समता सैनिक दल जिंदा रहेगा तो आंबेडकर मिशन जिंदा रहेगा
इस बात को ध्यान में रखते हुए समता सैनिक दल में बच्चों से लेकर महीला पुरुष और वृद्ध भी शामिल होते हैं। समता सैनिक दल की स्थापना 24 सितंबर 1924 को सामाजिक न्याय, मानवता, और अहिंसा के मूल्यों के प्रचार-प्रसार तथा पतीत, वंचित एवं पिछड़े वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए की गई थी। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था कि, “यह संगठन हमारे आंदोलन का अभिन्न अंग है, और सच्ची समता स्थापित करने के लिए इसकी स्थापना की गई है”।
समता सैनिक दल का मुख्य ध्येय और उद्देश्य भारत में वर्ग, जाति, लिंग, धर्म, एवं नस्ल के आधार पर होने वाली सभी विषमताओं को मिटाकर एक समानता और स्वतंत्रता पर आधारित समाज का निर्माण करना है।
सामाजिक आंदोलन में समता सैनिक दल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महाड़ सत्याग्रह के दौरान समता सैनिक दल ने डॉ.बाबासाहेब की रक्षा करने और आंदोलन को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नासिक कालाराम मंदिर आंदोलन को संचालित करने और प्रतिभागियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
दल का उद्देश्य अनुसूचित जाति, वंचित एवं उत्पीड़ित समाज के लोगों में एकता, जागृति और संघर्ष की भावना जागृत करना, ताकि वे अपने अधिकारों एवं सम्मान के लिए निर्भयता से संघर्ष कर सकें।
संगठन का प्रत्येक सदस्य अनुशासन, सद्गुण,और संगठन के नियमों का कड़ाई से पालन कर समाज में हो रहे किसी भी प्रकार के अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के लिए सदैव तत्पर रहना।
समता सैनिक दल ने सामाजिक आंदोलनों में एक क्रांतिकारी भूमिका निभाई। आज भी यह संगठन शोषित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए समानता और न्याय के सिद्धांतों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
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