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निस्वार्थ मदत और उसका परिणाम

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🔥🔥🔥🔥     समाज में कुछ लोग पूरी तरह से स्वयं होकर निर्पेक्ष मदद करने की पहल करते हैं क्योंकि ऐसे लोगों को मदत, सहायता करने के कुशल कर्म के महत्व का एहसास हो गया होता है। व्यक्तिगत,संगठनात्मक या संघीय, कुछ लोग बहुसंख्यक लोगों को पूर्णरुपसे निर्पेक्ष सहायता कर उनके कार्य में हाथ बँटाना और सामाजिक सहायताका कार्य कर इस शृंखला को सक्रिय कर अधीकांश लोगों तक समाज मे आगे बढ़ाने की जरूरत है। समाज के विभिन्न घटकों ने हमे विभिन्न तरह से  हमारी मदद की है, जिसका परीणाम उनके फल कि मिठास आज चख रहे है अनुभव कर रहे है। मदत के कुशल कर्म और सहायता के कर्मों से अवगत होकर हमने जरूरत और आवश्यकता के समय जरुरतमंदो को सहायता करना याने समाज द्वारा हमें प्राप्त हुआ ऋण समाज को लौटाना होता है।       मदय और सहायता का स्वरूप यह समय, बुद्धि, धन, प्रयास, आत्मविश्वास, मार्गदर्शन जैसे विभिन्न रूपों में होता है जो सम्यक और विधायकतापुर्ण कुशल कर्म है। कुशल कर्म एक गतिमान क्रिया है जो उद्देश्यपूर्ण और सचेत रूप से की जाती है। कुशल कर्म हमारी स्थिति को निर्धारित करता है।  ...

अन्याय अत्याचार गरीब,बेबस पर क्यो होता है?

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        समाज मे अन्याय अत्याचार पर उच्च स्तरीय व्यक्ति ने आवाज उठाई या लिखा तो उसे लेखक कहलाते हैं और इसके विपरीत  पिढीत पिछडे व्यक्ती ने आवाज उठाई तो उसे जातीवादी काहा जाता है अन्याय अत्याचार के विरुद्ध समाज में समस्या रखकर उसपर उपाय निकालना जरूरी है । समाज मे अन्याय अत्याचार गरीब,बेबस,मजलूम पर होता है अक्सर देखा गया है कि बलि भेड बकरियों कि दी जाती हैं शोरों कि नहीं! आज के दौर में शेर बनना मतलब खुन खराबा करना या असंवैधानिक मार्ग का अवलम्बन करना न होकर, बुद्धिजीवी और आर्थिक संपन्न बनकर समाज में सशक्त परीणाम देनेवाले संघटनात्मक तरीके से व्यक्ति और सामाजिकहितों के लिए कार्य करनेवाला कार्यकर्ता,अनुयायी का निर्माण करना और होनेवाले अन्याय अत्याचार का संविधानिक तरीके से सामुदायिक तौर पर मुकाबला करना है।        संघ को मजबूती प्रदान करना यह संघटन के बुद्धिजीवी, विद्वान और समान्य प्रचारक, प्रसारक और अभ्यासको की जिम्मेदारी होती है। किसी भी संघ या संघटन मे उसके ध्येय और उद्देश्य को पुर्ण करने के लिए समाज मे सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ परीणाम...

