भारतीय भाषाओं की जननी धम्म लिपी पाली भाषा है जिसकाअध्ययन दुनिया में जारी है।
जम्बूदीप के लोग पाली पाकुत जिसे धम्म लिपी कहा जाता है जो जनसामान्य भाषा थी बौद्ध और जैन तत्वज्ञान पाली पाकुत साहित्य में मिलते है। बौद्धों के बड़े पैमाने पर पुरातात्विक प्रमाण शिलालेखों पर बौद्ध साहित्य में उपलब्ध है। 1894 में लेखक गौरीशंकर हिराचंद ओझा की किताब भारतीय प्राचीन लिपि माला में लिखा है कि भारत की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत न होकर पाली है।
धम्म लीपी पाली भाषा से भारत की सारी भाषाओं की उत्पत्ति मानी जाती है। बौद्ध विद्वानों सबसे पहले (शब्द विद्या) व्याकरण का निर्माण किया। सातवीं सदी में नालंदा विश्वविद्यालय में पाली धम्म लिपी से जो भाषा बनी उसे हायब्रिड बुद्धीष्ट संस्कृत बनी इस पर पाली पाकुत का प्रभाव दिखता है इसलिए इसे संस्कृत समझ लिया जाता है यह आगे 11 व 12 वी सदी में क्लासिकल संस्कृत का आकार लेती है।
#धम्म_लीपी_पाली_भाषा का अध्ययन आज भी पूरी दुनिया में जारी है।
★ बुद्ध के धम्म से संबंधित सभी जानकारी का भंडार पाली भाषा में भरा हुआ है।
★ केवल भिखू ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी भी इस भाषा को सीख रही है।
★ पाली भाषा में चिकित्सा विज्ञान, वास्तुशास्त्र, प्रबंधन शास्त्र और अर्थशास्त्र भी शामिल हैं।
★ विश्व के बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में पाली भाषा पढ़ाई जा रही है।
★ किसी अन्य भाषा में पाली शब्दों के सटीक अर्थ बताना संभव नहीं है।
★ पाली भाषा में कई शब्दों के अनेक अर्थ स्पष्ट रूप से प्रकट होते हैं।
★ पाली भाषा अनेक भाषाओं की जननी है।
★ अब यह केवल बौद्ध समुदाय तक सीमित नहीं रही। पाली जातक कथाओं का अनुवाद अनेक भाषाओं में किया गया है।
★ यह भाषा डेढ़ सौ वर्ष पहले लगभग विलुप्त हो चुकी थी, पर अब हर जगह इसका प्रसार हो रहा है।
★ अन्य भारतीय भाषाओं को छोड़कर केवल इस भाषा के लिए ब्रिटिशों ने पाली टेक्स्ट सोसाइटी की स्थापना की थी।
★ पाली भाषा के विद्वानों का प्रभाव अन्य भाषाओं के विद्वानों की तुलना में निरंतर बढ़ता जा रहा है।
यह भाषा बुद्ध काल,सम्राट असोक जो स्वर्णिम साम्राज्य का हिस्सा थी इसलिए हमारी विरासत धम्म लीपी का प्रसार करना चाहिए|
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