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वर्षावास क्यों?

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🇸🇨🇸🇨☸️🇸🇨🇸🇨 आषाढ़ पूर्णिमा का अर्थ है गुरु पूर्णिमा। बुद्ध धम्म में इस पूर्णिमा का क्या विशेष महत्व है❓ 🇸🇨🇸🇨☸️🇸🇨🇸🇨           भगवान बुध्दने उनका पहला वर्षावास इ.स. पूर्व ५२७ को ऋषीपतन सारनाथ मे व्यतीत किया था और इ.स.पूर्वी ४८३ मे अंतिम ४५ वा वर्षावास किया था।* *उन्होंने खुद श्रावस्ती, जेतवन, वैशाली, राजगृह इत्यादी विहारोमे वर्षावास किये इस तरह सद्धम्म का प्रचार प्रसार भगवान बुध्द द्वारा कर मानव कल्याण के लिए  धम्मपथ के राजमार्ग पर आरूढ किया। वर्षावास का समंध भगवान गौतम बुध्द के जीवन की अनेको संस्मरणीय घटनाओसे जुड़ी है।आषाढ पौर्णिमा को वर्षावास आरंभ होता है और अश्विन पौर्णिमा को संपन्न होता है।* *भगवान गौतम बुध्द के जीवन मे आषाढ़ पौर्णिमा कि कुछ प्रमुख संस्मरणीय घटनाएं*     *1)आषाढ़ पौर्णिमा के दिन महामाता महामाया को गर्भधारणा हुई थी।* *2)इसी दिन सिद्धार्थ गौतमने गृहत्याग किया था।* *3)इसी दिन सारनाथ मे भगवान बुध्दने पंचवर्गीय भिक्खूं को प्रथम धम्मचक्क पवत्तन सुत्त का उपदेश किया था और उन पंचवर्गीय भिक्खूं  ने भगवान गौतम बुध्द को गुरु...

14अप्रेल_डॉ_बाबासाहब_की_जयंती_के_उपलक्ष_मे_हमारी_जिम्मेदारी_और_सम्यक_संकल्प_क्या_हो

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🇸🇨🇸🇨☸️🇸🇨🇸🇨         डॉ.बाबासाहब के जयंती अवसर पर केवल महाराष्ट्रा राज्य मे जयंती उत्सव पर 280 करोड ₹ से अधीक खर्च किया जाता हैं. महापुरुषों कि विचारधारा को फलफुलनेके लिये खाद्य और पानी देने के लिए उत्सव का आयोजन किया जाना बेहद जरूरी है उत्सव प्रियता हमारी संस्कृति और स्वाभीमाण है उत्सव तो होना ही चाहिए परंतु वह मध्यम मार्ग पर चलकर मनाना जरुरी है, तभी हम सब मिलकर सामाजिक कार्य को अधीक गतीमन कर सकते है.      डॉ.बाबासाहब समाज के प्रती गंभीर चिंता व्यक्त करते थे उनके द्वारा दी गई जिम्मेदारी; जन समूह के लिये, उनके समर्थकों के लिये, भूमिहीन मजदूर जो आज स्लम झुग्गी मे रह रहे है उनके लिये, बौद्ध भिक्षुओं (अब यह अनुयायियों की भी जिम्मेदारी है),शासकीय कर्मचारियों (सोए कर्मचारियों को जगाकर) छात्रों एवं युवाओं से (सही समय पर सम्यक ग्यान लेकर IAS,IPS,IRS बडे ओहदे के नैतिक अधिकारी बनाने के लिये कार्य) इन सब के लिये चिंतित थे. हमारे जयंती के बजट मे दि गई जिम्मेदारी, समस्याओं पर गंभीरता से कार्य के लिये नियोजन करना जरुरी है, जिससे हमारे समाज को बनान...

