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14_अप्रेल_डॉ_बाबासाहब_की_जयंती_के_उपलक्ष_मे_हमारी_जिम्मेदारी_तथा_संकल्प_क्या_हो ❓

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🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨      डॉ.बाबासाहब के जयंती अवसर पर केवल महाराष्ट्रा राज्य मे जयंती उत्सव पर 280 करोड ₹ से अधीक खर्च किया जाता हैं. महापुरुषों कि विचारधारा को फलफुलनेके लिये खाद्य और पानी देने के लिए उत्सव का आयोजन किया जाना बेहद जरूरी है उत्सव प्रियता हमारी संस्कृति और स्वाभीमाण है उत्सव तो होना ही चाहिए परंतु वह मध्यम मार्ग पर चलकर मनाना जरुरी है, तभी हम सब मिलकर सामाजिक कार्य को अधीक गतीमन कर सकते है.      डॉ.बाबासाहब समाज के प्रती गंभीर चिंता व्यक्त करते थे उनके द्वारा दी गई जिम्मेदारी; जन समूह के लिये, उनके समर्थकों के लिये, भूमिहीन मजदूर जो आज स्लम झुग्गी मे रह रहे है उनके लिये, बौद्ध भिक्षुओं (अब यह अनुयायियों की भी जिम्मेदारी है),शासकीय कर्मचारियों (सोए कर्मचारियों को जगाकर) छात्रों एवं युवाओं से (सही समय पर सम्यक ग्यान लेकर IAS,IPS,IRS बडे ओहदे के नैतिक अधिकारी बनाने के लिये कार्य) इन सब के लिये चिंतित थे. हमारे जयंती के बजट मे दि गई जिम्मेदारी, समस्याओं पर गंभीरता से कार्य के लिये नियोजन करना जरुरी है, जिससे हमारे समाज को बनानेमें मदत...

परिवर्तन का कार्य चलता रहे

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🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨     राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका के कोआर्डिनेट तुम लोगों विद्यार्थी से कोआर्डिनेट का जो सफर को अनुभव किया है वह वास्तव में अनुशासन नैतिकता और आचरण का सफर था। अभी तुम लोगों पर समाज की वास्तविक जिम्मेदारी आ गई है। तुम वो शक्ति हो, जो RJPA तथा समाज के सपनों को सच कर सकते है। फुले, शाहू और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर इन महापुरुषों का कारवां ने जो मशाल जलाई, उसे अब तुम्हें थामना है। ये मशाल सिर्फ रोशनी नहीं, बल्कि बदलाव की आग है।तुम्हारे कंधों पर न सिर्फ इतिहास की जिम्मेदारी है, बल्कि भविष्य को संवारने का मौका भी है।       भौतीकता में जिवन जिना मौज-मस्ती यह मरीचिका है। क्या समाज की आने वाली पिढी, अपने बच्चे के लिए एक बेहतर दुनिया नहीं चाहेगी? ये सब अपने आप नहीं होगा इसके लिए तुम्हें आगे आना होगा।RJPA टीम के साथ टीम वर्क करना होगा संघटन हमारी ताकत है मिलकर चलो, तो कोई रुकावट बडी नहीं होगी। समाज का कारवां तुम्हारा इंतजार कर रहा है।आज हम उस मोड़ पर खड़े हैं, जहां हमारे कृतीगत कार्य की गति धीमी हो गई है। हमारे पुराने साथी आने वाले कुछ साल...

