बौद्ध धम्म के प्रचारक,प्रसारक तथा अभ्यासक अनागरिक धम्मपाल*🇸🇨🇸🇨☸🇸🇨🇸🇨 *भारत में बौद्ध धर्म को पुनर्जीवन करने वाले अनागरिक धम्मपाल ने अपने जीवन के 40 वर्षों में भारत, श्रीलंका और विश्व के कई देशों में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ साथ बौद्ध विहारों का निर्माण कराया. सारनाथ का प्रसिद्ध महाविहार आपने ही बनवाया था इसके साथ साथ कई स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण कराया उनका प्रयास था कि कुशीनगर, जहाँ तथागत का महापरिनिर्वाण हुआ था फिर से बौद्ध जगत में दर्शनीय स्थल बन जाये.* *सन 1891 में अनागरिक धम्मपाल ने भारत स्थित बौद्ध गया के महाबोधि महाविहार की यात्रा की. यह वही जगह है जहाँ सिद्धार्थ गोतम को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी वे देखकर हैरान रह गए की किस प्रकार से पुरोहित वर्ग ने बुद्ध के मुर्तीयों को हिन्दू देवी-देवता में बदल दिया है. इन विषमतावादियों ने तब बुद्ध महाविहार में बौद्धो को प्रवेश करने से भी निषेध कर रखा था इसी दौरान 31 मे 1891 में महाबोधि सोसायटी की स्थापना की गई जिसका हेड आफिस कोलंबो था शीध्र ही इसे कोलकाता स्थानांतरित किया गया.* *महाबोधि सोसायटी की ओर से अनागरिक धम्मपाल ने सन 1895 मे सिविल सुट दायर किया एच धर्मापाल X जयपाल गिर जिसमें मांग की गई थी कि महाबोधि विहार और दूसरे तीन प्रसिद्ध बौद्ध स्थलों को बौद्धो को हस्तांतरित किये जाये. इसी रिट का ही परिणाम था कि आज महाबोधि विहार में बौद्ध जा सकते हैं परंतु तब भी वहां तथाकथित हिन्दुओं का कब्जा आज भी बरकरार है.* *शिकागो में संपन्न विश्व धर्म संसद जो 18 सितंबर1893 मे इस परिषद मे "विश्व पर बुद्ध का कर्जा" इस विषय पर अनागरिक धम्मपाल द्वारा बौद्ध दर्शन पर दिये भाषण से वहां पर उपस्थित दुनीया के विभिन्न धर्मों के विद्वान भौचक्के रह गए.* *बालक डेविड का जन्म एक धनी व्यापरी परिवार में हुआ था उनपर बौद्धदर्शन का गहरा प्रभाव पडा जिससे 13 जुलाई 1931 अनागरिक धम्मपाल बकायदा बौद्ध भिक्षु बन गये इन्होने प्रव्रज्या ली.16 जनवरी 1933 को प्रव्रज्या पूर्ण हुई और इन्होने उपसंपदा ग्रहण की और फिर नाम पड़ा भिक्षु देवमित धर्मपाल. बौद्ध धर्म के इतने बड़े पुनर्उद्धारक 29 अप्रैल 1933 को 69 वर्ष की अवस्था में इस दुनिया से विदा हो गये अनागरिक धर्मपाल इनके स्मृतिदिवस पर विनम्र अभिवादन और आदरांजली.💐💐💐🙏🙏🙏

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