महापुरुषों का जन्मदिवस और हमारा अतीरेक❓

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हमारे जन्मदिवस का अतीरेक और महापुरुषो के विचार❗ 🇸🇨🇪🇺☸️🇪🇺🇸🇨          *वाँल्टेयर कहते है की, मैं आपके विचारो से सहमत न हो पांऊ फिर भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करूँगा" आज अभीव्यक्ती स्वातंत्र्य की रक्षा तो दुर कि बात है मगर वाँल्टेयर निर्माण होनाही बंद हो गये है. समाज मे सामाजिक कुप्रथा के विरुद्ध आवाज को बुलंद करने वाले वाँल्टेयर निर्माण होना जरूरी है आज सच बोलने वाले लोगों की समाज को सक्त जरूरत है.आप मेरे विचार से सहमत होंगे या नहीं होंगे लेकिन मुझे मेरे विचारोंको अभीव्यक्त करने का स्वातंत्र्य लोकतांत्र में है.*      *समाज में कुछ लोग व्यक्तिगत स्तर पर जन्मदिन,शादी की सालगिरह मनाते हैं जबकि कुछ लोग बडे पैमाने पर धुमधाम से सार्वजनिक स्तर पर जन्मदिन मनाते हैं और कुछ लोग अपने जन्मदिन को कभी यादभी नहीं करते है. जन्मदिन के अवसर पर बधाई देना एक बहुत ही सकारात्मक भाव है पर कुछ लोग अपने आकाओं को खुश करने के लिए बैनर,पोस्टर बनाना,सोशल मीडिया पर संदेश को प्रसिद्ध करना,फुलो का हार केक मिठाई देकर पैर पडना हालांकि कुछ लोग ज...

डॉ_बाबासाहेब_आंबेडकरने पानी_को_कैसे_आग_लगाई❓

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#डॉ_बाबासाहेब_आंबेडकरने #पानी_को_कैसे_आग_लगाई❓ 🔥🔥🔥🔥 # 20_मार्च_1927 दोपहर को डॉ.बाबासाहब आंबेडकर तालाब की सीढ़ियों से नीचे उतरे नीचे झुककर अपनी एक अंगुली से पानी को स्पर्श किया यही वह ऐतिहासिक पल था जिसने अस्पृश्य वर्ग में क्रान्ति का मार्ग प्रशस्त किया था यह एक प्रतीकात्मक क्रिया थी जिसके द्वारा यह सिद्ध किया गया था कि हम भी मनुष्य हैं हमें भी अन्य मनुष्यो के समान मानवीय अधिकार हैं।            अंग्रेजी शासनकाल के दौरान 1924 में महाराष्ट्र के समाज सुधारक श्री एस के बोले ने बम्बई विधानमंडल में एक विधेयक पारित करवाया जिसमें सरकार द्वारा संचालित संस्थाएं अदालत, विधालय, चिकित्सालय,पनघट,तालाब आदि सार्वजनिक स्थानों पर अछूतो को प्रवेश व उनका उपयोग करने का आदेश दिया गया था कोलाबा जिले में स्थित महाङ में स्थित चवदार तालाब में हालांकि ईसाई,मुसलमान, फारसी,पशु, कुत्ते सभी तालाब के पानी का उपयोग करते थे लेकिन अछूतो को यहाँ पानी छूने की ईजाजत नहीं थी सवर्ण हिन्दुओं ने नगरपालिका सरकार का आदेश भी मानने से इनकार  कर दिया था।*        ...

भारत_रत्न_गाडगेजी_महाराज_को_विनम्र_अभीवादन

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#समाज_के_नायक_भारत_रत्न_गाडगेजी_महाराज_को_विनम्र_अभीवादन 🙏💐🌹💐🙏      भारत में सर्वप्रथम सार्वजनिक स्वच्छता की क्रांती करनेवाले माहामानव कर्मयोगी गाडगेजी महाराज जिन्होंने समाज में सामाजिक तौर पर व्यक्ति के तन,मन और सामाजिक कुरीतियों के सफाई का अभियान सबसे पहले शुरू किया था। उनके एक हाथ में हमेशा एक झाड़ू तथा दूसरे हाथ में मिट्टी का एक छोटा सा घड़ा होता था, जिसमें पानी भरा रहता था और कान में कवडी पहनते थे वह इसका अर्थ यह बताते थे की मणुष्य जिवन भी (जिसकी कोई किमत न हो)कवडी मोल है वह गांव गांव जाकर पहले साफ सफाई करते बाद मे शामको जन जागरूकता का कार्यक्रम किर्तन करते थे।सफाई करने के बदले मे कोई कृतज्ञता व्यक्त करता या उनको धन्यवाद देता तो वो कहते कि पहले मैं सफाई कर लूं बाद में आपका धन्यवाद ग्रहण करूंगा।       संत गाडगे बाबा के सार्वजनिक स्वच्छता अभियान समर्पण के आदर में महाराष्ट्र सरकार ने 2000-2001 में संत गाडगे बाबा संपूर्ण ग्राम सफाई अभियान जैसी योजना का आरंभ किया था जिसके अंतर्गत सबसे स्वच्छ गांवों को पुरस्कृत करने की योजना भी ब...