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FUNDAMENTAL PRINCIPAL OF RELIGION

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# FUNDAMENTAL_PRINCIPLE_OF_RELIGION 🇸🇨🇸🇨☸️🇸🇨🇸🇨 I mention,      1)That society must have     either the sanction of law or the sanction of morality to hold it together.Without either society is sure to go to piece. In all societies law plays a very small part. it is intended to keep the morality with the range of social discipline. The majority is left and has to be left to sustain it social life by the postulates and sanction of morality. Religion in the sense of morality, must therefore the remained the governing principle in every society. 2) That religion as defined in the first proposition must be in accord whith science. Religion is bound to lost its respect and therefore become the subject of redicule and thereby not merely lose it forces as a governing principle of life but might in course of time disintegrate and lapse if it is not in accord with science. In other words, region if it is to function, must be in accord with reason ...

युद्ध, झगडे का विकल्प मध्यस्थता

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सिध्दार्थ गौतम द्वारा शांती समझौता मतलब आज कि मध्यस्थता (Mediation) 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨        भगवान बुद्ध कहते है, "जिस प्रकार अपने जीवन का खतरा उठाते हुए मां अपने शिशु की देख भाल करती है,उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ती को सभी प्राणियों के प्रति प्रेम प्रदान करने का मन बनाना चाहिये। उसे संपूर्ण विश्व के प्रति सद्भावना रखनी चाहिए, उपर नीचे और उस पार, सभी के लिये उसके मन मे घृणाहीन और शत्रृतारहीत बंधु प्रेम होना चाहिये।एसी जीवन पद्धति विश्व मे सर्वोत्तम है।" दुनिया में जो आक्रमण कर विनाशकारी हिंसात्मक परिणाम मिलते हैं इस समस्या का समाधान "युद्ध में न होकर बुद्ध मे है" यह सिद्धांत हर कोई जानता है समझता है पर अंमल करने मे नकारात्मकता होती है। राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय व्यवहार कुशलता और स्वार्थ के कारण अन्य लोग हस्तक्षेप करने से कतराते हैं।धर्म के सिद्धांत को देखा जाय तो एक धर्म पर आक्रमण करने पर उसी धर्म अनुयायियों ने मदन करना अपेक्षाकृत होता है परंतु विनाशकारी परिस्थितियों मे उसी धर्मों के लोग मदत के लिए कतराते हैं क्योंकि उनकी अपनी समस्याये होती है जो आर्थिक, ...

दृढ़ संकल्प निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने वाले कार्यकर्ता जरूरी है!

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दृढ़ संकल्प निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने वाले कार्यकर्ता जरूरी है! 🇸🇨🇪🇺☸🇪🇺🇸🇨     हमारे समाज में,बीस साल में एकाग्रता के साथ काम करने वाला एक भी व्यक्ति दिखाई नहीं देता है. कौन्सिल या म्युनिसीपालीटीकी एका जगह के लिए 100 अर्जी तयार होते है परन्तु एकही कार्य एक मार्गसे, एक ध्येय एक लक्ष के साथ करनेवाला एकभी मनुष्य अबतक मेरे सामने दिखाई नही देता है.    शिक्षा,सामाजिक और आर्थिक कठिनाइया यह महत्वपूर्ण प्रश्न हैं इसके लिए काम करने वाले लोगों की बेहद आवश्यकता है.       कार्य करने के लिए प्रसिद्धीकी अपेक्षा किए बगैर काम करनेवाले लोगों चाहिए हर एक व्यक्ति प्रसिद्ध के पिछे है इसी कारण जो कार्य होना चाहते वह हो नही पाता है. कामचलाऊ कार्य करने से महत्वपूर्ण प्रश्न जगहपर रह जाते है इसलिए दिनरात कार्यरत,संघर्षरत रहना चाहिए.         ब्राह्मण समुदाय ने हमारे समुदाय के साथ अन्याय किया यह सच है कि उन्होंने हमें सताया है लेकिन उनकी कार्य पद्धति इतनी अच्छी है कि वे अपने द्वारा अर्जित शक्ति को बरकरार रख सकते हैं किसीभी तरह का हो...

