Dr.Babasaheb Ambedkar

परमाणु शक्ति से बाढ़ नियंत्रण
डाँ.बाबासाहब आंबेडकर
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       हाल ही में हमने भारत में बाढ़ और बाढ़ नियंत्रण के तरीकों के बारे में बहुत कुछ सुना और पढ़ा है।  वायसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य के रूप में, मैं सिंचाई का प्रभारी हुआ करता था। इसके बाद सिंचाई और नेविगेशन आयोग नामक एक विभाग की स्थापना की, जिसका नाम बदलकर नदी नियंत्रण बोर्ड (River Control Board) केंद्रीय जल शक्ति आयोग (Central Water Power Commission) रखा गया है।
     इन संगठनों ने बाढ़ नियंत्रण का प्रस्ताव रखे हैं जो समय-समय पर प्रेस में आते रहता हैं। यह उम्मीद की जा रही थी कि इन संगठनों द्वारा कुछ निश्चित उपाय खोजा जाएगा।  लेकिन अब हम पाते हैं कि जो भी प्रस्ताव उनके कार्यान्वयन में आए, वे बाढ़ को नियंत्रित करने में पूरी तरह से विफल रहे हैं। शिलांग से यह भी रिपोर्ट बतायी गयी है कि इंजीनियरों के लिए भी यह कहना मुश्किल है लगभग असंभव है कि कौनसी पहल ब्रह्मपुत्र बाढ़ को सफलतापूर्वक नियंत्रित कर सकती हैं, और यह एक प्रायोगिक (experimental) बांध का निर्माण  14,00,000 रुपये की लागत से किया गया था और यह सब बाढ़ में बह गया है। 

  (Embankment) तटबंध 

   हमने यह भी सुनते हैं कि सरकार ने नदियों पर बांध बनाकर बाढ़ को नियंत्रित करने के नए विचार को छोड़ दिया है, और तटबंधों के पुराने विचार पर फिरसे वापस कार्य करणे पर सोचा गया है जिससे नौकरी के लिए बड़े पैमाने पर मदद का आह्वान किया है। 

     उपरोक्त विषय संबंध में मैं भारत सरकार और इस मामलों से संबंधित इंजीनियरों का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं वह एक प्रख्यात इंजीनियर द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव की ओर आकर्षित करना चाहता हूं जो 10 सितंबर,1954 के  बॉम्बे समकालीन के "आँब्झरवर" द्वारा लिखित, "परमाणु विज्ञान से बचाव" इस शीर्षक के माध्यम से प्रकाशित हुआ है। इस शीर्षक के तहत जिस प्रस्ताव की ओर मैं ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं वह एक सरल प्रस्ताव है,अर्थात बाढ़ नियंत्रण के लिए परमाणु शक्ति का उपयोग करना "ऑब्जर्वर" अखबार में दिए गए बयान को पढ़कर मैं बहुत आकर्षित हुआ और इस बारे में पूछताछ की; की, इस प्रस्ताव के लेखक कौन थे, मुझे पता चला कि वह व्यक्ति श्री सी.एस.पिल्लई हैं मैंने पाया कि वह सिविल इंजीनियरिंग पेशे में तीस से अधिक वर्षों से कार्यरत हैं, और इस तरह के कार्य का पहले से ही कुछ अनुभव है। उनका कहना है कि परमाणु अनुसंधान संशोधन से लेकर मौजूदा वर्तमान चरण तक

सर्व सामान्य तरीके से दिवाल के साहारे से तटबंधों तथा पुनर्वसन करना यह सब विज्ञान के इर्द-गिर्द घूमने की प्रक्रिया है नदी-प्रशिक्षण विज्ञान में हालिया प्रगति हुई है जहाँ विज्ञान ने नए तंत्रज्ञान और तकनीक लाई हैं जो नदियाँ साल-दर-साल इतना दुख लाती हैं उन नदियों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी तरीके से नियोजित की जा सकती हैं। वह आगे दावा करते है कि 'इन विधियों और तकनीकों का उपयोग स्टॉप-गैप (stop-gap) उपायों के रूप में किया जा सकता है लेकिन स्थायी उपचार के लिए हमें कहीं और उपाय देखना होगा।  

