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स्ञी मुक्ति के एकमात्र महान योद्धा

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#स्ञी_मुक्ति_के_एकमात्र_महान_योद्धा         1939 मे हिन्दु कोडबील को सारे सनातनीयोने विरोध दर्शाया था वे स्ञी सुधार के क्यों विरोधी थे? जब के डॉ.बाबासाहब आंबेडकर स्ञी जाती को उच्च कोटि का सम्मान,समता,स्वतंत्रता प्रदान करना चाहते थे.जिस देश की महिलाये50%स्वतंत्र नही होती;तब तक वह देश आधे से ज्यादा गुलाम होता है.आज जिस बात को समाज कानून मान्यता दे रहा है यही बात बाबासाहब ने रखी थी. 1)संपत्ति मे मालिकाना हक,उसकी भी संपत्ती हो(उसे आज भी दान मे दिया जाता है,कन्यादान के रुपमे) 2)विवाह और दत्तक विधि. अपने पसंद से जीवन साथी के चयन का अधिकार.कई सुदर स्ञी को विदृप जालीम पुरुषो के साथ विवाह हुआ करता था. 3)कोपारसिनरी पद्धती,दयाभागा पद्धती 4)तलाक विवाह की गाठ न छुटने वाली मानी जाती है चाहे पति मनचाहे अत्याचार करे. 5)एक पत्नीत्व पहले पुरुष चाहे जितने विवाह कर सकता था.      आज स्ञी मुक्ति की बातें दिखावा लगती है क्यो के अत्याचार बड़े पैमाने पर हो रहा है जब की "स्ञी और राष्ट् की प्रतिष्ठा,निष्कलंकता एव स्वतंञता के बगैर कृतगीत नही हो सकती" "मैं स्ञी मुक...

विद्यार्थ्यांयों के भविष्य को अंधकारमय होने से बाल बाल बचाने वाले IAS सचिव मा.धीरज कुमार सर

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      समाज में सही मायने में समाज के लिए समाज के हित में शासन करने वाली लोग कैन होते हैं उसका जिंदा उदाहरण मा.धीरज कुमार सर IAS सचिव आरोग्य विभाग महाराष्ट्र इनके  माध्यम से उजागर हुआ है। स्वास्थ्य विभाग महाराष्ट्र शासन द्वारा आयोजित स्वास्थ्य सेवकों,स्वास्थ्य निरीक्षकों और स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों आदि की परीक्षा आयोजित की गई थी जिसमें लगभग 200 से 250 छात्रों के नाम चयन सूची में घोषित किये गये थे इनमें कुछ डिप्लोमा स्तर की पात्रता पर परिक्षा लिए गई कुछ विद्यार्थीयों ने प्रतिष्ठित संस्थानों से अपना डिप्लोमा कोर्स पूरा किया था और कुछ विद्यार्थीयों ने सामान्य संस्थाओं से डिप्लोमा कोर्स किया था उन सामान्य संस्थाओं के विद्यार्थीयों को डर था के उनका डिप्लोमा निरस्त किया जायेगा। यह जानकारी विद्यार्थीयो द्वारा राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका के समन्वयक रोहित मेश्राम सर को दि गई उसपर राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले अभ्यासिका टिम निलेश रायबोले सर,विजय शेंडे सर, लक्ष्मण बैसणे, दिनेश जामनीक सर, सोहन धंदर सर इन सारी टीम ने अपने तरीके से पुरजोर कोशिश की और मामला पहुंचा IAS...