#सम्राट_असोक_ने_पशु_पक्षियों_के_लिये_अस्पताल_बनवाये_थे

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🦅🙈🙉🙊🦅 https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2841279446132140&id=1552199775040120* चक्रवर्ती सम्राट असोक ने पशु पक्षियों के लिये अस्पताल बनवाये थे अगर पशु पक्षियों के चिकित्सा और उनके प्रति दया और करुणा का भाव रखता हो इतनी दरदृष्टीता की बात जो सोच सकता हो ऐसे महान असोक राजा के राज्य मे अपनी प्रजाजनो के प्रति किस तरह का भाव रहा होगा?* *जावा,सुमात्रा, अफगानिस्तान,काबुल और कंधार तक सामराज्य तथा अवाम को संभालना, क्या दुरदृष्टीता का नियोजन रहा होगा! सम्राट असोक से कलींग युद्ध के दरमियान राजपाट के लिये युद्ध किया और उसका प्रायश्चित ऐसा किया के इंसान तो क्या पशु पक्षियों का भी खयाल रखा गया.*   *राजपाट,सत्ता कुर्सी के चक्कर मे लाशों पे महल बनानेवाले राजा संसार ने देखे है कामना,लोभ,मोह कितनी कितनी माया कितना सत्ता का गुरूर इससे जब राजा अहंकारी होता है तब राज्य राजपाट के साथ साथ भोली जनता को उसका कष्ट सहना पडता है परिणामस्वरूप राज्य में हालबेहाल और अराजकता होने लगती है. राजा अपनी पहली गलती का ऐहसास कर प्रायश्चित करना मतलब धार्मिकता और करुणा का भाव विकसित करना होता है अगर र...

बौद्ध धम्म के प्रचारक,प्रसारक तथा अभ्यासक अनागरिक धम्मपाल*🇸🇨🇸🇨☸🇸🇨🇸🇨 *भारत में बौद्ध धर्म को पुनर्जीवन करने वाले अनागरिक धम्मपाल ने अपने जीवन के 40 वर्षों में भारत, श्रीलंका और विश्व के कई देशों में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ साथ बौद्ध विहारों का निर्माण कराया. सारनाथ का प्रसिद्ध महाविहार आपने ही बनवाया था इसके साथ साथ कई स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण कराया उनका प्रयास था कि कुशीनगर, जहाँ तथागत का महापरिनिर्वाण हुआ था फिर से बौद्ध जगत में दर्शनीय स्थल बन जाये.* *सन 1891 में अनागरिक धम्मपाल ने भारत स्थित बौद्ध गया के महाबोधि महाविहार की यात्रा की. यह वही जगह है जहाँ सिद्धार्थ गोतम को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी वे देखकर हैरान रह गए की किस प्रकार से पुरोहित वर्ग ने बुद्ध के मुर्तीयों को हिन्दू देवी-देवता में बदल दिया है. इन विषमतावादियों ने तब बुद्ध महाविहार में बौद्धो को प्रवेश करने से भी निषेध कर रखा था इसी दौरान 31 मे 1891 में महाबोधि सोसायटी की स्थापना की गई जिसका हेड आफिस कोलंबो था शीध्र ही इसे कोलकाता स्थानांतरित किया गया.* *महाबोधि सोसायटी की ओर से अनागरिक धम्मपाल ने सन 1895 मे सिविल सुट दायर किया एच धर्मापाल X जयपाल गिर जिसमें मांग की गई थी कि महाबोधि विहार और दूसरे तीन प्रसिद्ध बौद्ध स्थलों को बौद्धो को हस्तांतरित किये जाये. इसी रिट का ही परिणाम था कि आज महाबोधि विहार में बौद्ध जा सकते हैं परंतु तब भी वहां तथाकथित हिन्दुओं का कब्जा आज भी बरकरार है.* *शिकागो में संपन्न विश्व धर्म संसद जो 18 सितंबर1893 मे इस परिषद मे "विश्व पर बुद्ध का कर्जा" इस विषय पर अनागरिक धम्मपाल द्वारा बौद्ध दर्शन पर दिये भाषण से वहां पर उपस्थित दुनीया के विभिन्न धर्मों के विद्वान भौचक्के रह गए.* *बालक डेविड का जन्म एक धनी व्यापरी परिवार में हुआ था उनपर बौद्धदर्शन का गहरा प्रभाव पडा जिससे 13 जुलाई 1931 अनागरिक धम्मपाल बकायदा बौद्ध भिक्षु बन गये इन्होने प्रव्रज्या ली.16 जनवरी 1933 को प्रव्रज्या पूर्ण हुई और इन्होने उपसंपदा ग्रहण की और फिर नाम पड़ा भिक्षु देवमित धर्मपाल. बौद्ध धर्म के इतने बड़े पुनर्उद्धारक 29 अप्रैल 1933 को 69 वर्ष की अवस्था में इस दुनिया से विदा हो गये अनागरिक धर्मपाल इनके स्मृतिदिवस पर विनम्र अभिवादन और आदरांजली.💐💐💐🙏🙏🙏

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