भारत रत्न राजर्षि शाहु महाराज

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🙏🏻💐💐🙏🏻         भारत के इतिहास में गौतम बुद्ध ने राज्य त्याग करकर विश्व के कल्याण का विचार किया। चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने मानव कल्याण के किया कार्य किया ज्योतिबा फुले, शाहू जी महाराज ने भी इन्हीं महापुरुषों के कदमों पर चलकर समाज में समता, बंधुत्व,स्वतंत्रता का आंदोलन निरंतर चलाया।छत्रपति शाहूजी महाराज का समाज के लिए किया गया अद्भुत कार्य को देखकर कानपुर के कुर्मी समाज ने उनको राजर्षी यह उपाधि प्रदान की। उनके नाम से देशमे समाजीक न्याय दिवस मनाया जाता है। छत्रपति शाहूजी महाराज कि शिक्षा राजकोट के राजकुमार कॉलेज में हुई अपने उम्र के 20 वे साल मे वे कोल्हापुर संस्थान के राजा बने 1902 में इंग्लैंड के केंब्रिज विद्यापीठ ने उन्हें LLD यह पदवी दी। छत्रपति शाहूजी महाराज का समुचे समाज के प्रति समाजीक दृष्टिकोण का कारण यह है कि उनको शैक्षणिक और उदारीकरण का दृष्टिकोण विदेशी शैक्षणिक दृष्टिकोण के कारण हुई। उन्हें फितुझ राँल्ड नामके बुद्धिमान अंग्रेज शिक्षक को शिक्षा के लिए नियुक्त किया। वे राजकोट के राजकुमार काँलेज मे पढे उनको आगे पढाने के लिए फ्रेझर नामक शिक्षक ...

गुनाहगार जमात को मुख्य प्रवाह मे लानेवाले एकमात्र राजा

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      कोल्हापुर संस्थान मे छत्रपती शाहु महाराज के कार्यकाल में अपने संस्थान में फांसे पारदी यह गुन्हेगारी जमात थी जो खुद को महाराणा प्रताप के वंशज समझते थे इस जमाती को जानबूझकर कई सुविधाओं से बेदखल,वंचित कर रखा था। फांसे पारधी यह जमाती जो पिछड़ी  जमात जिनकी रोजीरोटी पक्षोंयो को फांसे मे पकडना शिकार करना उन्हे बेचना था यह लोग उस पर अपना गुजर बसर करते थे।       एक बार शाहू महाराज कटकोळा गाव आये वहाँ उन्हें फासे पारधी लोगों की अनेकों शिकायते मिली के गांव के फांसे पारधी जाती के लोग महाराज के छावनी पर डकैती डालते थे यह बात महाराज के सुनने में आई उन्हें सैनिकों द्वारा पकडकर कारागृह में रखा। उन्हें किसी बात की तकलीफ न देकर उनके खाने की व्यवस्था की शाहु महाराज का यह मानना था कि कोई भी लोग मुलत: गुनहगार प्रवृत्ति का नहीं होता। उनका गलत मार्ग पर चलने के अनेकों कारण हो सकते हैं जरूरी होता है उस बात को समझने की यही बात छत्रपति शाहू महाराज ने उन लोगों को उस जमात को समझा और उन्होंने इस बात को समझने की कोशिश की वह लोग चोरियां क्यों करते है। कोई भी व्यक्ति...

छत्रपती शाहू महाराज और आरक्षण

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छत्रपती_शाहू_महाराज_और_आरक्षण 🇸🇨🇬🇺☸️🇬🇺🇸🇨      शाहू महाराज ने अपने संस्थान में पिछडो वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया आरक्षण का विरोध करने के लिए सांगली के अँड.अभ्यंकर इन्होंने शाहू महाराज को आरक्षण के विरोध के बारे मे बातचीत की। उन्होंने महाराज की मुलाकात लेकर विरोध के बारे में बताया उसपर शाहू महाराज ने उन्हें अपने तबेले में ले जाकर सिद्ध करवाया के ताकतवर घोडे के साथ कमजोर घोड़ों को एकसाथ चने खानेके लिए छोडा जाए तो ताकतवर घोडे कुछ कमजोर घोड़ों को लातों से मारकर खाने से वंचित कर देंगे और भगा देंगे। उसी तरह से मजबूत समाज कमजोर समाज के वर्ग को सुविधा हक अधीकार से वंचित रखेंगे वे शिक्षा और सत्ता मे आगे आने नहीं देंगे। इसी लिए कमजोर घटकोंको विशेष सुविधाएं देनी जरूरी है।