महापुरुषों का जन्मदिवस और हमारा अतीरेक❓
हमारे जन्मदिवस का अतीरेक और महापुरुषो के विचार❗
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*वाँल्टेयर कहते है की, मैं आपके विचारो से सहमत न हो पांऊ फिर भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करूँगा" आज अभीव्यक्ती स्वातंत्र्य की रक्षा तो दुर कि बात है मगर वाँल्टेयर निर्माण होनाही बंद हो गये है. समाज मे सामाजिक कुप्रथा के विरुद्ध आवाज को बुलंद करने वाले वाँल्टेयर निर्माण होना जरूरी है आज सच बोलने वाले लोगों की समाज को सक्त जरूरत है.आप मेरे विचार से सहमत होंगे या नहीं होंगे लेकिन मुझे मेरे विचारोंको अभीव्यक्त करने का स्वातंत्र्य लोकतांत्र में है.*
*समाज में कुछ लोग व्यक्तिगत स्तर पर जन्मदिन,शादी की सालगिरह मनाते हैं जबकि कुछ लोग बडे पैमाने पर धुमधाम से सार्वजनिक स्तर पर जन्मदिन मनाते हैं और कुछ लोग अपने जन्मदिन को कभी यादभी नहीं करते है. जन्मदिन के अवसर पर बधाई देना एक बहुत ही सकारात्मक भाव है पर कुछ लोग अपने आकाओं को खुश करने के लिए बैनर,पोस्टर बनाना,सोशल मीडिया पर संदेश को प्रसिद्ध करना,फुलो का हार केक मिठाई देकर पैर पडना हालांकि कुछ लोग जिंदगी में अपने माँबाप के पैर छुये नहीं होते है वह लोग जन्मदिन वाले व्यक्ति पर जान नौछावर करते है वे मान सन्मान यह जरुरत के हिसाब से देते है ऐसा क्यों किया जाता है? क्यों की भविष्य में उनसे लाभ मिलने की मनोकामना रख कर कार्य करते है. जन्मदिन मनाने का उत्सव सकारात्मक है परंतु जब इसका बेवजह अतीरेक होता है तब यह विषय सामाजिक दृष्टि से चिकित्सा करनेवाला बन जाता है.जन्मदिन मनाना यह निजी मामला है पर सोशल मीडिया पर बडे पैमाने पर जबरन सार्वजनिक तौर पर जन्मदिन मनाने की प्रतीयोगीतासी लगी होती है सामाजिक समस्या पर कार्य करने के बदले कुछ लोग अधिक समय केवल शुभकामनाएं लेनेका और देनेका काम करते हैं जिसका मतलब भविष्य में उस व्यक्ति से कुछ लाभ प्राप्त होने की मनोकामना होती है.सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं आभासिय और उपरी होती है और कुछ लोग इसके विरुद्ध प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तैरपर जन्मदिन की शुभकामनाएं लेना और देना नापसंद होता है.अधीकतर लोग मतलब को ध्यान में रखकर ही जन्मदिन मनाते है और कुछ लोग केवल अनुकरण तैर पर जन्मदिन मनाते हैं चाहे घर परिवार चलाने के लिए पैसा हो या नहो!और कुछ लोग दाने दाने के लिए मोहताज होते है उनका तो सवाल ही नही! जिवन की वास्तविकता को समझने वाले तथा महापुरुषोंकी विचारधारा पर चलने वाले वास्तविकता को समझकर प्रतीक के तौर पर जन्मदिन मनाते है.और थोड़े जागरूक लोग जन्मदिवस याद होने पर भी जन्मदिन से ज्यादा जिन्दगी की और महत्वपूर्ण बातों को महत्व देते है. अर्थात लालच रखने वाले व्यक्ति अपने स्वाभिमान और स्वातंत्र्य उस व्यक्ति के चरणों में समर्पित करता है ऐसे लोग समाज में अवसर का लाभ उठा लेते है ऐसे लोग अवसरवादी,चमचे और दलाल कहलाते है जो सामाजिक तौर पर हानिकारक होते हैं.*
*इतिहास मे देखा जाय तो हमें यह बात समझ मे आयेगी के हमारे महापुरुष छत्रपति शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज, राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, डाँ.बाबासाहब आंबेडकर इन्होंने जन्मदिन मनाया 16 वी शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज और अंग्रेजों का संघर्ष सभी को ग्यात है उस दौर में अंग्रेज लोग अपना जन्मदिन मनाते थे इसका प्रभाव छत्रपति शिवाजी महाराज पर नहीं हुआ. छत्रपति संभाजी महाराज को कई भाषाएँ अवगत थी संसार मे कई तत्वव्येक्ता तथा बुद्धिजीवीयोसे उनका संपर्क आया पर उन्हेंने भी खुदका जन्मदिन कभी नहीं मनाया. राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले बडे परीवार से तथा बडे व्यापारी थे उनका संपर्क कई संस्कृतियो से आया पर जन्मदिन मनाने का खयाल क्यों नहीं आया? छत्रपति शाहूजी महाराज तो कोल्हापुर संस्थान के राजा थे पर इस ल़ोकराजा ने जनमानस की सेवा करने को महत्व दिया परंतु खुद का जन्मदिवस नही मनाया. डाँ.बाबासाहब आंबेडकर तो जर्मन,युरोप अमेरिका मे रहे लेकिन खुद का जन्मदिवस मनाने का खयाल भी नही आया इस विषय के बारेमें.......*