सामाजिक गोलमेज परिषद अमरावती एक ऐतिहासिक पर्व

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🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨         डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांनी आपल्या राजकीय कैशल्याच्या आधारे 1930,1931आणि 1932 अशा तिन गोलमेज परिषदा इंग्लंडला गाजवून देशा करीता, बहुजनां सोबतच सर्व समाजा करीताचा जाहिरनामा कमुनल अवार्ड रँमसे मेक्डोनाल्ड च्या माध्यमातून हक्क व अधिकार मिळवून दिले.या माध्यमातून आज केवळ समाजातील 13% लोकांना नोकरीच्या माध्यमातून अधिकारी कर्मचारी निर्माण झाले आणि त्याच्या कडे असलेली बचत शिल्लक ही त्यांना अमाप संपत्ती वाटू लागली उर्वरित 87% लोक अद्यापही हलाखीचे जीवन जगत आहेत. ज्या समाजाला आरक्षण नाही ते कसे प्रगतीशील झाले. काही विशिष्ट समाज आर्थिक दृष्टीने कसा सक्षम झाला आहे. काही समाज विविध क्षेत्रात चित्रपट, गित संगीत, वर्ग एक अधिकारी इत्यादी क्षेत्रात विशिष्टच समाज का? आणि तो कसा प्रगतीशील झाला याचे चिंतन अध्ययन करून एक लक्षात आले की, वरील समाजाने त्यांची त्यांची सामुदायिक प्रगती केली आहे.       एखाद्या व्यक्ती डॉक्टर, वकील, इंजिनिअर,IAS,IPS,IRS,कर्मचारी अशी मोठी पदे प्राप्त केले असतील, मोठ्या डिग्री असतील ही त्या व्यक्तीची वैयक्तिक ओळख...

मातंग महारों के कष्ट

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मुक्ता सालवे कक्षा तिसरी का निबंध  ‼️‼️‼️ मातंग महारों के कष्ट 🔥🔥🔥🔥          लहूजी वस्ताद साल्वे मांतंग महारों के बच्चों को राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले के स्कूल में जाने के लिए प्रेरित करते थे। उस स्कूल में पढने वाली एक लड़की का नाम मुक्ता सालवे था। मुक्ता साल्वे नाम की मांतंग जाति की यह लड़की राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले के स्कूल में पढ़ती थी। उस स्कूल के एक कार्यक्रम में उनसे निबंध लिखने को कहा गया उस वक्त मुक्ता साल्वे तीसरी क्लास में पढ़ती थीं। उसने एक निबंध लिखा उस समय उनकी उम्र 12 साल रही होगी।   यह निबंध 15 फरवरी 1855 को लिखा गया था। उनके उत्कृष्ट निबंध के लिए उन्हें सर मेजर कैंडी द्वारा पुरस्कृत किया गया था, अर्थात उनका निबंध इतना सराहनीय था कि उन्हें पुरस्कृत किया गया। इस निबंध को पढ़ने के बाद हमें तत्कालीन समाज के बारे में बहुत सी बातें पता चलेंगी साथ ही राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले उस समय स्कूल में किस तरह की शिक्षा दे रहे थे, उस समय के बच्चों को किस तरह का इतिहास पढ़ाया जाता था यह पता चलेगा यानी राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले ...

दामोदर घाटी परीयोजना के जन्मदाता डॉ.बाबासाहब आंबेडकर

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दामोदर घाटी परीयोजना के जन्मदाता डॉ.बाबासाहब आंबेडकर         दामोदर घाटी परीयोजना के जन्म की कल्पना डॉ.बाबासाहब की देन है। उन्होंने इसे लागू करने के लिए दिन-रात मेहनत की जाहां बिहार, उड़ीसा,बंगाल इन राज्यों को नया जीवन दिया यह डाँ.बाबासाहब आंबेडकर कि देन है। जॉर्ज डब्ल्यू नॉरिस ने 1922 से पहले अमेरिका में क्षेत्रीय जल परीयोजना की नींव रखी थी इसी कारण वहां के लोगों ने उनकी याद में एक बांध को उनका नाम दिया। लेकिन भारत के लोगों ने,सरकार ने दामोदर घाटी परीयोजना कि निव रखने वाले शिल्पकार डाँ.बाबासाहब आंबेडकर को यह सम्मान नहीं दिया। इस परीयोजना के लिए डाँ.बाबासाहब ने दिन रात एक कर तकलीफ सहकर इस विषय पर कार्य किया लेकिन आज ऊनकी याद और उनके कार्य को लोगों ने ही नहीं सरकार ने भी पर्ण रुपसे भुला दिया है।           डॉ.बाबासाहब चाहते थे कि दामोदर घाटी परीयोजना गरीबों के कल्याण के लिए एक स्थायी योजना बने।अमेरिका में टेनेसी नदी कई प्रांतों से होकर बहती है। एक समय उनके बाढ से लोग हताशा होकर रह गए थे जिसतरह अमेरीकन जनता ने उसका उपयोग मानवीय सेवा ...