विद्वान और बुद्धिजीवी
बुद्धिजीवी वर्ग किसे कहते है?
*बुद्धिजीवी वर्ग माने अधीकारी बनना? डिग्रीया प्राप्त करना? तो बुद्धिजीवी और विद्वान मे अंतर क्या है ???*
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*समझ, आकलण और उसकी यथायोग्य परीभाषाका ज्ञान अगर अधुरा रहे तो अधुरे ज्ञान पर आधारभूत इमारत ढहनेसे समाज, देश की बहुतायत हानि होती है अक्सर हम किसिकोभी बुद्धीजीव कहते है समाज के बहुतांश लोग जो उच्च शिक्षीत बडी डिग्रीया प्राप्त, डॉक्टरेट, वकील, लेक्चरर, प्रशासनिक अधीकारी IAS, IPS सारे बडे ओहदे के लोग स्वयं को स्वयंघोशीत बुद्धिजीवी कहते है साथ साथ समाज का अधिकतर वर्गभी यही सोचता है जो तत्वता: नासमझी तथा अज्ञान होता है. समाजके जागृत अनुयायी वर्ग ने इस परीभाषा का आकलन कर बुद्धिजीवी, विद्वान और सामान्य के फर्क को समझना बेहद जरुरी है.*
*अक्सर भाषणों मे कार्यक्रमोमे पढे लिखे शीक्षीत, प्रसिद्ध वक्ता, साहित्यीक यह वक्तव्य करते है के, "बुद्धिजीवी वर्ग मतलब समाज का ज्यादा पढा लिखा तथा उच्च डिग्रीया प्राप्त वर्ग जिसमे अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, phD, IAS, IPS, तेहसीलदार यह सारा बुद्धिजीवी वर्ग होता है". ज्यादा डिगरिया लेना, ज्यादा पढ़ालिखा वर्ग और बढ़े ओहदेके अफसर मतलब बुद्धिजीवी वर्ग नही होते है? वह तो अक्सर नितिभ्रष्ट, अनैतिक, शराबी, गुनहगार तथा भ्रष्टाचारी भी हो सकता है फिर बुद्धिवादी वर्ग कौन होता है?*
*बुद्धिजीवी वर्ग वह है जो दूरदर्शी होता है सलाह दे सकता है और समाज मे नेतृत्व प्रदान कर सकता है किसी भी देश की अधिकांश जनता विचारशील एंव क्रियाशील जीवन व्यतीत नहीं करती, ऐसे लोग प्राय: बुद्धीजीवी वर्ग का अनुकरण और अनुगमन करते हैं यह कहनेमे कोई अतिशयोक्ती नहीं होगी कि, किसी देश का संपूर्ण भविष्य उसके बुद्धिजीवी वर्ग पर निर्भर होता है यदि बुद्धीजीवी वर्ग इमानदार, स्वतंत्र और निष्पक्ष होता है उस पर यह भरोसा किया जा सकता है की संकट की घड़ी में वह पहल कर उचित नेतृत्व प्रदान कारेगा, यह ठीक है कि प्रज्ञा अपने आप में कोई गुण नहीं है यह केवळ साधन हैं और साधन का प्रयोग उस लक्ष्य पर निर्भर है जिसे एक बुद्धिमान व्यक्ती प्राप्त करने का प्रयत्न करता है. बुद्धिमान व्यक्ती भला हो सकता है लेकिन साथ ही व दृष्ट भी हो सकता है उसी प्रकार बुद्धिजीवी वर्ग उच्च विचार वाले व्यक्ति का एक दल हो सकता है जो साहाय्यता करने के लिए तैयार रहता है और प्रथभ्रष्ट लोगों को समाज को सही रास्ते पर लाने के लिए कार्यरत रहता है.*
*युग की मुक्ती का मार्ग बुद्धीजीवी और सदाचारी व्यक्ति ही समाज को प्रदान करता है समाज के जीवन में नाशिक संभाव नाही आती जिसमें से प्रत्येक समाज को होना पड़ता है कुछ समाज बने रहते हैं और कुछ खत्म हो जाते हैं क्या कारण है कुछ जीवित बच जाते हैं ? कार्लाईल इसका उत्तर देते हैं, "कोई भी योग्य व्यर्थ सिद्ध न होता यादी एक भी बुद्धीजीवी और सदाचारी महानुभव पैदा हो जाता; जो अपनी बुद्धि से समय की व्यथा को पहचान सकता और ठीक मार्गो पर ले जानेका साहस रखता इसी में प्रत्येक युग के मुक्तीका मार्ग होता है.*
*डॉ.बाबासाहब आंबेडकर यह अद्वितीय बुद्धिजीवी थे संसार में विद्वानों की कमी नहीं है विद्वानों की गिनती लाखों में होगी किंतु विश्व में बुद्धिजीवियों की गिनती शायद शेकडों में होती है..! डॉ.बाबासाहब आंबेडकर ने विद्वान और बुद्धीजीवी की व्याख्या इस प्रकार की है..."एक विद्वान और एक बुद्धिजीवी में बहुत बड़ा अंतर होता है, विद्वान व्यक्ती में अपने वर्ग के प्रति चेतना होती है और वह अपने वर्ग के हितों की पूर्ती हेतू जागृत रहता है किंतु एक बुद्धिजीवी एक मुक्त व्यक्ती होता है जो स्वतंत्र रूप से कार्य करता है अपने वर्ग के हित उसे बहका या भटका नहीं सकते". स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाले संत गाडगेजी महाराज निरक्षर होकर भी बुद्धिजीवी कहलाये, छत्रपति शाहुजी महाराज वंचितोंके लिये कार्य कर, राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले ने तो सारे समाज के लिये शिक्षा का आंदोलन चलाया, छत्रपति शिवजी महाराज ने समाज के हर वर्ग को साथ लेकर समता और बंधुभाव के आधारपर कार्य किया इन सारे आदर्श महापुरुष के पास ऊंची डिग्रीया न होते हुए भी अद्वितीय बुद्धिजीवी कहलाये अर्थात समाज के जागृत लोगोने भी यह आदर्श अपनाकर समाज पर देश पर मंडरा रहे हर संकट से निकालने के लिये अपने बुद्धिमत्ता का उपयोग करना जरूरी है.*
*डॉ.बाबासाहब आंबेडकरने हमे समाज मे उन ढोंगी, फरेबी, पाखंडी, लाचार और धोकेबाजो की पहचाना बताई है जो समाजमे पढ़ेलिखे, विद्वान, होते है परंतु वह नितिभ्रष्ट, शराबी, भ्रष्टाचारी तथा अनैतिक होते है उनकी कसोटी का मापदंड दिया है जिससे आपको अंतर तथा फर्क करने मे आसानी होगी ताके आप बुद्धिजीवी वर्ग की तरह समाज मे कार्य कर समाज मे सामाजिक उत्थान के लिये यथायोग्य मदत कर सकते हो!!!*
*विषय संदर्भ:-*
*डॉ.बाबासाहब आंबेडकर Writing & Speeches*
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*BURNING DESIRE OF AMBEDKARITE THOUGHT...*
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*सौजन्य*
राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले
*अभ्यासीका*
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