैतिकतापुर्ण संघटनात्मक, आर्थिकता से संपन्न, बुद्धिमत्ता से संपन्न इन महत्वपूर्ण गुणों का अगर हम निर्माण कर पाये तो उद्देश्य कि प्राप्ती कर पायेंगे इसके लिए हम सबने समाज को अधिक मजबूती प्रदान करने हेतू अधिक जिम्मेदारी के साथ कार्य करना जरूरी है।
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