विहार बनाने के उद्देश

 
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     राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका यह अभ्यासिका कम और विहार ज्यादा है। विहार बनानेके जो उद्देश बताएं गये है उन उद्देश्यों की पुर्तु करने का प्रयास करना जरूरी है। हमारे विहारों में अभ्यासिका अध्ययन तथा धम्म शिक्षा और आचरण के साथ साथ समय समय पर दुर दराजों से आएं मिशन और धम्म कार्य करने वाले कार्यकर्ता,अनुयायी गांव देहात के विद्यार्थियों तथा जरुरतमंद लोगों के लिए विश्राम तथा आश्रय की व्यवस्था अभ्यासिका द्वारा की जाती है। अन्य विहारों में भी ऐसी मदत समाज को होनी चाहिए तभी समाज को हमारे विहारों, वास्तूओं के निर्माण का उद्देश्य सफल होगा।
      केरळ, तामिळनाडू, कर्नाटक, आंध्रा इन राज्यों से दिक्षाभूमी को चली बिस लोग की, असोका आंबेडकर धम्म यात्रा रॅली की व्यवस्था राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका शेगांव रहाटगाव जी.अमरावती अभ्यासिका ने की, धम्म यात्रा के साथ शहर के 
विविध विहारों में जागृती अभियान कार्यक्रम भी चलाया गया।

        18 मार्च 1956 को आगरा मे एक बुद्धविहार के उद्घाटन के मौके पर बोलते हुए डॉ बाबासाहब आंबेडकर जी ने लोगो को समझाया कि बुद्धविहार बनाने के पीछे तीन प्रमुख उद्देश्य हैं:-

1)हमारे समाज के अधिकतर लोग गाँवों मे रहते हैं ,किन्तु रोजगार , नौकरी, हायर एजूकेशन और इन्टरव्यू इत्यादि के लिए उन्हें शहरों मे आना पड़ता है । यहाँ उन्हें ठहरने का ठौर ठिकाना नहीं मिलता और वे फुटपाथ , रेलवे स्टेशन , पार्को , खुले मैदानों मे रहने को मजबूर होते है । 
2)दूसरे समाज के लोग जब शहर आते है तो उन्हें अपनी अपनी जाति के लिए बनाई धर्मशालाएं , होटल , गैस्ट हाउस इत्यादि आसानी और निशुल्क या कम से कम खर्चे मे मिल जाते है । इन बुद्धविहारों के बनने से हमारे लोग भी जब शहरों मे आयेंगे तो सम्मान के साथ ठहरेगें, ये बुद्धविहार उनकी हर तरह से सहायता करेंगे ।

3)इन बुद्धविहारों मे एक अग्रेजी माध्यम से संचालित स्कूल खुले जिससे हमारे समाज की भावी पीढी के बच्चे भी दूसरे समाज के बच्चों के समकक्ष खड़े हो सके। इन बुद्ध विहारों मे दुकानें बनाकर अपने लोगों को रोजगार और व्यापार के अवसर प्रदान कर आर्थिक रूप से सक्षम बनाना । अन्त मे उन्होंने लोगों को समझाया कि रोजगार और सम्मान देना ही सबसे बड़ा धर्म है इन बुद्धविहारों मे हमारे अपने बच्चे पढेगें, अपने लोग पढायेगे और दुकानें चलयेंगे तो उन्हें रोजगार मिलेगा और वे सम्मान के साथ जीवन बिताएगें.ऐसा करने पर हमारे विहारों, वास्तूओं के निर्माण का उद्देश्य सफल होगा।

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