दृढ़ संकल्प निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने वाले कार्यकर्ता जरूरी है!
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हमारे समाज में,बीस साल में एकाग्रता के साथ काम करने वाला एक भी व्यक्ति दिखाई नहीं देता है.
कौन्सिल या म्युनिसीपालीटीकी एका जगह के लिए 100 अर्जी तयार होते है परन्तु एकही कार्य एक मार्गसे, एक ध्येय एक लक्ष के साथ करनेवाला एकभी मनुष्य अबतक मेरे सामने दिखाई नही देता है. शिक्षा,सामाजिक और आर्थिक कठिनाइया यह महत्वपूर्ण प्रश्न हैं इसके लिए काम करने वाले लोगों की बेहद आवश्यकता है.
कार्य करने के लिए प्रसिद्धीकी अपेक्षा किए बगैर काम करनेवाले लोगों चाहिए हर एक व्यक्ति प्रसिद्ध के पिछे है इसी कारण जो कार्य होना चाहते वह हो नही पाता है. कामचलाऊ कार्य करने से महत्वपूर्ण प्रश्न जगहपर रह जाते है इसलिए दिनरात कार्यरत,संघर्षरत रहना चाहिए.
ब्राह्मण समुदाय ने हमारे समुदाय के साथ अन्याय किया यह सच है कि उन्होंने हमें सताया है लेकिन उनकी कार्य पद्धति इतनी अच्छी है कि वे अपने द्वारा अर्जित शक्ति को बरकरार रख सकते हैं
किसीभी तरह का होहल्ला किये बगैर मूल आधार या नीति से चिपके रहते हूए,जो निरंतर काम करनेवाले ध्येयवादी कार्यकर्ता उनमें निर्माण होते हैं यदि हमारे कार्यकर्त्ताओने दृढ़ संकल्प,निष्ठा और खामोश के साथ कार्य करते रहेंगे तो हम हमारे आंदोलन का अच्छी तरह से प्रसार कर पायेंगे.
संदर्भ:-भाषण खंड
(रविवार, 28 जुलाई, 1940 को दामोदर हाँल,परल, मुंबई में भाषण।)
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