Posts

सॉची मोहोत्सव

Image
सारिपुत्र तथा महामोग्गलायन बुद्ध के शिष्यों की अस्थि अवशेष दर्शन समारोह #हर_साल_नवंबर_माह_के_चैथे_शनिवार_और_रविवार_को_आयोजीत 🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨 बौद्ध तत्वज्ञान की अमुल्य धरोहर जो समुचे जंम्बुद्विप मे मौजूद है जो अधिकतर विश्वधरोहर की श्रेणी मे है 30 नवंबर 1952 मे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु एवं श्रीलंका सरकार की संयुक्तता मे समारोह आयोजित कीया गया था जिसमे भंते संघरक्षीतजी समुचे भारत मे अस्थियो को दर्शनार्थ घुमाया गया जिसमे भंते संघरक्षीजी ने सहभाग लिया था और बौद्धधम्म मे श्रद्धाका क्या महत्व होता है यह जताया.वर्तमान समय मे हमे चर्चित स्थलो गया,नेपाल,सारनाध, महू,दिक्षाभुमी,भिमाकोरेगांव जैसे चर्चित स्थलो के बारेमे जानकारी है सांची समारोह के बारेमे अधिकांश लोग अनभिज्ञ है यह जो विश्व धरोहर है हम सभी ने हमारी संस्कृति को संभालना जरुरी है साथ साथ इस समारोह के बारेमे सभी को जानकारी देना भी जरुरी है. सम्राट अशोक ने भारत मे 84 हजार स्तुपों का निर्माण किया जिनमे तथागत बुद्ध की अस्थिया प्रस्थापीत की गई है उनमेसे एक सांची भोपाल भी है. 1818 मे मार्क टेलर ने इसे खोजा था 1989 मे युनेस्को ...

समता सैनिक दल जिंदा रहेगा तो आंबेडकर मिशन जिंदा रहेगा

Image
      इस बात को ध्यान में रखते हुए समता सैनिक दल में बच्चों से लेकर महीला पुरुष और वृद्ध भी शामिल होते हैं। समता सैनिक दल की स्थापना 24 सितंबर 1924 को सामाजिक न्याय, मानवता, और अहिंसा के मूल्यों के प्रचार-प्रसार तथा पतीत, वंचित एवं पिछड़े वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए की गई थी। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था कि, “यह संगठन हमारे आंदोलन का अभिन्न अंग है, और सच्ची समता स्थापित करने के लिए इसकी स्थापना की गई है”। समता सैनिक दल का मुख्य ध्येय और उद्देश्य भारत में वर्ग, जाति, लिंग, धर्म, एवं नस्ल के आधार पर होने वाली सभी विषमताओं को मिटाकर एक समानता और स्वतंत्रता पर आधारित समाज का निर्माण करना है।  सामाजिक आंदोलन में समता सैनिक दल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महाड़ सत्याग्रह के दौरान समता सैनिक दल ने डॉ.बाबासाहेब की रक्षा करने और आंदोलन को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नासिक कालाराम मंदिर आंदोलन को संचालित करने और प्रतिभागियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। दल का उद्देश्य अनुसूचित जाति, वंचित एवं उत्पीड़ित समाज के लो...

मैत्री अंत करण की स्वतंत्रता

Image
  मैत्री सिर्फ दोस्तों के साथ बैठने या हँसी-मजाक, खान-पान करना अपना समय एक-दूसरे के साथ बिताना यही मैत्री का अर्थ लेकर चलते है।  मैत्री तो दुराचारी अनैतिक लोग जिसमें कुसंगति,अभिमानी,जुआरी, व्यभिचारी, शराबी, धोखेबाज़, रिश्वतखोर और हिंसक ऐसे स्वभाव के व्यक्तियों की भी मैत्री होती है इस तरह की नकारात्मक मैत्री से बेहतर है कि सदाचारी व्यक्ति एकांत में रहो, पर सच्चाई का साथ न छोडे। मूर्ख की संगति से दूर रहे; जैसे जंगल में हिरण अकेला फिरता है, वैसे ही आत्मनिर्भर बने। सच्ची और व्यापार मैत्री बौद्ध धम्म के अनुसार सिर्फ भावना नहीं, वो धम्म की ज्वाला है। पुण्यकर्म भी उतना मूल्य नहीं रखते जितना मैत्री का एक अंश! मैत्री, अंतःकरण की स्वतंत्रता है। वह सब पुण्यकर्मों को अपने में समेट लेती है, प्रकाशित होती है, प्रज्वलित होती है। मैत्री की व्यापकता सम्पूर्ण प्राणिजगत संपूर्ण जीवमात्र के प्रति करुणा और बंधुभाव। यह केवल मित्रों के लिए नहीं, बल्कि शत्रु के लिए भी उतना ही प्रेमभाव यह भाव केवल मित्रों के लिए नहीं, शत्रुओं के लिए भी हो, यही सच्ची मानवता है। अगर कभी अपमान हो तो उसका उत्त...

अधिवक्ताओं ने डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम के प्रति भारी आलोचना क्यों की?

डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर समाज को जाति, असमानता और पुरुष प्रधानता से मुक्त करना चाहते थे। उन्होंने कानून के माध्यम से महिलाओं और दलितों के अधिकारों की रक्षा की और हिंदू समाज को आधुनिक, न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने का प्रयास किया। डॉ. अंबेडकर को हिंदू विवाह अधिनियम,1955 की क्रांतिकारी धारा 13 पेश करने के लिए पारंपरिक अधिवक्ताओं की भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। यह धारा तलाक की डिक्री प्रदान करती है, जो वैदिक शास्त्रों, स्मृतियों और धार्मिक सिद्धांतों के विरुद्ध थी। वैदिक समारोहों में केवल विवाह के लिए मंत्र होते हैं, तलाक के लिए नहीं, एक बार विवाह हो जाने पर, यह जीवन भर बना रहता है। डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर का मुख्य उद्देश्य पुरुष और महिला को एक सुखी दूसरा वैवाहिक जीवन प्रदान करना था, ताकि वे पहले पति या पत्नी से अलग होकर भी एक मजबूत समाज का निर्माण कर सकें। इस धारा ने दोनों पक्षों को तलाक की डिक्री प्राप्त करने की सुविधा प्रदान की, यदि वे सौहार्दपूर्ण ढंग से एक साथ रहने के लिए खुद को समायोजित करने में विफल रहे। डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर ने पूर्व पतियों द्वारा भरण-पोषण के लिए तलाकशुदा महिलाओं की भी द...