   मै ने उनसे नदी की बाढ़ को नियंत्रित करने की अपनी स्थायी योजना की व्याख्या करने के लिए उनसे प्रश्न किया, मैं नीचे प्रस्तुत करता हूं कि उन्होंने मुझसे कहा: 

     "परमाणु विज्ञान का विकास यह उम्मीद लाता है कि वह जो एक स्थायी उपाय है जिसे शोक की नदी कहा जाता है उसका उपयोग परिस्थिती को नियंत्रण करने में  लाया जा सकता है, हम जिन्हे चाहते उन्हे शिक्षीत और प्रशिक्षित कर सकता है जीसका अंमल कर हमारे उद्देश्यों की पूर्ति कर सकते है जीसे परमाणु विखंडन के रूप में जाना जाता है।

    इस विधि के अनुप्रयोग को आसानी से समझा जा सकता है जिन्होंने Ohm's Law पर कार्य किया है, जो परिपुर्णता, विद्युत धारा, विधवंसकारक बहाव और घनीभवन जो प्रक्षेपवक्र के उपर विघटनकारी आवेश और समेकन के नियम पर कार्य करता है जो नीसर्ग नियम कारण और परिणाम पर आधारित है।

"किस प्रकार Ohm's Law कार्य करता है और इसका परमाणु विज्ञान से क्या संबंध है?" 

               न्यूट्रॉन 

      "परमाणु भौतिक विज्ञानी इस प्रश्न का अधिक पूर्ण उत्तर दे सकते हैं आज परमाणु रिएक्टरों द्वारा न्यूट्रॉनों की धार उत्पन्न करना संभव है। न्यूट्रॉन के इन प्रवाहों को जल स्तर के साथ-साथ जलग्रहण क्षेत्रों को विनियमित करने के लिए नदी के पानी की थाह में आसानी से प्रवेश करने के लिए बनाया जा सकता है।  जिससे बाढ़ के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सकता है ताकि सिंचाई और बिजली परियोजनाओं में हमारी जरूरतों को पूरा किया जा सके परिणामता: बाढ़ के बाकी पानी को तुरंत बाष्पित किया जा सकता है। 

 पूछा जा सकता है कि न्यूट्रॉन इतने प्रभावी क्यों हैं जिसके कारणों कि जांच की जा सकती है। उत्तर सीधा है, न्यूट्रॉन का कोई विद्युत आवेश नहीं होता है। नकारात्मक चार्ज के बादलों से अप्रभावित होता है जिसके साथ इलेक्ट्रॉन परमाणु नाभिक को घेर लेते हैं न्यूट्रॉन पानी की गहराई से आसानी से गुजरते हैं; गाद और रेत को हटाते हैं यहां तक ​​कि रॉक-बिड्स को किसी भी वांछित गहराई तक स्क्रैप करते हैं, नदी के दोनों किनारों पर अथवा समुद्र में हमारी इच्छा के अनुसार, कुछ ही दिनों मे नहीं तो घंटो मे इस प्रक्रिया से नदी-तलों को एक साथ समेकित किया जाता है इस प्रभाव से उद्देश्य का निर्वहन किया जा सकता हैं।

    बाढ़ की समस्या एक निरंतर आवर्ती समस्या है, इससे बड़ी विनाशकारी शक्ति कोई नहीं हो सकती। इसे हल करने में सरकार को केवल अपने स्वयं के अधिकारियों के ज्ञान और वैज्ञानिक ज्ञान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। 

    यह उनका कर्तव्य है कि किसी भी तरफ से आने वाले किसी भी सुझाव का स्वागत करें और अपने गुण-दोष के आधार पर उसका परीक्षण करें प्रस्तावों की बहुलता में ही सुरक्षा निहित है।
 संदर्भ:-
Writing and Speeches
Val 17

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