वर्षावास क्यों?

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आषाढ़ पूर्णिमा का अर्थ है गुरु पूर्णिमा। बुद्ध धम्म में इस पूर्णिमा का क्या विशेष महत्व है❓
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          भगवान बुध्दने उनका पहला वर्षावास इ.स. पूर्व ५२७ को ऋषीपतन सारनाथ मे व्यतीत किया था और इ.स.पूर्वी ४८३ मे अंतिम ४५ वा वर्षावास किया था।*
*उन्होंने खुद श्रावस्ती, जेतवन, वैशाली, राजगृह इत्यादी विहारोमे वर्षावास किये इस तरह सद्धम्म का प्रचार प्रसार भगवान बुध्द द्वारा कर मानव कल्याण के लिए  धम्मपथ के राजमार्ग पर आरूढ किया। वर्षावास का समंध भगवान गौतम बुध्द के जीवन की अनेको संस्मरणीय घटनाओसे जुड़ी है।आषाढ पौर्णिमा को वर्षावास आरंभ होता है और अश्विन पौर्णिमा को संपन्न होता है।*
*भगवान गौतम बुध्द के जीवन मे आषाढ़ पौर्णिमा कि कुछ प्रमुख संस्मरणीय घटनाएं*
    *1)आषाढ़ पौर्णिमा के दिन महामाता महामाया को गर्भधारणा हुई थी।*
*2)इसी दिन सिद्धार्थ गौतमने गृहत्याग किया था।*
*3)इसी दिन सारनाथ मे भगवान बुध्दने पंचवर्गीय भिक्खूं को प्रथम धम्मचक्क पवत्तन सुत्त का उपदेश किया था और उन पंचवर्गीय भिक्खूं  ने भगवान गौतम बुध्द को गुरु के रूप मे स्वीकार किया था।*
*4) इसी कारणवश यह दिन पहली बार #गुरु_पूर्णीमा का दिन इतिहास में अमर हुआ।*
*5) इसी दिनभिक्खु संघ की स्थापना हुईं थीं।*
*6)इसी दिन यश नाम के एक धनवान व्यापारी के पुत्र को भगवान गौतम बुध्द ने दीक्षा दि थी और उसको ढूंढते ढूडते भगवान गौतम बुद्ध के प्रभाव से उसके पिताने अपने समस्त परिवार के साथ सर्वप्रथम भगवान बुध्दा से तीन सरणा उपासक की दीक्षा लि थी...*
*बुद्धं सरणं गच्छामि,*
*धम्मं सरणं गच्छामि,*
*संघं सरणं गच्छामि*
*बौध्द धम्म मे वर्षावास का अनन्य महत्व है इसी कारण  इस पौर्णिमा को बेहद महत्व है इसी कारण सभी भगवान बुध्द के उपासक अनुयायी वर्षावास के समय विवीध धम्मिक उपक्रम करते है।*
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