बहिष्कृत_हितकारिणी_सभा के मेमोरेंडम में अस्पृश्यों की उद्योग-धंधों में सहभागिता

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🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨 🙏🌹🌹🌹💐       सामाजिक गोलमेज परिषद द्वारा समाज की आर्थिक स्थिति सुधार में प्रयास यह बहिष्कृत हितकारिणी सभा के मेमोरेंडम में अस्पृश्यों की उद्योग-धंधों में सहभागिता यह बुनियादी आधार है जो ऐतिहासिक संदर्भों, प्रमाणों और विचारों पर आधारित है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा 1924 में स्थापित बहिष्कृत हितकारिणी सभा (Depressed Classes Institute) न केवल अस्पृश्यों की शिक्षा और सामाजिक अधिकारों के लिए कार्यरत रही, बल्कि उन्होंने आर्थिक क्षेत्र में भी बराबरी का अवसर दिलाने के लिए गंभीर प्रयास किए। इस संस्था ने ब्रिटिश सरकार को जो मेमोरेंडम प्रस्तुत किए, उनमें उद्योग-धंधों में अस्पृश्यों की सहभागिता एक महत्वपूर्ण विषय था। परंपरागत पेशों से मुक्ति की माँग     डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि अस्पृश्य समाज को केवल उन जातिगत पेशों तक सीमित रखना अन्यायपूर्ण है, जो उन्हें सदियों से थोपी गई सामाजिक व्यवस्था के कारण करने पड़े। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि अस्पृश्यों को आधुनिक उद्योगों और तकनीकी क्षेत्रों में भी अवसर मिलना चाहिए। तकनी...

आरोप_प्रत्यारोप....शाक्य गणराज्याचा आदर्श म्हणजे पारदर्शकता आणि सर्वांचा सहभाग

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🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨      समाजिक कृती कार्य करताना काही वेळा समाज काही व्यक्ती विषयी मतभेद निर्माण होतात, आरोप केले जातात,वाद निर्माण केले जातात. ही प्रक्रिया स्वाभाविक आहे ज्यांच्या त्यांच्या अस्तित्वाशी जुडलेला विषय असतो. मात्र मतभेद वैचारिक असावेत, वैयक्तिक नव्हे.      कृतीशील कार्य करणारी व्यक्ती महापुरुषांचे विचारधारेचे परीणाम कारक कार्य करत असेल. त्यांनी वेळ, श्रम, बुद्धी आणि चळवळीला हृदयपूर्ण समर्पण दिले असेल. त्यांच्या कार्याने काहींना दिशा, प्रेरणा,आणि संधीही निर्माण झाली असेल.अशा कार्यकर्त्या व्यक्तीविरुद्ध अंध आरोप व प्रत्यारोप हे न केवळ अयोग्य आहे, तर ते समाजातील चळवळीची ऊर्जा नकारात्मक दिशेला वळवनारे आहे.        ज्यांच्यावर आरोप झाले, त्यांना देखील त्यांची बाजू मांडण्याचा अधिकार आहे.शाक्य गणराज्यात जेव्हा सिद्धार्थ गौतमांवर आरोप झाले, तेव्हा त्यांना राजसभेत बोलावून, सगळ्या जनतेसमोर त्यांचा पक्ष मांडण्याची संधी दिली गेली. आपण नेमके या उलट करतो स्वतःआरोप करतो, स्वतः वकीली करतो आणि स्वतःच न्याय निवाडा करतो. ज्यांच्याव...

अशोक चक्र राष्ट्रीय प्रतीक National Emblem

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 अशोक चक्र राष्ट्रीय प्रतीक National Emblem             भाग1      सारनाथ स्तंभ जो राष्ट्रीय प्रतीक है ये प्रतीक बौद्ध धम्म के मूल सिद्धांतों और गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़े हैं। अशोक स्तंभ के निचले भाग पर बने शेर, हाथी, घोड़ा और सांड, जो चार दिशाओं में अशोक चक्र के नीचे उकेरे गए हैं, बौद्ध धम्म में गहरे प्रतीकात्मक अर्थ रखते हैं।  #अशोक_चक्र_और_इसके_बीच_के_चक्र:-    अशोक चक्र (धम्मचक्र) बुद्ध की प्रथम शिक्षण (धम्मचक्र प्रवर्तन) का प्रतीक है, जो सारनाथ में हुआ था। यह बौद्ध धर्म के आठ मार्गों (अष्टांगिक मार्ग) और धर्म के निरंतर प्रवाह को दर्शाता है। #चार_पशु_और_उनका_प्रतीकात्मक_अर्थ #शेर:-     शेर साहस, शक्ति और बुद्ध की शिक्षाओं की गरिमा का प्रतीक है। यह बुद्ध के "सिंहनाद" (शेर की गर्जना) को दर्शाता है, जो उनकी शिक्षाओं के निर्भीक प्रचार को व्यक्त करता है।धम्म की गर्जना और नेतृत्व का प्रतीक है। जंगल का राजा शेर है वह जैसे निर्भय होता है, वैसे ही बुद्ध मानव जगत में धम्म का सिंहनाद करते हैं। #...