मताअधिकार और मतदान

'मताअधिकार' और 'मतदान'
जागो और जगाओ!
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           भारतीय संविधान मे अनुच्छेद 325 व 326 के तहत प्रत्येक वयस्क नागरिक को कानूनी हक मताधिकार यह प्राप्त है सकारात्मक मताधिकार और मतदान इनमें से लोकतांत्रिक परीभाषा को समझने पर ही अपने अधीकार का प्रामाणिक तथा नैतिक मुल्य समझना जरूरी है.
      मताधिकार माने समाजमे संघटित जीवन जिने के अधिकार को शासन,प्रशासनाच्या द्वारा नियंत्रीत न करना इसे व्यक्ति द्वारा स्वतंत्रता से अधीकार का प्रयोग करने के लिये प्रेरित करना होता है.
      जहा मतदान को समझने की बात है लाचार अवस्था व्यक्ति को विवश करती है मत देना मतलब उपकार करना यह समझा जाता है और धर्मों मे दान की परीभाषा पवित्र मानी जाती है इन सारी भावनाओ को मत और दान जो मतदाता और धार्मीकता से जोडा जाता है मतदाता के मुल्य को पल के लिये अमीर और त्यागी जरुर बनाता है परंतु बादमे मत मागनेवालों को अमीर बनाता है,जिससे चालाकी से मतदाता को लाचार अवस्था की प्राप्त कर, दान का नाम देकर जनता को केवल मत का दान करने के लिये मजबूरीसे प्रेरित किया जाता है जिसके बदलाव का स्वरूप, व्यक्ति की जगह विवशता और मजबूरी लेती है फिर मत के अधीकार को बेचने की मजबूरी,पैसों की भिख देकर,दलाली लाचारी गुणो को पैदा कर अपने अधीकार को बेचने की मजबूरीकी अवस्था का निर्माण करना इस चालाकी को समझना बेहद जरूरी है.
     डॉ.बाबासाहब आंबेडकर ने मताधीकार को कडी मेहनत से हासिल किया संविधान लागू होने के पूर्व भारत में केवल 13 % जनता को मताधिकार प्राप्त था पहले अच्छी सामाजिक और आर्थिक स्थितिवाले नागरिकों को मताधिकार प्रदान किया जाता था परंतु आज हक मिला उस हक को दान कराने के लिये धार्मिक,जातीय,मजहब के नाम पर प्रेरित कर जनता की भावनाओं के साथ खेला जाता है अज्ञानवश जनता मत का मूल्य नमक और मीर्च समझते है और इसे बेचते है. गरीबी,मजबूरी,अज्ञानता,अपर्याप्त ज्ञान सेे,ज्यादा से ज्यादा लाचारो और दलालोको पैदा किया जाता है जो स्वयं बिक कर लोकतंत्र को नष्ट कर देते है. जहा जागृत व्यक्ति इस मुल्य को अपने प्राणसेभी ज्यादा समझते है यह जागृति व्यक्ति के स्वाभिमान और विवेक की जागृति से हमरे लोकतंत्रकी सही जागृति होती है.
       इसलिए सकारात्मक मताधीकार कहाँ व किसे देना है इसका चुनाव भी करना बहुत महत्वपूर्ण है मताधीकार से ही प्रतिनिधियो का चयन होता है इसलिए मताधिकार की व्यवस्था के द्वारा किसी वर्ग या समाज का सदस्य विधाइका में प्रतिनिधि भेजना जो नैतिकता का अमंल करता हो, सामाजिक न्याय, समता, स्वतंत्र,मानवाधिकार मूल्य के लिये कार्य करता हो इसलिए जागृके साथ सकारात्मक मतादाधीकार का निर्वहन करना जरुरी है चलो मतादाधीकार का प्रयोग करे.!!!

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