ज्ञान कि ज्योती आईं सावित्रीमाई फुले जयंती की हार्दिक शुभकामना..!!!

ज्ञान की ज्योती आईं सावित्रीबाई फुले जयंती, शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामना!*
🙏🪷🪷🪷🙏
    आईं सावित्रीबाई फुले द्वारा अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में किया गया कार्य समाज मे मोजूद आजतक सारी समाजीक व्यवस्था से भी बढकर उच्च कोटि का कार्य जिन्हें महान एव अद्वितीय बनाता है हम बहुजन समाज के लिए वह भारत रत्न पुरस्कार से भी बढकर है। जहाँ खेलकूद, राजनीति,नाच,गाना, बजाना ऐसे कार्य करने वाले लोगों को भारत रत्नसे नवाजा जाता है, कितनी शर्म की बात है! जिन्हेंने समाज का बुनीयादी कार्य किया उन महान कार्यको व्यवस्था जानबूझकर नजर अंदाज कर देतीे है परंतु समाज मे जन्मे इन माहापुषों का कार्य दूनीया के अस्तित्व तक अमर रहने वाला है इन माहापुषोंके विचारों को दूनीया हर समय पूजती रहेगी, उनके कार्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती रहेगी. वर्तमान मे जहाँ "भारत रत्न" पुरस्कार मिले लोगोके कार्य को जनता जानती तक नही जिन्हें जानती है उनके कार्यों को समाज मानती तक नही ऐसी परीस्तीती मे कुछ जिनकी पात्रता नहीं है ऐसे लोग भारत रत्न से नवाजे गये जो उस सन्मान के लायकतक नही थे उन्हें सम्मानित किया गया परंतु समाज का बूनीयादी कार्य याने समाज को शिक्षीत करना जो विपरीत परीस्तीती मे समाज की महीला,पिछडो,वंचीतो को प्रदान कीया जिसका परिणाम आज बहुतायत समाज शिक्षीत बना इस कार्य के प्रति इज्जत देना जरुरी था परंतु असमानता की बुनियाद पर खडी आज की समाज व्यवस्था आईं सावित्रीबाई फुले के कार्य को नजर अंदाज कर समस्त वंचित समाज का तथा नारी जातीका अपमान करती है एसी कृति से समाज मे पुरातन विचारों का प्रभाव आज भी दिखाई देता है क्यों की, जहाँ धर्मशास्त्र आदेश देता है के "ढोर गवार शुद्र पशु नारी सब ताडन के अधीकारी" मतलब आज भी नारी को समाज मे प्राथमिक दर्ज नही है इन सारी कुरीतियों को उध्वस्त कर लडकियों की शिक्षा के लिये दिनरात परिश्रम कर भारत की प्रथम स्त्री शिक्षिका, स्त्रियो के हक्क के लिये लढने वाली समाजसुधारक क्रांतीज्योती आई सावित्रीबाई फुले का कार्य जो भारत रत्न से भी महान है उनके कार्यों को समाज के पुरुषों के साथ साथ महीलाओ ने भी नजर अंदाज किया यह उनके विचारों की स्मृति की अवहेलना है जो बहोत ही खेद जनक है.*
     *अवहेलना की सिमा कल और आज भी हो रही है राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुलेजी के देहावसान के बाद उनके चिता को अग्नि देने के लिये उनके दत्तक पुत्र यशवंत को धर्मशास्त्र और समाज अनुमति नही देने पर स्वयं पुरानी निच परंपरा को ठुकराकर स्वयं आईं सावित्रीबाई ने चीता को अग्नि दी जिसका तत्कालीन समाजने उनकी बडी अवहेलना की और आज उनका वंशज बहुजन समाज भी अवहेलना कर रहा है ऐसे सोये समाज को जगाकर भुलाये गये महापुरुषों को सन्मान प्रदान करने का संकल्प लेकर सामाजिक चेतना को उजागर करने का संकल्प लेते है. क्रांतीज्योती आई सावित्रीबाई फुले की जयंती के उपलक्ष पर उनके क्रांतीकारी विचारेंको कोटी कोटी नमन !!!*

Comments

Popular posts from this blog

सॉची मोहोत्सव

संस्कारशील_पीढी_ही_समाज_की_समस्या_का_समाधान_है

The Buddha and his Dhamma Post 54 to 65