उस्मानिया विश्वविद्याल हैदराबाद ने_ वल डाँ.बाबासाहब को सन्मानीत किया था।

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     डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर ने अनेकों विषयों पर ग्यान अर्जित किया और विदेश से डिग्रियां प्राप्त करने के बाद भारत मे ऐसी डिग्रियां प्राप्त करनेवाले एकमात्र व्यक्ति थे उस समय उनके कार्य और ग्यान के महत्व को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। देश के किसी भी व्यक्ति,संस्था या विश्वविद्यालयो ने उनके पढाई और ग्यान को महत्व नहीं दिया उन्हें द्वेषपूर्ण तरिके से जानबूझकर नजरअंदाज किया गया,अपवाद 12 जनवरी 1953 को उस्मानिया विश्वविद्याल हैदराबाद ने उन्हें Doctor of literature कि पद्ववी से नवाज कर उनको सन्मानीत किया। आज दुनिया मे डाँ. बाबासाहब के ग्यान और उनके आचरण से देश दुनिया में वे सन्मान के पात्र बने है।
       डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्तियाँ विश्व के दस शिक्षण संस्थाओं में लगी है और 14 विश्वविद्यालयों को डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर नाम दिया गया है।

विश्व के शिक्षण संस्थाओं में लगी मुर्तीयाँ

1)लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स, कोलंबिया यूनिवर्सिटी (न्यू यॉर्क), 2)यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैसाचुसेट्स 3)एमहर्स्ट, अमेरिका, ब्रांडिस  4)यूनिवर्सिटी (बोस्टन), अमेरिका;    5)साइमन फ़्रेज़र यूनिवर्सिटी (वैंकोवर, कनाडा)
6)यॉर्क यूनिवर्सिटी (कनाडा)
7)वेस्टर्न  सिडनी  यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया )
8)यूनिवर्सिटी  ऑफ़  मेलबोर्न, 9कोयासन यूनिवर्सिटी  कैंपस,जापान
10)आंबेडकर इंस्टिट्यूट (सजोकजा, हंगरी)  
                                          

1)डॉ. बी. आर. आंबेडकर स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स युनिव्हर्सिटी बंगलूरु

2) बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर

3) डॉ. बी.आर. आंबेडकर मुक्त विश्वविद्यालय हैदराबाद

4) बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ

5) डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय लोनार

6)डॉ. बी.आर. आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महू

7)डॉ. बी.आर. आंबेडकर राष्ट्रीय विधी विश्वविद्यालय सोनीपथ

8)डॉ. बी.आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय, श्रीकाकुलम

9) डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा

10)डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाडा विश्वविद्यालय औरंगाबाद

11)डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मुक्त विश्वविद्यालय अहमदाबाद

12)डॉ. भीमराव आंबेडकर विधी विश्वविद्यालय, जयपूर

13)तमिलनाडु डॉ. आंबेडकर विधी विश्वविद्यालय

14)डॉ. बी. आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली

समाजीक द्वेश के कारण किसीकी विद्वत्ता और बुद्धीमत्ता को नकारना मतलब
सूरज और सत्य की अस्तीत्वको छुपाना को नकारना है।

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