*‼️डाँ.बाबासाहब आंबेडकर कहते हैं "मुझे_अपना_जन्मदिन_मनाना_पसंद_नहीं_है"‼️*
*तथागत भगवान बुद्ध की 2494 वी जयंती पर डाँ.बाबासाहब आंबेडकर की अध्यक्षता मे दि.02/05/1950 को दिल्ली मे जनसभा संपन्न हुई थी इस अवसर पर डाँ.बाबासाहब कहते है, "कुछ दिनों पहले कुछ युवाओं ने मेरा जन्मदिन मनाने की इच्छा व्यक्त की थी और मुझे उस समारोह में शामिल होने के लिए कहा था. लेकिन मैंने यह कबूल नहीं किया. मेरी अनुपस्थिति से बहुतों को निराशा हुई होगी.लेकिन इससे मुझे बुरा नहीं लगा. क्योंकि मेरे जैसे सामान्य व्यक्ति का जन्मदिन मनाने से क्या लाभ होगा? मुझमे और आप लोगों मे क्या खास बात है? क्या तुममें मुझसे कम इंसानियत है? मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता.कुछ लोग आपना जन्मदिन मनाना पसंद कर सकते हैं, "मुझे अपना जन्मदिन मनाना पसंद नहीं है" तो मैंने उन युवाओं से कहा कि, भगवान बुद्ध का जन्मदिन मनाएं".*
*डाँ.बाबासाहब की,भगवान बुद्ध और उनके विचारधारा पर इतनी बड़ी आस्था कि, अपने गुरु तथागत बुद्ध का जयंती समारोह मनाने को आदर्श बताते है महान व्यक्तित्व डाँ.बाबासाहब ने अपने जीवन में कभी भी व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में जन्मदिवस नहीं मनाया.*
*समाज मे कुछ लोग आज बाबासाहब के जयंती समारोह में केक काटकर, डि जे पर नाचगाना कर, खानपान का भंडारा लगाकर,पोस्टर होर्डिंग लगाकर या लगवाकर लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर जयंती मनाते हैं और परीणाम शुन्य होता है.*
*समाज में कुछ लोगों को छोडकर अधिकतम लोग जन्मदिन पर हजारों रुपये खर्च करते है नेता तथा जनसमान्य के साथ साथ समाज का अधीकारी वर्ग भी पीछे नहीं है कुछ लोग अपने आपको सोशल मिडिया पर फोकस करवाते है, बँनर होर्डिंग लगाकार अस्तित्व का अहसास दिलाते हैं, कुछ दुसरे व्यक्ति के जरिए प्रसिद्धी का कार्य करवात हैं और कुछ तो स्वयं ही स्वयं को प्रसिद्ध कर दुसरो से शुभकामना कि अपेक्षा करते हैं और कुछ लोग गरीबो को मदत करने का ढिंढोरा पिटाते है परंतु उस गरीब पर गरीब रहने की, नौबतही न आये इसलिये कृती शून्य होते है. अधिकतर लोग अपने दयावान, गाँडफादर, नेता अधिकारी इनके संबंध को बनाये रखने के लिए, भविष्य में कुछ मिलने की अपेक्षा लिये लाचार, दलाली और गुलामी को भुलाकर आडंबर और दांभिकता का दिखावा करते है महापुरुषों की विचारधारा को दरकिनार कर स्वयं के विचारों को थोपते है यह हकीकत जो दिखावा,आडम्बर समाज भलिभांति जानता है समजता भी है.*
*डाँ.बाबासाहब आंबेडकर कहते है कि भगवान बुद्ध की जयंती क्यों मनाना चाहिए? दि.23 जुन 1956 अ.भा.बौद्धजन समीती द्वारा दिल्ली मे डाँ.बाबासाहब आंबेडकर के निवास स्थान पर बुद्ध जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह मे कहा कि, समाज मे प्रत्येक पुर्णीमा को ऐसे समारोह का आयोजन करना समीती का संकल्प हैं. पुर्णिमा के प्रशांत वातावरण मे पूर्ण चंद्र कि शीतला छाया मे मणुष्य को अपने कार्योंका अवलोकन, शांततापुर्ण और गंभीरतापूर्वक करने का अवसर प्राप्त होता हैं यह पुर्णिमा की विशेषता है.कार्यों का अवलोकन मतलब व्यक्ति द्वारा व्यक्तिगत तथा समाजिक कार्यों के द्वारा सामुदायिक किये गए कार्यों का परिणाम. क्या रह गया और क्या करना चाहिए इसका नियोजन आज कुछ लोग छोडकर अधिकतर लोग डाँ.बाबासाहब का भौतिकता मे उदात्तीकरण कर निला निला माहौल,जोर शोरसे जयजयकार,बाबासाहब का खुन इन बातों को अहमियत देते है इन बातें के ऐवज मे हमे निरंतर जयंती स्मृति दिवस पर संकल्प लेकर,उनकी विचारधारा, उनके कार्यों को गंभीरतापूर्वक आगे बढाना और जमीनी स्तरीय कार्य पर अंमल करना ज्यादा महत्वपूर्ण है!*
संदर्भ:-
Writing and speeches
Val 18
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